सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने जनहित याचिका (PIL) के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की | Current Affairs | Vision IAS
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न्यायाधीश ने कहा कि PIL का दुरुपयोग सामाजिक न्याय के लिए एक साधन के रूप में इसकी प्रभावकारिता को कम कर रहा है।

जनहित याचिका (PIL) के बारे में

  • परिभाषा: जनहित याचिका सामान्यतः किसी तीसरे पक्ष से जुड़े मामलों के लिए दायर की जाती है। दूसरे शब्दों में यदि किसी व्यक्ति/ संस्था को लगता है कि सरकार, उद्योग आदि की किसी कार्रवाई/ गतिविधि या अन्य किसी कारण से पर्यावरण, लोक हित आदि को नुकसान पहुंच रहा है, तो वह सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट्स में जनहित याचिका दायर कर सकता/ सकती है, भले ही उस व्यक्ति/ संस्था को संबंधित कार्रवाई/ गतिविधि से कोई नुकसान हुआ हो या न हुआ हो।   
  • मुख्य विशेषताएं
    • इसे सामाजिक जनहित याचिका जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह विचार अमेरिकी न्यायशास्त्र से उधार लिया गया है।
    • PIL को किसी भी कानून/ अधिनियम के द्वारा परिभाषित नहीं किया गया है। यह न्यायिक सक्रियता के माध्यम से अदालतों द्वारा जनता को दी गई शक्ति है।
    • सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत PIL याचिकाओं को स्वीकार किया जाता है, जबकि हाई कोर्ट्स अनुच्छेद 226 के तहत PIL याचिकाओं को स्वीकार करते हैं।
  • उत्पत्ति:
    • 'मुंबई कामगार सभा बनाम अब्दुलभाई फैजुल्लाभाई 1976' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार लोकस स्टैंडी के सिद्धांत का विस्तार किया था। इससे जनहित याचिका की उत्पत्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
      • लोकस स्टैंडी का अर्थ है, किसी अदालत में कानूनी कार्रवाई के लिए याचिका दायर करने या अदालत में पेश होने का अधिकार।
    • हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य मामले में देश की पहली जनहित याचिका दायर की गई थी। यह याचिका जेल की अमानवीय स्थिति के बारे में एक एक्टिविस्ट वकील द्वारा दायर की गई थी।
    • न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और वी. आर. कृष्णा अय्यर PILs को स्वीकार करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पहले न्यायाधीशों में से एक थे।
      • न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती को जनहित याचिका (PIL) को शुरू करवाने में उनके योगदान के कारण उन्हें भारत में PIL का जनक कहा जाता है।
  • सामाजिक न्याय का उपकरण: PIL के माध्यम से कोर्ट ने कुछ ऐतिहासिक निर्णय दिए, जैसे- ट्रिपल तलाक केस, महिलाओं को हाजी अली दरगाह में प्रवेश दिलाना, सहमति पर आधारित समलैंगिक संबंधों को वैध बनाया गया, आदि।
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