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क्रिप्टोकरेंसी और तस्करी (CRYPTOCURRENCIES AND SMUGGLING)

28 Jan 2026
1 min

In Summary

  • डीआरआई की 'भारत में तस्करी रिपोर्ट 2024-25' में मादक पदार्थों और सोने की तस्करी में अवैध भुगतान के लिए स्टेबलकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला गया है।
  • यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जाता है क्योंकि ये विकेंद्रीकृत, छद्मनाम वाली और सीमाहीन प्रकृति की होती हैं, जिससे पारंपरिक हवाला नेटवर्क को दरकिनार कर दिया जाता है।
  • भारत के वित्त अधिनियम 2022 के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) पर 30% कर लगाया गया है, और वीडीए को 2023 में पीएमएलए 2002 के दायरे में लाया गया था; एफएटीएफ विश्व स्तर पर स्टेबलकॉइन्स पर एएमएल/सीएफटी मानकों को लागू करता है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

निदेशालय राजस्व खुफिया (DRI) की 'स्मगलिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2024-25' में अपराधों, विशेष रूप से ड्रग और सोने की तस्करी के अवैध भुगतान के लिए स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया है।

क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन्स के बारे में

  • क्रिप्टोकरेंसी: यह डिजिटल मुद्रा का एक रूप है, जो ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी पर आधारित है तथा एक विशिष्ट सॉफ्टवेयर कोड का उपयोग करती है। उदाहरण के लिए- बिटकॉइन, एथेरियम आदि।
    • ब्लॉकचेन एक ओपन-सोर्स डेटाबेस (सार्वजनिक बहीखाता) है जो एक विकेंद्रीकृत कंप्यूटर नेटवर्क/इंटरनेट पर वितरित होता है। यह पक्षकारों के बीच लेन-देन का एक स्थायी रिकॉर्ड रखता है।
    • ये गैर-फिएट होती हैं अर्थात इनका संचालन सरकार या केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है। इनका कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं होता है।
  • स्टेबलकॉइन्स: ये क्रिप्टोकरेंसी का एक प्रकार हैं, जिनका मूल्य स्थिर बनाए रखने के लिए किसी अन्य परिसंपत्ति, जैसे फिएट मुद्रा या स्वर्ण से जुड़ा होता है।

तस्करी में क्रिप्टोकरेंसी/स्टेबलकॉइन्स के उपयोग के कारण

  • विकेंद्रीकृत: यह अपनी विकेन्द्रीकृत, अनुमति-आधारित तथा सीमा-रहित प्रकृति के कारण ऐसा वातावरण प्रदान करती है, जिसे ट्रैक करना कठिन होता है। डार्क वेब बाजारों के माध्यम से संगठित अपराध सिंडिकेट द्वारा सीमा पार मादक पदार्थों की आपूर्ति और बिक्री में इसका उपयोग बढ़ रहा है।
    • उदाहरण के लिए- USDT जैसे स्टेबलकॉइन पारंपरिक हवाला नेटवर्क का स्थान लेते जा रहे हैं।
  • ऑफ-द-बुक भुगतान: क्रिप्टो वॉलेट, जो अक्सर गुमनाम होते हैं और VPN के माध्यम से सुलभ होते हैं। ये अंडर-इनवॉइस (कम मूल्य दिखाना) और गलत तरीके से घोषित आयात सहित अवैध ऑफ-द-बुक भुगतान की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे तस्कर सीमा शुल्क और करों से बचने में कामयाब हो जाते हैं।
  • गुप्त प्रकृति: बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी करने वालों को अपनी वास्तविक पहचान छिपाने की सुविधा देती हैं। इससे पहचान, निगरानी और कानून-प्रवर्तन की कार्रवाई में बाधा आती है।
  • विनियामक कमजोरियां और क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दे: ऐसी कई जटिलताएं हैं जिनके कारण कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अवैध लेन-देन की पहचान और प्रवाह का पता लगाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इनमें अलग-अलग विनियामक फ्रेमवर्क्स, उन्नत ब्लॉकचेन फॉरेंसिक तथा विश्लेषणात्मक उपकरणों की आवश्यकता और विभिन्न देशों के क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलताएं शामिल हैं।

क्रिप्टोकरेंसी का विनियमन

  • भारत
    • वित्त अधिनियम, 2022: सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के अंतरण के लिए एक व्यापक कराधान व्यवस्था लागू की है। इसमें VDAs से होने वाले पूंजीगत लाभ पर 30% कर लगाया गया है।
      • आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, VDA से अभिप्राय किसी भी ऐसी सूचना, कोड, संख्या या टोकन से है, जो क्रिप्टोग्राफिक माध्यम से या अन्य किसी तरीके से उत्पन्न हुआ हो तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप से अंतरण, भंडारण या व्यापार के लिए प्रयुक्त होता हो। उदाहरण के लिए-क्रिप्टोकरेंसी, नॉन-फंजिबल टोकन (NFT), आदि।
    • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002: वर्ष 2023 में, VDAs को इसके अधीन लाया गया।
  • वैश्विक स्तर पर: अवैध वित्तपोषण से निपटने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF), स्टेबलकॉइन्स पर मनी लॉन्ड्रिंग रोधी (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (CFT) के अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करता है।

आगे की राह

  • मजबूत नियामक ढांचा: उदाहरण के लिए, 1 लाख रुपये से अधिक के सभी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) लेन-देन के लिए धन के स्रोत का सत्यापन अनिवार्य किया जाए। साथ ही, PAN/आधार से संबद्ध एक अधिकृत क्रिप्टो लेन-देन रजिस्ट्री स्थापित की जानी चाहिए।
  • उन्नत धन शोधन-रोधी (AML) अनुपालन: मादक पदार्थ एवं सोना तस्करी से प्राप्त अवैध आय का पता लगाने हेतु VDAs को पूर्णतः मौजूदा AML फ्रेमवर्क्स में एकीकृत किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: PMLA के प्रवर्तन को सुदृढ़ करने के लिए सभी VDA प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य KYC तथा रियल-टाइम लेन-देन रिपोर्टिंग लागू की जा सकती है। 
  • उन्नत फोरेंसिक उपकरण: DRI तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भीतर समर्पित ब्लॉकचेन फॉरेंसिक इकाइयों की स्थापना की जानी चाहिए, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित विश्लेषणात्मक उपकरणों से सुसज्जित हों। इससे संदिग्ध वॉलेट गतिविधियों, VPN-सक्षम लेन-देन तथा सीमापार क्रिप्टो प्रवाह की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
  • वैश्विक सहयोग: अंतरराष्ट्रीय अपराध संगठनों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए प्रमुख क्रिप्टो हब देशों के साथ द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय समझौतों पर वार्ता की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

तस्करी में क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन के बढ़ते उपयोग से स्पष्ट होता है कि संगठित अपराध नेटवर्क द्वारा डिजिटल गोपनीयता और विनियामक कमजोरियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। अवैध क्रिप्टो-आधारित व्यापार पर नियंत्रण पाने तथा वित्तीय प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए AML फ्रेमवर्क्स को सुदृढ़ करना, ब्लॉकचेन फॉरेंसिक क्षमताओं को उन्नत बनाना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त करना अत्यंत आवश्यक है।

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