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RBI ने जेपी-मॉर्गन समर्थित फिनटेक कंपनी इन-सॉल्यूशंस ग्लोबल (ISG) को पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में कार्य करने की मंजूरी दी।

पेमेंट एग्रीगेटर (PA) के बारे में:

  • ये थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स होते हैं। ये ग्राहकों द्वारा ऑनलाइन भुगतान तथा व्यवसायियों और ई-कॉमर्स द्वारा भुगतान स्वीकार करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • पेमेंट एग्रीगेटर्स, कंपनी अधिनियम, 1956/ 2013 के तहत भारत में पंजीकृत कंपनियां होती हैं।
  • ये वास्तव में भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाते हैं। इसके लिए वे जानकारी एकत्र करते हैं, पेमेंट प्रोसेस करते हैं और रिफंड मैनेज करते हैं। साथ ही, धोखाधड़ी का पता लगाते हैं और उसकी रोकथाम करते हैं।
  • वे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेटबैंकिंग, UPI, ई-वॉलेट आदि के माध्यम से भुगतान की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को भुगतान व निपटान तंत्र अधिनियम, 2007 के तहत RBI से मंजूरी की आवश्यकता होती है। 
    • बैंक-पेमेंट एग्रीगेटर्स को मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है। 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिटेल निवेशकों को स्टॉक ब्रोकर के जरिए एल्गोरिदम ट्रेडिंग में भाग लेने की अनुमति देने के लिए एक फ्रेमवर्क का प्रस्ताव किया है।

एल्गोरिदम ट्रेडिंग (स्वचालित ट्रेडिंग) के बारे में:

  • इसमें ट्रेडिंग के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग किया जाता है। 
    • दरअसल इसमें पूर्व-निर्धारित निर्देशों का एक सेट या एल्गोरिदम कंप्यूटर प्रोग्राम में डाला जाता है। इस प्रोग्राम या इनपुट की शर्तें पूरी होने पर स्वतः स्टॉक की खरीद-बिक्री हो जाती है।

प्रस्तावित विनियामक फ्रेमवर्क के मुख्य प्रावधान:

  • स्टॉक ब्रोकर की भूमिका: वह सख्त नियमों के तहत एल्गो ट्रेडिंग सेवाएं प्रदान करेगा। इसके लिए दो स्तरों पर सत्यापन और यूनिक वेंडर-कीज़ (keys) की जरूरत पड़ेगी।
  • API का उपयोग: अपने स्वयं के एल्गोरिदम विकसित करने वाले रिटेल निवेशकों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, इसका उपयोग केवल उसके परिवार के सदस्य ही कर सकते हैं।
  • एल्गो सेवा प्रदान करने वालों की सूची तैयार करना: इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज पात्रता तय करेंगे और पैनल में शामिल एल्गो सेवा देने वालों पर निगरानी रखेंगे।
  • स्टॉक एक्सचेंज की जिम्मेदारियां: एल्गोरिदम को "व्हाइट-बॉक्स" (पारदर्शी लॉजिक) या "ब्लैक-बॉक्स" (अपारदर्शी लॉजिक) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

हाल ही में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशक के फंड की सुरक्षा के लिए रिस्ट्रिक्टेड रिटर्न इनविट (InvIT) फ्रेमवर्क का प्रस्ताव किया है। 

रिस्ट्रिक्टेड रिटर्न InvIT के बारे में 

  • यह पारंपरिक InvIT से अलग है। पारंपरिक InvIT में रिटर्न अंडरलाइंग इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स की कीमतों में कमी व वृद्धि से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ होता है। 
    • वहीं रिस्ट्रिक्टेड रिटर्न InvIT मॉडल में, रिटर्न की ऊपरी सीमा और फ्लोर प्राइस तय करके डाउनसाइड जोखिम को सीमित किया गया है। इसका अर्थ है कि जोखिम को सीमित करके निवेशित फंड को सुरक्षा प्रदान की गई है।  
  • डाउनसाइड प्रोटेक्शन: यदि इनविट का रिटर्न न्यूनतम गारंटी से कम हो जाता है, तो स्पोंसर्स को फंड उपलब्ध कराना होगा ताकि यूनिट-धारकों को बेसलाइन यानी न्यूनतम रिटर्न मिल सके।
  • रिटर्न की ऊपरी सीमा: यदि इनविट का रिटर्न एक सीमा से अधिक हो जाता है, तो उससे ऊपर की अतिरिक्त राशि स्पोंसर को मिलेगी।

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने नए डार्क ईगल एंटी-मिसाइल सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 

डार्क ईगल एंटी-मिसाइल सिस्टम के बारे में: 

