लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार क्लिनिकल ट्रायल्स में 73% भारतीय रोगियों पर CAR-T थेरेपी कारगर रही | Current Affairs | Vision IAS
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ये परिणाम इस थेरेपी के चरण-I और चरण-II ट्रायल्स से सामने आए हैं। इन ट्रायल्स में शोधकर्ताओं द्वारा इस थेरेपी के उपयोग के संबंध में सुरक्षा से जुड़े पहलू और प्रभावशीलता का आकलन किया गया है।

इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • कम लागत: इस उपचार की लागत वैश्विक स्तर पर उपलब्ध समान उपचारों की तुलना में 1/20 है।
  • साइड इफेक्ट्स एवं जोखिम: अध्ययन में सबसे आम दुष्प्रभावों या साइड इफेक्ट्स में 61% रोगियों में एनीमिया का होना, 65% में प्लेटलेट्स की कम संख्या, श्वेत रक्त कोशिकाओं की कम संख्या होना आदि शामिल हैं।

CAR (कैमेरिक एंटीजन रिसेप्टर) T-सेल थेरेपी के बारे में

  • यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं विशेष रूप से T-कोशिकाओं को शक्तिशाली कैंसर-विरोधी कोशिकाओं में परिवर्तित कर देती है, जिन्हें CAR-T कोशिकाएं कहा जाता है।
    • T-कोशिकाएं (सेल्स) विशेष कोशिकाएं होती हैं। ये श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार है। इनका प्राथमिक कार्य साइटोटोक्सिक होता है, अर्थात अन्य कोशिकाओं को नष्ट करना।
  • यह उपचार विशिष्ट प्रकार के रक्त कैंसर के लिए सृजित किया गया है। यह उन रोगियों को दिया जाता है जिनका कैंसर या तो फिर से उभर आया है या जिन पर प्रथम उपचार का कोई असर नहीं हुआ है।

CAR-T सेल थेरेपी के लाभ

  • कम समय में इलाज: कीमोथेरेपी या स्टेम सेल प्रत्यारोपण के विपरीत यह तेजी से ठीक होने में मदद करती है।
  • निरंतर लाभ देने वाली एक "लिविंग ड्रग’: CAR T-सेल्स शरीर में बनी रहती हैं, तथा कैंसर के दोबारा उभरने के खिलाफ दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती हैं।

CAR T-सेल थेरेपी से संबंधित चुनौतियां

  • साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम: इसके चलते प्रतिरक्षा कोशिकाओं की अत्यधिक सक्रियता से तेज बुखार, अंगों की विफलता आदि हो सकते हैं।
  • न्यूरोटॉक्सिसिटी: इससे भ्रम और दौरे से लेकर सेरेब्रल एडेमा व कोमा तक हो सकता है।
  • एंटीजन एस्केप: ट्यूमर CAR-T सेल्स द्वारा लक्षित एंटीजन को परिवर्तित करके प्रतिरोध विकसित कर सकते हैं, जिससे इलाज का असर कम हो सकता है।
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