सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उनकी साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
अन्य संबंधित तथ्य
- CETA के अलावा कुछ अन्य प्रमुख सहयोग:
- भारत–यूके विज़न 2035 अपनाया गया है, जो आने वाले दशक में अर्थव्यवस्था, तकनीक, रक्षा, जलवायु, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रकों में सहयोग का मार्गदर्शन करेगा।
- रक्षा उत्पादों के सह-डिज़ाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप अपनाया गया।

व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) की मुख्य विशेषताएं
- व्यापक स्तर पर प्रशुल्क (टैरिफ) की समाप्ति और बाजार तक पहुंच
- प्रशुल्क समाप्ति: भारत के लगभग संपूर्ण व्यापार बास्केट को कवर करते हुए 99% से अधिक टैरिफ लाइनें समाप्त हो जाएंगी।
- इस बीच, भारत ने अपनी 89.5% टैरिफ लाइनें खोल दी हैं, जो यूके के 91% निर्यात को कवर करती हैं।
- संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: भारत ने दुग्ध उत्पाद, अनाज, मिलेट्स, सोना, आभूषण, लैब में बने हीरे जैसे संवेदनशील क्षेत्रकों को संरक्षित किया है।
- द्विपक्षीय रक्षोपाय प्रावधान: घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचाने की संभावना वाली अचानक आयात वृद्धि पर नियंत्रण के उपाय अपनाए गए हैं।
- प्रशुल्क समाप्ति: भारत के लगभग संपूर्ण व्यापार बास्केट को कवर करते हुए 99% से अधिक टैरिफ लाइनें समाप्त हो जाएंगी।
- सेवाएं
- बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुंच: भारतीय आईटी, वित्त, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को यूके में व्यापक अवसर दिए गए हैं।
- व्यापक प्रतिबद्धताएं: भारत ने यूके से सभी 12 प्रमुख सेवा क्षेत्रकों को कवर करने वाली व्यापक प्रतिबद्धताएं सुनिश्चित की हैं।
- परस्पर मान्यता और पेशेवर गतिशीलता
- पारस्परिक मान्यता समझौता (Mutual Recognition Agreement): दोनों देश एक वर्ष के भीतर नर्सिंग, लेखाशास्त्र (Accountancy), और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक योग्यताओं को मान्यता देंगे। इससे पेशेवरों का आवागमन आसान होगा और बाधाएं कम होंगी।
- पेशेवरों के लिए अस्थायी प्रवेश: यूके और भारत एक दूसरे के बिजनेस विज़िटर, किसी एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर होने वाले कंपनी के कर्मचारी, सेवा प्रदाता, स्वतंत्र पेशेवर और निवेशकों को 90 दिन से 3 साल तक रुकने की अनुमति देंगे, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
- डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC): यह भारतीय कामगारों और उनके नियोक्ताओं को यूनाइटेड किंगडम में तीन वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट प्रदान करता है।
- उत्पत्ति के नियमों का सरलीकरण:
- निर्यातक उत्पाद की उत्पत्ति का स्व-प्रमाणन कर सकते हैं;
- £1,000 (एक हज़ार पाउंड) से कम के निर्यात के लिए किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी;
- उत्पाद-विशिष्ट उत्पत्ति के नियमों (PSRs) को वस्त्र, मशीनरी, दवाएं और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे क्षेत्रकों के लिए भारत की मौजूदा सप्लाई चेन के अनुरूप बनाया गया है आदि।
भारत के लिए CETA का महत्त्व
- निर्यात वृद्धि: वस्त्र, आभूषण, मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रकों में निर्यात में 20 से 40% तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।
- भौगोलिक संकेतक (GI) की सुरक्षा: भारत के GI उत्पाद जैसे फेणी, ताड़ी और नासिक वाइन को सुरक्षा मिलेगी।
- बाजार तक पहुंच: यह समझौता यूके के 37.5 बिलियन डॉलर के कृषि आयात बाजार को भारतीय उत्पादकों के लिए खोलता है। इसमें 95% से अधिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को शुल्क मुक्त (ड्यूटी-फ्री) पहुंच मिलेगी।