  • यह लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन (LRHW) है। 
  • इसे अमेरिकी थल सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। 
  • इसमें ग्लाइडिंग हाइपरसोनिक वारहेड (C-HGB) से लैस दो-चरणीय बैलिस्टिक मिसाइल है। यह मैक-17 तक की गति से उड़ान भरने में सक्षम है। 
    • मैक ध्वनि की गति से जुड़ा हुआ है। मैक-5 और उससे अधिक की गति को हाइपरसोनिक माना जाता है।
  • इसे रूस के S-300V4, S-400 और S-500 वायु सुरक्षा प्रणालियों की क्षमताओं को चुनौती देने और उनसे अधिक क्षमता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

अब तक अनुक्रमित सबसे पुराने होमो सेपियन्स DNA के विश्लेषण से लगभग 50,000 साल पहले होमो सेपियन्स और निएंडरथल के बीच इंटर-ब्रीडिंग का पता चलता है।

  • निएंडरथल के कुछ जीन मनुष्यों में अधिक दिखाई देते हैं। यह प्रवृत्ति मानव के जीवित रहने में इन जींस के महत्त्व का सुझाव देती है। जैसे- कुछ लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ अधिक प्रतिरक्षा, त्वचा का रंग बदलना आदि।
  • आज अधिकतर लोगों में निएंडरथल से विरासत में मिले जीन हैं। यह जीन उनके डीएनए का लगभग 1-2% है।

निएंडरथल (होमो निएंडरथेलेंसिस) के बारे में

  • वे होमो सेपियन्स के निकट-संबंधी मानव प्रजाति थे। वे विलुप्त हो चुके हैं। वे कुछ अवधि के लिए आधुनिक मानव के पूर्वजों के समकालीन थे।
  • वे लगभग 400,000 से 39,000 साल पहले यूरोप और दक्षिण-पश्चिम एवं मध्य एशिया में रहते थे।
  • शारीरिक विशेषताएं: बड़ी नाक, भारी दोहरी-धनुषाकार भौंह रिज, अपेक्षाकृत छोटा शरीर आदि।

मणिपुर का हेंगबंग गांव माइक्रो सोलर पंप्ड स्टोरेज सुविधा के जरिए 24/7 बिजली प्राप्त कर रहा है।

सोलर माइक्रो हाइड्रोपावर के बारे में

  • इसमें उच्च सौर विकिरण के दौरान निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक जल पंप करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
  • जब कभी सौर ऊर्जा अनुपलब्ध (रात के समय) हो तो इस संग्रहीत जल को माइक्रो-हाइड्रो टरबाइन के माध्यम से छोड़ा जा सकता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है।
  • मुख्य लाभ: ग्रिड स्थिरता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, आदि।

हाल ही में, नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर जेजेरो क्रेटर रिम के शीर्ष पर चढ़कर उपलब्धि हासिल की है।

  • अब यह रोवर उन चट्टानों (प्रारंभिक क्रस्ट के खंड) तक पहुंच पाएगा, जो क्षुद्रग्रहों के मंगल की सतह से टकराने से बहुत पहले अपने वर्तमान वाले स्वरूप में थीं।

मार्स 2020 पर्सीवरेंस रोवर के बारे में:

  • उद्देश्य: मंगल ग्रह पर आरंभिक जीवन की उत्पत्ति का पता लगाना तथा पृथ्वी पर अपनी संभावित वापसी के लिए चट्टान व रेगोलिथ (खंडित चट्टान और मृदा) के नमूने एकत्र करना।
  • ऊर्जा का स्रोत: इसमें एक रेडियोआइसोटोप पावर सिस्टम (RPS) लगा हुआ है। यह सिस्टम प्लूटोनियम-238 के रेडियोधर्मी क्षय की ऊष्मा का ईंधन के रूप में उपयोग करता है। इस प्रकार, एक भरोसेमंद विद्युत प्रवाह उत्पन्न करता है। 
  • लक्ष्य: मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर अन्वेषण करना । 
  • पर्सीवरेंस रोवर पर उपकरण (इन्फोग्राफिक देखें)
Instruments of Perseverance Rover

US EPA ने ट्राइक्लोरोएथिलीन और पर्क्लोरोएथिलीन के निर्माण, प्रसंस्करण एवं उपयोग पर अंतिम प्रतिबंध की घोषणा की।

ट्राइक्लोरोएथिलीन और पर्क्लोरोएथिलीन के बारे में:

  • ये दोनों स्टेन रिमूवर, डिग्रीजर (ग्रीज़ हटाने वाला यौगिक) और ड्राई क्लीनिंग सहित कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग किए जाने वाले विषाक्त रसायन हैं। 
    • ये दोनों महत्वपूर्ण औद्योगिक उपयोगिता वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) हैं, परन्तु इनके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के कारण चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: ये किडनी के कैंसर, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा, हृदय संबंधी दोष और मूत्राशय कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। 
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