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ब्लैक होल विलय (BLACK HOLE MERGER) | Current Affairs | Vision IAS
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ब्लैक होल विलय (BLACK HOLE MERGER)

Posted 19 Aug 2025

Updated 28 Aug 2025

1 min read

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, गुरुत्वाकर्षण तरंग या गुरुत्वीय तरंग (Gravitational wave) वेधशालाओं के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क ने दो बेहद विशाल ब्लैक होल्स के विलय का पता लगाया है। 

अन्य संबंधित तथ्य: 

  • इन दो ब्लैक होल्स के विलय से एक ऐसा ब्लैक होल बना है, जिसका आकार सूर्य के आकार की तुलना में 225 गुना अधिक है। ये दोनों ब्लैक होल्स आकर में सूर्य से क्रमशः 140 गुना और 100 बड़े हैं। 
    • यह घटना असल में कई अरब साल पहले घटी थी।
    • यह अब तक अवलोकन किए गए ब्लैक होल विलय की सबसे बड़ी घटना है। 
  • इस विलय का पता LVK वेधशाला नेटवर्क ने लगाया है। LVK नेटवर्क में संयुक्त राज्य अमेरिका में LIGO डिटेक्टर, इटली में VIRGO और जापान में KAGRA शामिल हैं। 
  • इस नवीनतम खोज को GW231123 नाम दिया गया है, जो इस गुरुत्वाकर्षण तरंग को दिया गया नाम है। 

ग्रेविटेशनल वेव डिटेक्शन नेटवर्क

  • लेज़र इंटरफेरोमीटर गुरुत्वाकर्षण-तरंग वेधशाला-LIGO: यह अमेरिकी राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (NSF) द्वारा पूर्णतः समर्थित, दुनिया की सबसे बड़ी गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला है।
    • वर्तमान में, इसके दो डिटेक्टर हैं: हैनफोर्ड, वाशिंगटन और लिविंगस्टन लुइसियाना।
    • LIGO-इंडिया को महाराष्ट्र के हिंगोली में विकसित किया जाना है, जिसे परमाणु ऊर्जा विभाग तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (भारत सरकार) द्वारा U.S. NSF और अन्य राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बनाया जाएगा। 
  • वर्गो (पीसा, इटली): यह इटली और फ्रांस के सहयोग से यूरोपीय गुरुत्वाकर्षण वेधशाला (EGO) द्वारा संचालित है। 
  • कागरा, जापान: यह कामिओका खदान के अंदर स्थित है।

इस घटना का महत्व:

  • खगोल-भौतिकी और कॉस्मोलॉजिकल मॉडल को बेहतर करना: इस खोज से ब्लैक होल के निर्माण, तारों के विकास और संभवतः ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी वर्तमान मॉडल्स के बारे में मौजूदा समझ को बेहतर करने में मदद मिल सकती है। 
    • यह गुरुत्वाकर्षण, खगोल-भौतिकी, ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology), कण भौतिकी या कॉस्मिक स्ट्रिंग्स के सिद्धांतों के लिए नए मार्ग खोलता है। 
  • ब्लैक होल के निर्माण की मौजूदा समझ को चुनौती: यह विलय अब तक की सभी पूर्व खोजों से अधिक द्रव्यमान वाला है, जिससे ब्लैक होल की चरम सीमाओं की हमारी समझ को नया रूप मिला है। 
    • इसके अलावा, ये ब्लैक होल न केवल अत्यधिक विशाल थे, बल्कि बेहद तेजी से घूम भी रहे थे। अतः ऐसे में इनसे आने वाले सिग्नल को समझना कठिन हो गया था। साथ ही, यह इन ब्लैक होल्स के निर्माण से जुड़े जटिल इतिहास का संकेत भी देता है।
  • हाइरार्किकल मर्जर्स के बारे में बेहतर जानकारी: एक प्रस्तावित  सिद्धांत यह है कि ऐसे विशाल इंटरमीडिएट-मास ब्लैक होल्स (जैसे, GW231123 में देखे गए) छोटे ब्लैक होल्स के विलयों की श्रृंखला के माध्यम से बन सकते हैं। 
    • इस तरह की "हाइरार्किकल" यानी बार-बार छोटे ब्लैक होल्स के विलय से बड़े ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया से ही शायद सुपरमैसिव ब्लैक होल्स बनाते हैं, जो किसी भी सर्पिल आकाशगंगा के केंद्र में होते हैं और उसके "इंजन" के रूप में काम करते हैं। 
  • गुरुत्वाकर्षण तरंगों को एक नए वैज्ञानिक साधन के रूप में उपयोग करना: गुरुत्वाकर्षण तरंगों का अध्ययन करना डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के अध्ययन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी विद्युतचुंबकीय तरंगों के साथ क्रिया नहीं करते हैं और इसलिए इन्हे पारंपरिक वैज्ञानिक तकनीकों से 'देखा नहीं' जा सकता होती हैं। 
    • गुरुत्वाकर्षण तरंगें स्पेस-टाइम में उत्पन्न होने वाली 'लहरें' (Ripples) हैं। ये ब्रह्मांड की कुछ सबसे प्रचंड और ऊर्जावान प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होती हैं। 
    • अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सिद्धांत 'द थ्योरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी' (1915) में इनके अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी। 

ब्लैक होल्स के बारे में:

  • ब्लैक होल अंतरिक्ष में एक ऐसा स्थान होता है जहां गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि यहां से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता है। यह गुरुत्वाकर्षण इतना प्रचंड इसलिए होता है क्योंकि सभी पदार्थ एक छोटे से स्थान में संपीडित हो जाते हैं। 
  • ब्लैक होल प्रकाश को उत्सर्जित या परावर्तित नहीं करते, जिससे इन्हे टेलिस्कोप की मदद से स्पष्ट रूप से नहीं देखा जा सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि ब्लैक होल के आस-पास के तारे और गैस पर यह शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण का किस तरह से प्रभाव डालता है। 
    • वैज्ञानिक तारे का अध्ययन कर यह जान सकते है क्या किसी ब्लैक होल के आसपास का कोई तारा ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसकी परिक्रमा कर रहा है। तारों की यह गति और उनकी दिशा में बदलाव वैज्ञानिकों को ब्लैक होल की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करते हैं। 
  • ब्लैक होल का निर्माण: ज्यादातर ब्लैक होल्स सुपरनोवा विस्फोट में नष्ट होने वाले एक बड़े तारे के अवशेषों से बनते हैं। 
    • विशेष रूप से, जब तारे बड़े होते हैं, तो उनका कोर संकुचित होकर ब्लैक होल में बदल जाता है। अन्यथा, कोर एक अत्यधिक सघन न्यूट्रॉन तारे में बदल जाता है। 
  • ब्लैक होल के प्रकार: स्टेलर ब्लैक होल, सुपरमैसिव ब्लैक होल, इंटरमीडिएट ब्लैक होल और प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल। 
  • Tags :
  • Black Hole Merger
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