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विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में, भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 के डिसएंगेजमेंट सीमा समझौते के कार्यान्वयन की पुष्टि की। 

  • समझौते में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और सीमा-पार नदियों एवं सीमा-पार व्यापार पर डेटा साझा करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की बात कही गई है। 

कैलाश मानसरोवर के बारे में

  • यह एक पवित्र तीर्थस्थल है, जिसमें कैलाश पर्वत (कैलाश पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी) और तिब्बत में स्थित पवित्र मानसरोवर झील शामिल है।
    • मानसरोवर झील को दुनिया की सबसे ऊंची ताजे पानी की झील माना जाता है।
  • भारत के तीर्थयात्री कुमाऊं में लिपुलेख दर्रे से होकर कैलाश पर्वत तक पहुंच सकते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: इसे हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और तिब्बतियों के लिए भी पवित्र माना जाता है।

एक राष्ट्र एक चुनाव से संबंधित विधेयकों की समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया गया है।

  • इस समिति में लोक सभा के 21 सदस्य और राज्य सभा के 10 सदस्य शामिल होंगे।
  • इन विधेयकों में 129वां संविधान संशोधन विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 शामिल हैं।

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के बारे में

  • यह एक तदर्थ (अस्थाई) समिति होती है। इस समिति का गठन किसी विशिष्ट उद्देश्य और तय अवधि के लिए किया जाता है।
  • इसके गठन के लिए संसद के एक सदन में प्रस्ताव पारित किया जाता है और दूसरा सदन इस पर सहमति व्यक्त करता है।
  • इस समिति के सदस्यों के नाम और विषय भी संसद द्वारा तय किए जाते हैं।
  • संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं होती हैं।

हाल ही में NCMEI का 20वां स्थापना दिवस मनाया गया।

NCMEI के बारे में

  • उत्पत्ति: इसकी स्थापना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) अधिनियम, 2004 के तहत की गई है।
  • यह अर्ध-न्यायिक संस्था है। इसे सिविल कोर्ट के समान शक्तियां दी गई हैं।
  • इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत प्रदत्त अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करना है।
    • अनुच्छेद 30(1) भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।
  • NCMEI की शक्तियां:
    • यह अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे से संबंधित प्रश्नों पर निर्णय लेता है। वह ऐसे संस्थानों के दर्जे को रद्द भी कर सकता है।
    • यह संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे से संबंधित विवादों के लिए अपीलीय प्राधिकरण भी है।

हाल ही में, यूरोपीय संघ ने इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर रेजिलिएंस, इंटर कनेक्टिविटी एंड सिक्योरिटी बाय सैटेलाइट (IRIS²) परियोजना शुरू की है।

  • यह यूरोपीय संघ की तीसरी प्रमुख अंतरिक्ष अवसंरचना परियोजना है। अन्य दो परियोजनाएं हैं- गैलीलियो नेविगेशन सिस्टम और कोपरनिकस।
  • कोपरनिकस दुनिया का सबसे बड़ा पृथ्वी पर्यवेक्षण कार्यक्रम है। वहीं गैलीलियो दुनिया की सबसे सटीक असैन्य नेविगेशन प्रणाली है। 

IRIS² के बारे में

  • इसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य भागीदारों के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • उद्देश्य: उन क्षेत्रों में सुरक्षित कनेक्टिविटी और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड प्रदान करना, जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी कम है या बिल्कुल नहीं है।
  • यह सीमा की निगरानी, ​​विपदा प्रबंधन जैसी सरकारी कार्रवाइयों में सहायक है।
  • यह प्रणाली पृथ्वी से कम और मध्यम ऊंचाई वाली कक्षाओं में स्थापित 290 सैटेलाइट्स पर आधारित है।

 

एक ऐसी ही अन्य परियोजना एलन मस्क का स्टारलिंक प्रोजेक्ट है। यह परियोजना लगभग 7000 सैटेलाइट्स पर आधारित है। 

इंफ्रारेड रेडिएशन को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए एक नई रणनीति विकसित की गई है। इसमें हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड नामक रसायन की द्वि-आयामी नैनोशीट का उपयोग किया गया है। 

  • इसे विकिरणीय ताप अवरोधकतापीय छलावरण (Thermal camouflage) और ताप प्रबंधन में उपयोग किया जा सकता है।

