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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों NBFCs)’ को नए लाइन ऑफ क्रेडिट देने और पुराने ऋण को चुकाने का समय बढ़ाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) के बारे में

  • लाइन ऑफ क्रेडिट एक प्रकार की फ्लेक्सिबल ऋण सुविधा है। यह ऋण अक्सर स्व-नियोजित व्यक्तियों और लघु व्यवसायों को कार्यशील पूंजी के रूप में प्रदान किया जाता है।
  • ऐसे ऋण की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं:
    • स्वीकृत सीमा तक बार-बार धन निकाला जा सकता है। 
    • उपयोग नहीं की गई धनराशि को ऋण खाते में वापस जमा किया जा सकता है। 
    • प्रारंभिक चरण में केवल ब्याज भुगतान की अनुमति होती है, जबकि मूलधन का भुगतान बाद में किया जाता है।

वॉलेस लाइन महाद्वीपों के बीच प्रजातियों के अंतर को समझाने वाली एक महत्वपूर्ण जैव-भौगोलिक सीमा है।

वॉलेस लाइन क्या है?

  • यह एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई जीवों को अलग करने वाली अदृश्य जैव-भौगोलिक सीमा है। इसे 19वीं शताब्दी में अल्फ्रेड वॉलेस ने प्रस्तावित किया था। 
    • यह कम दूरी पर प्रजातियों की विशेषताओं में व्यापक बदलाव को दर्शाती है।
  • भौगोलिक स्थिति (दक्षिण-पूर्व एशिया): यह रेखा बाली और लोम्बोक के बीच से गुजरती है। यह बोर्नियो व सुलावेसी के बीच से होती हुई उत्तर की ओर बढ़ती है और फिर मिंडानाओ (फिलीपींस) के दक्षिण में मुड़ जाती है।
  • लाइन के दोनों ओर प्रजातियों के अलग-अलग तरीके से विकास के कारण:
  • ऑस्ट्रेलियाई और एशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव एवं परस्पर प्रभाव ने ज्वालामुखीय द्वीपों (जैसे बाली, लोम्बोक, सुलावेसी आदि) का निर्माण किया है।

ये द्वीप अलग-थलग प्राकृतिक पर्यावासों के रूप में कार्य करते हैं, जिससे प्रजातियों का स्वतंत्र रूप से विकास हुआ है और उनका पारस्परिक विलय नहीं हो सका है।

एक हालिया अध्ययन से इस तथ्य के बारे में नई जानकारी मिली है कि एनीमोनफिश किस तरह आहार उपलब्ध कराकर अपने होस्ट की मदद करती है।

एनीमोनफिश के बारे में

  • एनीमोनफिश उत्तम तैराक नहीं होती हैं। ये एनीमोन प्रजाति के साथ सहजीवी संबंध (Symbiotic relationship) बनाती हैं।
    • एनीमोन डंक मारने वाले पॉलीप्स हैं। ये कोरल और जेलीफिश के बहुत करीबी संबंध वाले होते हैं।
  • एनीमोनफिश, सी-एनीमोन में आश्रय लेती हैं। सी-एनीमोन अपने डंक मारने वाले तंतुओं से एनीमोनफिश को शिकारियों से बचाते हैं।
  • इसके बदले में, एनीमोनफिश अपने होस्ट सी-एनीमोन की मदद करती हैं। ये उन जीवों को दूर भगाती हैं, जो एनीमोन को नुकसान पहुंचा सकते हैं या उनके साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने नियोबियम डाइसेलेनाइड (NbSe2) में बोस मेटल के मौजूद होने के पुख्ता साक्ष्य पाए हैं। 

बोस मेटल के बारे में 

  • बोस मेटल एक प्रकार की असामान्य धात्विक अवस्था (Anomalous Metallic State - AMS) है।
  • इसमें कूपर युग्म (Cooper Pairs) बनते हैं, लेकिन वे सुपरकंडक्टर की तरह संघनित (Condensed) नहीं होते। 
  • यह ऐसी अवस्था में मौजूद रहता है, जहां चालकता (conductivity) न तो असीमित होती है (जैसे सुपरकंडक्टर में) और न ही शून्य (जैसे इन्सुलेटर में)।
    • कूपर युग्म सुपरकंडक्टर में युग्मित इलेक्ट्रॉन्स का समूह होते हैं, जो बोसॉन की तरह व्यवहार करते हैं। ये एक सामूहिक क्वांटम अवस्था में संघनित हो सकते हैं।
  • उपयोग: यह क्वांटम प्रोसेस के अध्ययन में उपयोगी है।

हाल ही में, लगभग 2.4 मिलियन शिशुओं को बचाने वाले एक ऑस्ट्रेलियाई रक्तदाता का निधन हो गया। 

  • इस दुर्लभ रक्तदाता के रक्त में एंटी-डी (Anti-D) एंटीबॉडी प्रचुर मात्रा में मौजूद थी, जिनसे 2.4 मिलियन एंटी-डी इंजेक्शन तैयार किए गए थे।
  • एंटी-डी इंजेक्शन उन माताओं के लिए जीवन रक्षक साबित होता है, जो Rh-नेगेटिव होती हैं। यह इंजेक्शन उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भ्रूण के Rh-पॉजिटिव रक्त कोशिकाओं पर हमला करने से रोकता है।

HDFN (हेमोलिटिक डिजीज ऑफ द फेटस एंड न्यूबॉर्न) क्या है?

