चीन के एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकामक (EAST) ने संलयन अभिक्रिया में नया रिकॉर्ड बनाया | Current Affairs | Vision IAS
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ESC

EAST को चीन के कृत्रिम सूर्य के रूप में भी जाना जाता है। इसने 1000+ सेकंड के लिए स्टेडी-स्टेट हाई-कन्फाइनमेंट प्लाज्मा ऑपरेशन को बनाए रखा, जिसके बाद यह 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान तक पहुंच गया। 

  • टोकामक एक ऐसी मशीन है, जो संलयन की ऊर्जा का उपयोग करने के लिए चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके प्लाज्मा को डोनट के आकार में सीमित कर देती है।

नाभिकीय संलयन और विखंडन

  • नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है, जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक आपस में मिलकर एक भारी परमाणु नाभिक का निर्माण करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। 
  • नाभिकीय विखंडन एक भारी तत्व (उच्च परमाणु द्रव्यमान संख्या) को खंडों में विभाजित करता है। इससे अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
  • नाभिकीय विखंडन की तुलना में नाभिकीय संलयन से अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।

इस उपलब्धि का महत्त्व: 

  • यह संलयन आधारित परमाणु रिएक्टर्स की ओर एक कदम है। ये रिएक्टर्स पवन, सौर आदि स्वच्छ ऊर्जा के अन्य स्रोतों के विकल्प के रूप में कार्य कर सकते हैं।  
  • इससे विश्व ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान किया जा सकता है। 

नाभिकीय संलयन के लाभ 

  • उच्च ऊर्जा उत्पादन: यह किसी भी अन्य स्रोत की तुलना में अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न करता है। 
  • प्रचुर मात्रा में और किफायती ईंधन: इसमें सस्ती इनपुट सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जो लगभग असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए- ड्यूटेरियम, ट्रिटियम, हाइड्रोजन, लिथियम आदि।  
  • पर्यावरण के अनुकूल: इससे शून्य उत्सर्जन होता है और यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन या ग्लोबल वार्मिंग में योगदान नहीं देता है। 
  • सुरक्षित और स्वच्छ प्रक्रिया: संलयन रिएक्टर हीलियम नामक अक्रिय गैस का उत्पादन करते हैं। वे ट्रिटियम नामक रेडियोधर्मी पदार्थ का उत्पादन और पुनर्चक्रण भी करते हैं, जिसकी हाफ लाइफ छोटी होती है। नतीजतन, संलयन से लंबे समय तक रहने वाला रेडियोधर्मी परमाणु अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है। 

नाभिकीय संलयन में चुनौतियां

  • अत्यधिक तापमान की आवश्यकता: संलयन के लिए करोड़ों डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है, जो सूर्य के कोर से भी अधिक है। 
  • प्लाज्मा नियंत्रण: ऐसे उच्च तापमान पर, पदार्थ केवल प्लाज्मा अवस्था में ही मौजूद रहता है। ऊर्जा प्राप्ति के लिए प्लाज्मा को स्थिर रखना मुश्किल होता है। प्लाज्मा अवस्था में परमाणु धनात्मक और ऋणात्मक आवेशित कणों में विभाजित हो जाते हैं। 
  • मैग्नेटिक कन्फाइनमेंट: प्लाज्मा को रिएक्टर की दीवारों के संपर्क से बचाने के लिए मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके एक अलग स्थान में रखना होता है। 
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