- कामगार लाभ: CETA कामगारों के अधिकारों की रक्षा करता है, जिसमें जागरूकता, निष्पक्ष अधिकरणों तक पहुंच और पारदर्शी कार्यान्वयन शामिल है।
- कार्यस्थल पर महिला कामगारों को भेदभाव-रहित परिवेश और लैंगिक समानता के प्रावधानों से लाभ मिलेगा।
- MSME और क्षेत्रीय विकास: व्यापार बढ़ने से प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को फायदा होगा जैसे तिरुप्पुर (कपड़ा), कोलकाता (चमड़ा), और सूरत–भरूच (रसायन)।
भारत–यूके संबंधों का महत्त्व
- आर्थिक सहयोग: भारत और यूके के बीच 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, और 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- निवेश: यूके भारत में छठा सबसे बड़ा आंतरिक निवेशक (Inward investor) है। सितंबर 2024 तक यूके ने भारत में कुल 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है।
- भू-राजनीतिक सहयोग: भारत और यूके संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), G-20, राष्ट्रमंडल (Commonwealth) और इंडो-पैसिफिक जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं।
- यूके, UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
- रक्षा सहयोग: भारत और यूके नियमित सैन्य अभ्यास करते हैं, जैसे कोंकण (नौसेना), कोबरा वॉरियर (वायु सेना) और अजेय वॉरियर (थल सेना)।
- भारतीय प्रवासी: यूके में भारतीयों की बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। 2021 की जनगणना के अनुसार वहां पर भारतीय मूल के 18.64 मिलियन लोग रहते हैं।
- शिक्षा सहयोग: यूके के कई विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोलने की योजना बना रहे हैं। जैसे- साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय का गुरुग्राम परिसर नई शिक्षा नीति के तहत पहला परिसर होगा।
- इस समय लगभग 1.7 लाख भारतीय छात्र यूके में पढ़ रहे हैं।
- स्वास्थ्य सहयोग: उदाहरण के तौर पर- यूके की कंपनी एस्ट्राजेनेका और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने लाइसेंसिंग समझौते के तहत कोविड-19 वैक्सीन का विकास और उत्पादन किया है।
- स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल पर सहयोग के लिए भारत-यूके फ्रेमवर्क समझौता नर्सों, संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों आदि की भर्ती और प्रशिक्षण का समर्थन करता है।
भारत–यूके संबंधों में चुनौतियां
- विदेश नीति में मतभेद: जैसे- रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दोनों देशों की स्थिति अलग-अलग है।
- यूके की आंतरिक राजनीति: यूके में कश्मीर और भारत के आंतरिक मामलों पर की गई राजनीतिक बहस एवं टिप्पणियां कभी-कभी तनाव पैदा करती हैं तथा प्रवासी भारतीयों के साथ रिश्तों को भी प्रभावित करती हैं।
- खालिस्तान अलगाववाद: यूके में खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों को लेकर भारत चिंतित है, क्योंकि उन्हें भारत अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है।
- प्रत्यर्पण संबंधी मुद्दे: प्रत्यर्पण संधि होने के बावजूद कानूनी देरी के कारण विजय माल्या जैसे हाई-प्रोफाइल भगोड़े यूके में ही रह रहे हैं। इससे, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विश्वास पर असर पड़ रहा है।
निष्कर्ष
भारत–यूके विज़न 2035 के तहत किया गया CETA समझौता द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा जैसे क्षेत्रकों में सहयोग और मजबूत होगा। यूके जहां P-5, G-7 और फाइव आइज़ जैसे शक्तिशाली समूहों का सदस्य है, वहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में दोनों देश एक रणनीतिक मोड़ पर खड़े हैं। यदि भारत और यूके बदलते वैश्विक परिदृश्य में मिलकर काम करें और विज़न 2035 के तहत साझा पहलों को आगे बढ़ाएं, तो वे अपनी साझेदारी को नए एवं ऐतिहासिक स्तर तक ले जा सकते हैं। साथ ही, लंबित चुनौतियों का समाधान भी निकाल सकते हैं।