हाल ही में, एक भारतीय फर्म एयरोस्पेस-ग्रेड टाइटेनियम मिश्र धातु के उत्पादन के लिए वैक्यूम आर्क रीमेल्टिंग (VAR) फर्नेस शुरू करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बन गई।
- वैक्यूम आर्क रीमेल्टिंग का उपयोग स्टेनलेस स्टील, निकेल और टाइटेनियम-आधारित मिश्र धातु जैसी कई मिश्र धातुओं को वैक्यूम स्थितियों में शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इससे संबंधित धातु की संरचना में उत्कृष्टता और मिश्र धातु का समान संघटन सुनिश्चित होता है।
टाइटेनियम के बारे में
- प्रकृति: कठोर, चमकदार और मजबूत धातु।
- टाइटेनियम के दो मुख्य खनिज अयस्क हैं- इल्मेनाइट (FeO.TiO2) और रूटाइल (TiO2)
- गुण: हल्का वजन, कम घनत्व, संक्षारण रोधी (Corrosion resistance), उच्च गलनांक, आदि।
- उपयोग: मेडिकल इम्प्लांट में; पावर प्लांट कंडेनसर (समुद्री जल में संक्षारण रोधी हेतु) में; विमान के निर्माण में (एल्यूमीनियम सहित अन्य धातुओं के साथ मिश्र धातु बनाने में), आदि।
हाल ही में, तम्बाकू बोर्ड ने अपना स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर बोर्ड ने बताया कि फ्लू-क्योर वर्जीनिया (FCV) तम्बाकू उत्पादक किसानों की आय 2019-20 और 2023-24 के बीच दोगुनी से अधिक हो गई।
- FCV तम्बाकू उच्च गुणवत्ता वाली और सुगंधित तम्बाकू किस्म है। इसका सिगरेट के उत्पादन में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- वर्तमान में भारत, दुनिया में तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। तंबाकू का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है।
- FCV तम्बाकू के उत्पादन के मामले में भारत, विश्व में चौथे स्थान पर है।
तम्बाकू बोर्ड के बारे में
- इसका मुख्यालय आंध्र प्रदेश में स्थित है।
- स्थापना: इसकी स्थापना संसद के ‘तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975’ के तहत 1 जनवरी, 1976 को हुई थी।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य तम्बाकू उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह FCV तम्बाकू के उत्पादन, वितरण और निर्यात का विनियमन भी करता है।
- मंत्रालय: यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के तहत कार्य करता है।
Article Sources
1 source- NMCG की कार्यकारी समिति ने गंगा नदी के कायाकल्प और स्वच्छता के प्रयासों को मजबूत करने के लिए कई मुख्य पहलें शुरू की हैं, जैसे- चंदौली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना।
NMCG के बारे में
- वर्ष 2011 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है।
- जल शक्ति मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
- राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता है।
- NGRBA की स्थापना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत की गई थी। 2016 में इसके स्थान पर प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन किया गया था।
- इसका उद्देश्य नदी बेसिन दृष्टिकोण को अपनाकर गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से खत्म करना तथा उसका संरक्षण और कायाकल्प सुनिश्चित करना है।
- इसमें दो स्तरीय प्रबंधन संरचना शामिल है- गवर्निंग काउंसिल और कार्यकारी समिति। दोनों की अध्यक्षता NMCG का महानिदेशक करता है।
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1 sourceभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर, 2024 में वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट जारी की।
- इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बैंकों का सकल NPA अनुपात कम होकर 2.6% हो गया है। यह अनुपात पिछले 12 वर्षों में सबसे कम है।
NPA के बारे में
- NPAs बैंकों के डिफॉल्ट या बकाया ऋण या अग्रिम होते हैं। वास्तव में NPAs बैंकों के ऐसे ऋण या अग्रिम होते हैं जिनसे उन्हें कोई आय प्राप्त नहीं हो रही होती है।
