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रूस ने केर्च जलडमरूमध्य में तेल रिसाव से निपटने के लिए एक आपातकालीन टास्क फोर्स का गठन किया।

केर्च जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के बारे में

Map showing Kerch Strait
  • अवस्थिति: यह अंतर्देशीय आज़ोव सागर को काला सागर से जोड़ता है।
    • यह रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप को क्रास्नोडार (Krasnodar) क्षेत्र से अलग करता है।
  • महत्व: यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक शिपिंग मार्ग है। 

दक्षिण-पश्चिमी जापान में 6.9 तीव्रता वाला शक्तिशाली भूकंप आया।

रिंग ऑफ़ फायर (परि-प्रशांत मेखला) के बारे में

  • यह महासागर के चारों ओर घोड़े की नाल के आकार में फैले हुए ज्वालामुखियों और भूकंप प्रवण स्थलों की एक श्रृंखला है।
  • इनका निर्माण प्लेट टेक्टोनिक्स के चलते हुआ है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यहाँ प्रशांत प्लेट, जुआन डी फूका, कोकोस, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट, नाज़का प्लेट, उत्तरी अमेरिकी और फिलीपीन प्लेटों सहित कई टेक्टोनिक प्लेटों का मिलन बिंदु मौजूद है।
  • प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेटों के बीच का ‘रिंग फायर क्षेत्र’ अपवाद स्वरूप ट्रांसफॉर्म फॉल्ट बाउंड्री है। जब दो टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के पास से खिसकती हैं, तो इसे ट्रांसफॉर्म फॉल्ट बाउंड्री कहा जाता है।  
    • ट्रांसफॉर्म फॉल्ट बाउंड्री पर भूपर्पटी में लगातार तनाव बनने और उसके रिलीज होने से बड़ी संख्या में भूकंप आते हैं।

प्रधान मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में गांदरबल के सोनमर्ग क्षेत्र में Z-मोड़ सुरंग का उद्घाटन किया।

Z-मोड़ सुरंग के बारे में

  • इस सुरंग के निर्माण की शुरुआत 2015 में BRO (सीमा सड़क संगठन) द्वारा की गई थी। बाद में, इसके निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड ने ले ली।
    • APCO इंफ्राटेक फर्म ने इस परियोजना को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।
  • यह सुरंग 8,650 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह दो-लेन वाली सड़क सुरंग है। इसमें आपात स्थिति के लिए 7.5 मीटर चौड़ा समानांतर बचाव मार्ग (Escape passage) भी बनाया गया है।
  • सोनमर्ग सुरंग परियोजना कुल 12 किलोमीटर की है। इसमें 6.4 किमी लंबी मुख्य सुरंग (Z-मोड़), एक निकास सुरंग और एप्रोच मार्ग शामिल हैं।
  • महत्व:
    • यह श्रीनगर और सोनमर्ग के बीच सभी मौसमों के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इससे श्रीनगर से आगे लेह तक सभी मौसमों में यात्रा की जा सकेगी।  
    • यह लद्दाख क्षेत्र तक सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करेगी।
    • इससे शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स के जरिए सोनमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के साधन भी बढ़ेंगे

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) और IIT मंडी ने TTDF योजना के तहत 'डायनेमिक स्पेक्ट्रम एक्सेस के लिए वाइडबैंड स्पेक्ट्रम सेंसर हेतु सेमीकंडक्टर चिप का विकास' नामक एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

‘दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि’ योजना के बारे में

  • इसे 2022 में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) ने लॉन्च किया था। USOF, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के तहत एक संस्था है।  
  • इस निधि से भारतीय स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को वित्तपोषण प्रदान किया जाता है। इस तरह यह निधि दूरसंचार उत्पादों और सोल्यूशन्स के डिजाइन, विकास और व्यावसायीकरण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
  • इसका उद्देश्य वहनीय ब्रॉडबैंड और मोबाइल सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे पूरे भारत में डिजिटल डिवाइड को कम करने में मदद मिलेगी।

हाल ही में, DRDO ने बताया है कि ATGM-नाग Mk 2 के फील्ड इवेलुएशन ट्रायल्स राजस्थान के पोखरण फील्ड रेंज में सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।

ATGM-नाग Mk 2 के बारे में:

