नीति आयोग के एक सदस्य ने खाद्य-तेलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए जीएम फसलों को अपनाने का समर्थन किया | Current Affairs | Vision IAS
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जीएम फसल क्या है?

  • जीएम फसलें आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें होती हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जीएम फसलें ऐसे पादप होते हैं, जिनके डीएनए को वांछित गुण का समावेशन करने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके बदला गया होता है। 
    • उदाहरण के लिए- फसलों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उत्पादक बनाए रखने तथा कीट प्रतिरोधी बनाने के लिए उपर्युक्त तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
  • ट्रांसजेनिक्स, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों की एक पद्धति है। इसके तहत किसी फसल में किसी अन्य प्रजाति का एक या अधिक डीएनए अनुक्रम कृत्रिम रूप से प्रवेश कराया जाता है।
    • उदाहरण के लिए- बीटी कपास में एक बैक्टीरिया से प्राप्त जीन को प्रवेश कराया गया है।
  • भारत में जीएम फसलों की अनुमति  
    • भारत में, बीटी कपास एकमात्र जीएम फसल है जिसकी खेती की मंजूरी दी गई है।
    • वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने शाकनाशी-सहिष्णु जीएम सरसों ‘DMH-11’ को कुछ शर्तों के साथ परीक्षण की अनुमति दी थी।
      • हालांकि, इस मंजूरी को वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में जीएम फसलों पर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने का सुझाव दिया है।

खाद्य तेलों के उत्पादन के लिए जीएम फसलों को अपनाने की आवश्यकता क्यों है?

  • बढ़ती खपत, कम उत्पादन: भारत में प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत 19.7 किलोग्राम प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है। इस मांग की पूर्ति घरेलू उत्पादन से नहीं हो पा रही है।
    • बढ़ती जनसंख्या तथा शहरों में बढ़ती आबादी से भविष्य में खाद्य तेलों की मांग और बढ़ेगी।
  • आयात पर अधिक निर्भरता: भारत में खाद्य तेल की कुल मांग का 55–60% आयात से पूरा होता है। खाद्य तेल के लिए आयात पर अधिक निर्भरता से खाद्य सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
  • अल्पकालिक आत्मनिर्भरता: भारत ने 1990 के दशक की शुरुआत में पीली क्रांति (Yellow Revolution) के दौरान तिलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की थी। हालांकि, यह स्थिति अधिक समय तक नहीं बनी रही। 

उपाय

  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन (NMEO-Oilseeds) की कार्यनीतियों में जीनोम एडिटिंग को अपनाने का उल्लेख किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य 2030-31 तक देश में 25.45 मिलियन टन खाद्य तेल उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
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