- जब मूलधन या ब्याज का भुगतान नियत समय पर नहीं किया जाता है या भुगतान में चूक होती है तब वह ऋण बकाया (Arrears) कहलाता है। वहीं जब ब्याज या मूलधन की किस्त, या दोनों, 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहती है तो वह NPA बन जाती है।
- GNPA उन सभी ऋण परिसंपत्तियों का योग है जिन्हें NPA के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
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1 sourceकृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में केले के निर्यात में दस गुना वृद्धि दर्ज की है।
- APEDA के अनुसार, अगले 5 वर्षों में 1 बिलियन डॉलर मूल्य के केले के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।
केले की खेती के बारे में
- आदर्श जलवायु: यह एक उष्णकटिबंधीय फसल है। इसकी खेती के लिए 15ºC से 35ºC के बीच तापमान और 75-85% की सापेक्ष आर्द्रता की आवश्यकता होती है।
- आदर्श मृदा: अधिक गहरी और उपजाऊ दोमट मृदा, जिसका pH मान 6.5 - 7.5 के बीच हो।
- इसकी खेती के लिए मृदा में अच्छी जल निकासी, पर्याप्त उर्वरता और नमी होनी चाहिए। मृदा न तो बहुत अम्लीय और न ही अत्यधिक क्षारीय होनी चाहिए।
- केले की प्रमुख किस्में: ड्वार्फ कैवेंडिश, रोबस्टा, मोनथन, पूवन, नेंद्रन, आदि।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि।
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1 source- यू.एस. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने नोरोवायरस मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि की सूचना दी है।
नोरोवायरस के बारे में
- यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो जठरांत्र शोथ (Gastroenteritis) का कारण बनता है। इसे आमतौर पर "पेट के फ्लू (stomach flu)" के रूप में जाना जाता है।
- लक्षणों में मतली, उल्टी, दस्त आदि शामिल हैं।
- नोरोवायरस, सामान्यतः सभी प्रकार की पर्यावरणीय दशाओं के प्रति अपेक्षाकृत प्रतिरोधी होते हैं, क्योंकि वे शून्य से नीचे के तापमान के साथ-साथ उच्च तापमान (60 डिग्री सेल्सियस तक) में भी जीवित रह सकते हैं।
- यह वायरस मुख्य रूप से ओरल-फेकल रूट से फैलता है, या दूषित भोजन या पानी के सेवन से, या सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।
- नोरोवायरस के इलाज के लिए अभी तक कोई विशिष्ट दवा विकसित नहीं हुई है।
- वैज्ञानिक उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो (घोस्ट पार्टिकल) का पता लगाने के लिए भूमध्य सागर के नीचे दो टेलीस्कॉप्स को स्थापित कर रहे हैं। ये दोनों टेलीस्कॉप्स क्यूबिक किलोमीटर न्यूट्रिनो टेलीस्कोप (KM3NeT) का हिस्सा हैं।
- KM3NeT एक डीप-सी रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जिसका निर्माण भूमध्य सागर में किया जा रहा। इसमें अगली पीढ़ी के न्यूट्रिनो टेलीस्कॉप्स की स्थापना की जाएगी।
- ये टेलीस्कॉप्स अंटार्कटिका की जमी हुई बर्फ में स्थित आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला के समान ही हैं।
- KM3NeT एक डीप-सी रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जिसका निर्माण भूमध्य सागर में किया जा रहा। इसमें अगली पीढ़ी के न्यूट्रिनो टेलीस्कॉप्स की स्थापना की जाएगी।
न्यूट्रिनो के बारे में
- ये छोटे कण बिल्कुल इलेक्ट्रॉन के समान होते हैं, लेकिन इनमें कोई विद्युत आवेश नहीं होता है।
- ये ब्रह्मांड में मूलभूत उप-परमाण्विक कणों (Subatomic particles) में से एक हैं और काफी संख्या में मौजूद हैं।
महत्त्व: उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो का अध्ययन करने से खगोल भौतिकी संबंधी जांच में मदद मिलती है, जैसे मिल्की वे आकाशगंगा, कॉस्मिक किरणें, डार्क मैटर आदि के बारे में नवीन जानकारी।