  • यह एक प्रकार का रक्त विकार (Blood Disorder) है। इस बीमारी में भ्रूण में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती हैं जिसे हेमोलिसिस कहा जाता है।
  • कारण:
    • जब माता और बच्चे के रक्त समूह अलग-अलग हों।
    • यदि माता Rh-नेगेटिव है और भ्रूण Rh-पॉजिटिव है, तो माता की प्रतिरक्षा प्रणाली Rh एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी बना सकती है। यह गर्भनाल (प्लेसेंटा) के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचकर गंभीर एनीमिया का कारण बन सकती है।
      • रीसस (Rh) फैक्टर एक प्रकार का आनुवंशिक प्रोटीन होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है।
  • प्रभाव: गर्भपात (Miscarriage), मृत बच्चे का जन्म (Stillbirth), गंभीर एनीमिया और पीलिया (Jaundice) रोग, नवजात शिशु में प्राण-घातक बीमारियां होने का खतरा। 

युद्धग्रस्त सूडान से गम अरेबिक की तस्करी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रही है।

  • सूडान दुनिया का लगभग 80% गम अरेबिक उत्पादित करता है।

गम अरेबिक (बबूल गोंद) के बारे में

  • यह बबूल के वृक्षों से प्राप्त सूखा हुआ जल में घुलनशील पदार्थ होता है।
    • बबूल के पेड़ अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में उगते हैं - जिसे 'गम बेल्ट' के रूप में जाना जाता है। ये वृक्ष वेल्ड और सवाना के लैंडमार्क भी हैं।
  • संरचना: पॉलीसेकेराइड और इसके कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं पोटेशियम लवण, जो हाइड्रोलिसिस पर अरेबिनोज, गैलेक्टोज, रैम्नोज़ और ग्लुकुरोनिक एसिड उत्पन्न करते हैं।
  • उपयोग: खाद्य उद्योग; सौंदर्य प्रसाधनों में इमल्सीफायर, स्टेबलाइजर व थिकनर; पेंटिंग, शीतल पेय, फार्मास्यूटिकल्स आदि।
  • यह भोजन में एक आदर्श कार्यात्मक आहार फाइबर घटक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ‘2025-2026 उत्तरी गोलार्ध इन्फ्लूएंजा सीजन’ में उपयोग के लिए ट्राइवैलेंट इन्फ्लूएंजा वैक्सीन की सिफारिश की।

  • इन्फ्लूएंजा वैक्सीन्स में शामिल हैं- अंडे-आधारित (Egg-based) वैक्सीन, कोशिका संवर्धन आधारित या रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन वैक्सीन, न्यूक्लिक एसिड-आधारित वैक्सीन आदि। 

अंडे-आधारित टीकों के बारे में

  • इन वैक्सीन्स को मुर्गी के निषेचित अंडों में वायरस को विकसित करके बनाया जाता है।
    • इसके अंतर्गत अंडे से वायरस युक्त द्रव निकाला जाता है। फिर इस वायरस को मृत-वायरस वैक्सीन बनाने के लिए या तो निष्क्रिय कर दिया जाता है या लाइव अटैंयूएटेड वैक्सीन बनाने के लिए कमजोर कर दिया जाता है।
  • चुनौतियां: ‘ऐग अडेप्टेशन' का अर्थ है कि जब वैज्ञानिक वायरस को अंडों में विकसित करते हैं, तो वायरस को अंडे के रिसेप्टर्स के अनुसार स्वयं को ढालना (एडजस्ट करना) पड़ता है। इसके चलते कुछ आनुवंशिक परिवर्तन हो जाते हैं, जो वैक्सीन की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं।
  • अन्य वैक्सीन:
    • कोशिका संवर्धन आधारित वैक्सीन: वायरस के विकास के लिए सब्सट्रेट के रूप में स्तनधारी कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है।
    • रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन-आधारित वैक्सीन: इसमें जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग करके वायरस से विशिष्ट प्रोटीन (एंटीजन) का उत्पादन किया जाता है।
    • न्यूक्लिक एसिड-आधारित वैक्सीन: इसमें DNA या mRNA के जरिए शरीर की कोशिकाओं को आनुवंशिक निर्देश दिए जाते हैं, ताकि वे स्वयं वायरल प्रोटीन बना सके।

सौर मिशनों की संख्या में हाल ही में हुई वृद्धि की वजह सौर चक्र में सोलर मैक्सिमम की स्थिति है।

  • हालिया सौर मिशनों में शामिल हैं: 
    • इसरो का आदित्य L1,
    • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का प्रोब-3, और 
    • नासा का पंच/ PUNCH.  

सौर चक्र क्या है?

  • परिभाषा: इसके अंतर्गत लगभग हर 11 साल में, सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उलट जाता है। इसमें इसके चुंबकीय ध्रुव बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया को ही सौर चक्र कहा जाता है।
  • सौर चक्र के चरण
    • सोलर मैक्सिमम: इसे सूर्य का अध्ययन करने के लिए सबसे उपयुक्त अवधि माना जाता है। इस दौरान सूर्य की गतिविधि चरम पर होती है, और सबसे अधिक सौर कलंक दिखाई देते हैं। 
      • मुख्य घटनाएं: सौर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसे विस्फोट।
    • सोलर मिनिमम: यह सोलर मैक्सिमम के बाद आने वाला चरण है। इस दौरान सौर गतिविधि सबसे कम होती है और सबसे कम सौर कलंक दिखाई देते हैं।
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