इंफ्रारेड रेडिएशन (अवरक्त विकिरण) के बारे में

  • यह विद्युत चुम्बकीय विकिरण स्पेक्ट्रम का एक क्षेत्र है। इसमें वेवलेंथ (तरंग दैर्ध्य) लगभग 780 से 1000 नैनोमीटर तक होती है।
  • इसकी वेवलेंथ दृश्यमान वेवलेंथ और सूक्ष्म तरंगों की वेवलेंथ के बीच होती है।
  • सूर्य के विकिरण का लगभग 50% हिस्सा इंफ्रारेड रेडिएशन होता है।
  • इसे पृथ्वी के वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषित किया जाता है।
  • मुख्य उपयोग: थर्मल इमेजिंग में, खगोलीय अवलोकन में आदि।
    • इंफ्रारेड रेडिएशन के अत्यधिक प्रभाव में आने से फोटोकार्सिनोजेनेसिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (NIS) ने एक साथ 567 व्यक्तियों को वर्मम थेरेपी देकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

वर्मम थेरेपी के बारे में

  • यह चिकित्सा की सिद्ध प्रणाली के अंतर्गत एक अनूठी और पारंपरिक उपचार पद्धति है।
  • वर्मम सबसे प्राचीन दक्षिण भारतीय मार्शल आर्ट्स में से एक है, जो बाद में एक थेरेपी के रूप में विकसित हुई। यह बिना हथियार के युद्ध लड़ने की कला है। इसके अंतर्गत प्रतिद्वंदी की नसों, जोड़ों और अंगों पर चोट करने का प्रयास किया जाता है।
  • प्रक्रिया: थेरेपी में वर्मम बिंदुओं का चिकित्सीय हेरफेर किया जाता है, जिसे वर्म आदि (वर्मम हमला) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में प्राणशक्ति ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
  • यह थेरेपी उपचार का एक बहुत ही अनोखा, गैर-आक्रामक, लागत प्रभावी व गैर-औषधीय रूप है। 
  • लाभ: वर्मम थेरेपी को न्यूरोलॉजिकल और मस्कुलोस्केलेटल रोगों के उपचार के लिए प्रभावी माना जाता है।

नासा के शोधकर्ताओं ने अधिक डार्क कॉमेट्स यानी ओउमुआमुआ जैसे खगोलीय पिंडों की खोज की है। ओउमुआमुआ का अर्थ है- “दूर से एक दूत पहले आ रहा है।”

डार्क कॉमेट्स के बारे में

  • ये ऐसे खगोलीय पिंड होते हैं, जो देखने में क्षुद्रग्रहों जैसे लगते हैं, लेकिन वे धूमकेतुओं की तरह व्यवहार करते हैं। पदार्थ हेतु सतह क्षेत्र कम होने की वजह से इनकी पूंछ नहीं होती है। 
  • ये आमतौर पर अपनी कक्षाओं से विचलित हो जाते हैं। इस विचलन को यार्कोव्स्की इफेक्ट द्वारा नहीं समझाया जा सका है।
    • यार्कोव्स्की इफेक्ट एक ऐसी परिघटना है, जो खगोलीय पिंडों के मार्ग को ऊष्मा ऊर्जा के असममित विकिरण के कारण बदल देती है।
  • डार्क कॉमेट्स काफी तेजी से घूमते हैं और निकलने वाली गैस व धूल को सभी दिशाओं में फैला देते हैं, जिससे वे कम दिखाई देते हैं।
  • डार्क कॉमेट्स दीर्घ व अण्डाकार पथों पर गमन करते हैं। यह पथ उन्हें सौर मंडल के सबसे दूर तक पहुंचने से पहले सूर्य के नजदीक लाता है।

देश के सभी 17,130 पुलिस स्टेशन क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के माध्यम से जुड़ गए हैं।

CCTNS परियोजना के बारे में

  • यह केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक प्रमुख ई-गवर्नेंस कार्यक्रम है। इसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत शुरू किया गया है। 
  • इसे 2009 में 100% केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लॉन्च किया गया था।
  • इस परियोजना का उद्देश्य सभी स्तरों पर पुलिसिंग की दक्षता बढ़ाने तथा उसे और प्रभावी बनाने के लिए एक व्यापक व एकीकृत प्रणाली का निर्माण करना है। 
  • कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)।
  • यह इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) का एक प्रमुख स्तंभ (पिलर) है। ICJS का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के मुख्य स्तंभों को एकीकृत करना है।
    • ICJS के अन्य स्तंभ हैं- न्यायालय (ई-कोर्ट), जेल (ई-प्रिजन), फोरेंसिक लैब (ई-फोरेंसिक) और अभियोजन (ई-प्रॉसीक्यूशन)।
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