  • यह स्वदेशी रूप से विकसित तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) है।
  • इसमें ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ की एडवांस्ड तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे ऑपरेटर लॉन्च से पहले टारगेट को लॉक कर सकते हैं और जटिल युद्धक्षेत्र में भी सटीकता से हमला कर सकते हैं।
  • यह एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर्स से लैस आधुनिक बख्तरबंद वाहनों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • गाइडेंस सिस्टम: यह IIR (इमेजिंग इन्फ्रारेड) सीकर के माध्यम से पैसिव होमिंग में सक्षम है।
    • IIR सीकर एक ऐसा सिस्टम है जो इन्फ्रारेड का उपयोग करके टार्गेट्स का पता लगाता है और उन्हें ट्रैक करता है।
    • पैसिव होमिंग गाइडेंस एक ऐसी प्रणाली है जो टारगेट के इलेक्ट्रॉनिक उत्सर्जन का उपयोग करके मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाती है। पैसिव होमिंग प्रणालियाँ न तो ऊर्जा उत्सर्जित करती हैं न ही किसी बाहरी स्रोत से कमांड प्राप्त  करती है।
  • मारक क्षमता: 500 मीटर - 4000 मीटर
  • संचालन: दिन और रात, दोनों में।

हाल ही में, लॉस एंजिल्स के पास लगी वनाग्नि पर काबू पाने के लिए अधिकारियों ने पिंक फायर रिटार्डेंट (अग्निरोधी) का उपयोग किया।

पिंक फायर रिटार्डेंट (फॉस-चेक) के बारे में

  • फायर रिटार्डेंट वास्तव में रसायनों का मिश्रण होता है। इसका उपयोग आग को बुझाने या फैलने से रोकने के लिए किया जाता है।
  • पेरिमीटर सॉल्यूशंस कंपनी द्वारा विकसित इस फायर रिटार्डेंट का दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है।
    • फॉस-चेक में अधिकांशतया अमोनियम फॉस्फेट घोल होता है।
      • आमतौर पर, यह अमोनियम पॉलिफास्फेट जैसे लवणों से बना होता है। यह जल के समान ही आसानी से वाष्पित नहीं होता है और लंबे समय तक वातावरण में बना रहता है।
    • इसे गुलाबी रंग का बनाया जाता है ताकि आगजनी वाले स्थान पर अग्निशामकों को रसायन का छिड़काव अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
  • मुख्य चिंताएं: 
    • फायर रिटार्डेंट का छिड़काव विमानों से किया जाता है। इसलिए इसका उपयोग महंगा साबित होता है। साथ ही, यह अधिक कारगर भी नहीं होता है।
    • आसपास की नदियों और झरनों में प्रदूषण फैलने का खतरा रहता है।

केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) का पुनर्गठन किया है।

परमाणु ऊर्जा आयोग के बारे में

  • स्थापना: इसे सबसे पहले अगस्त 1948 में वैज्ञानिक अनुसंधान विभाग के अंतर्गत स्थापित किया गया था। बाद में इसे परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन कर दिया गया।
  • कार्य: 
    • भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्तार के लिए आवश्यक उपायों की योजना बनाना और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना;
    • परमाणु ऊर्जा विभाग के लिए नीतियां बनाना। 

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ (या पूर्ण कुंभ) का आयोजन किया जा रहा है।

कुंभ के बारे में

  • यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है।
  • यह एक प्रकार की तीर्थ-यात्रा है। यह 12 वर्षों के दौरान चार बार आयोजित होती है। 
  • भारत में कुंभ मेला का आयोजन निम्नलिखित चार तीर्थ स्थलों पर बारी-बारी से होता है:
    • हरिद्वार (उत्तराखंड) में गंगा नदी के तट पर।
    • उज्जैन (मध्य प्रदेश) में क्षिप्रा नदी के तट पर।
    • नासिक (महाराष्ट्र) में गोदावरी नदी के तट पर।
    • प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर। 
      • सरस्वती अदृश्य नदी है जिसका उल्लेख प्राचीन साहित्यों में मिलता है। 

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:

  • कुंभ मेले को 2017 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया।
  • चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सबसे पहले अपने यात्रा-वृतांत में कुंभ मेले का उल्लेख किया था।
    • ध्यातव्य है कि ह्वेनसांग 7वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत की यात्रा पर आया था।
  • आदि शंकराचार्य ने 9वीं शताब्दी में कुंभ मेले को इसका वर्तमान स्वरूप दिया था। 
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