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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

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ESC

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य पोलैंड, लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया रूस से सैन्य खतरे के कारण ओटावा कन्वेंशन से अलग होने की योजना बना रहे हैं।

ओटावा कन्वेंशन के बारे में

  • इस कन्वेंशन का आधिकारिक नाम ‘कन्वेंशन ऑन द प्रोहिबिशन ऑफ द यूज, स्टॉकपिलिंग, प्रोडक्शन एंड ट्रांसफर ऑफ एंटी-पर्सनल माइंस एंड ऑन देयर डिस्ट्रक्शन’ है। 
  • उद्देश्य: यह पक्षकार देशों को किसी भी परिस्थिति में एंटी-पर्सनल माइंस का उपयोग, विकास या भंडारण न करने हेतु बाध्य करता है।
    • इसके अलावा, उन्हें ऐसी माइंस को नष्ट करने के लिए भी बाध्य किया गया है।
  • इसे ओस्लो (1997) में अपनाया गया था। इसे 1997-1999 तक ओटावा में हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया था और यह 1999 में प्रभावी हुआ था।  
  • हस्ताक्षरकर्ता: 133 देश, भारत हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
  • डिपॉसिटरी: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव।

नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग का 10वां संस्करण आयोजित किया गया।

रायसीना डायलॉग के बारे में 

  • इसकी मेजबानी विदेश मंत्रालय के सहयोग से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (एक स्वतंत्र थिंक टैंक) करता है।
  • यह समकालीन भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र मुद्दों पर भारत के प्रमुख सम्मेलन के रूप में उभरा है। यह वैश्विक समुदाय के समक्ष विद्यमान सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
  • भागीदारी: 10वें संस्करण में लगभग 125 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इनमें मंत्री, राष्ट्राध्यक्ष व सरकार प्रमुख, शिक्षाविद्, थिंक टैंक, युवा आदि शामिल हैं।
  • थीम (2025): "कालचक्र - पीपल, पीस एंड प्लैनेट"।  
    • इसमें चर्चा छह प्रमुख विषयों पर केंद्रित रही, जैसे ग्रीन ट्राइलेमा, डिजिटल प्लैनेट आदि।

वित्त मंत्रालय ने कस्टम्स (व्यापार समझौतों के तहत उत्पत्ति के नियमों का प्रशासन) संधोशन नियम अधिसूचित किए। ये नियम 2020 के नियमों में संशोधन करते हैं। 

  • ये नियम सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अनुसार अधिसूचित किए गए हैं।

नये नियमों के बारे में

  • अब आयातक को व्यापार समझौते के तहत विशेष दर पर शुल्क के लिए ‘प्रूफ ऑफ ओरिजिन’ प्रस्तुत करना होगा, जबकि पहले ‘सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ प्रस्तुत करना होता था।
    • इसका उद्देश्य यह प्रमाणित करना है कि शिपमेंट में माल पूरी तरह से एक विशेष देश में प्राप्त, उत्पादित, निर्मित या प्रसंस्कृत किया गया है।
  • इन बदलावों के लाभ
    • अब भारतीय सीमा शुल्क अधिकारी सर्टिफिकेट की बजाये अतिरिक्त साक्ष्य मांग सकते हैं।
    • इससे विशेष रूप से चीन के उत्पादों के आयात की कड़ी जांच की जा सकेगी, जिन्हें उच्च शुल्क और व्यापार प्रतिबंधों से बचने के लिए आसियान, श्रीलंका, UAE जैसे देशों के माध्यम से भेजा जाता है।

पिछले चार वर्षों में भारत का तम्बाकू निर्यात दोगुना हो गया।

तंबाकू

  • भारत की स्थिति: भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (चीन के बाद) तथा दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक (ब्राजील के बाद) देश है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: गुजरात (कुल खेती योग्य क्षेत्र का 45% और उत्पादन 30%), आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और बिहार।
  • अनुकूल परिस्थितियां:
    • तापमान: 20° से 27°C के बीच होना चाहिए।
    • वर्षा: जब इसे वर्षा सिंचित फसल के रूप में उगाया जाता है, तो फसल उगाने के मौसम के दौरान कम-से-कम 500 मिलीमीटर अच्छी तरह से वितरित वर्षा की आवश्यकता होती है। 
      • जिस क्षेत्र में वर्षा 1200 मिमी. से अधिक होती है, वहां पर आमतौर इसकी खेती नहीं की जाती है।
    • मृदा: रेतीली या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। इसका एक अपवाद है- आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्र, जहां गहरी काली मृदा में तंबाकू का उत्पादन किया जाता है। इस क्षेत्र में सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू का उत्पादन किया जाता है। 

केंद्र और राज्य सरकारें ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए सहयोग पोर्टल के माध्यम से आदेश जारी कर रही हैं।

सहयोग पोर्टल के बारे में

  • मिशन: देश में साइबर अपराध की रोकथाम, पता लगाने, जांच करने और मुकदमा चलाने के लिए एक प्रभावी फ्रेमवर्क व संस्थागत व्यवस्था बनाना।
  • मंत्रालय: गृह मंत्रालय। 
  • इसे IT अधिनियम, 2000 के अंतर्गत सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा मध्यवर्तियों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • यह किसी गैर-कानूनी एवं दुर्भावनापूर्ण कार्य को करने के लिए उपयोग की जा रही किसी भी सूचना, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक को हटाने या निष्क्रिय करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • यह देश की सभी अधिकृत एजेंसियों और सभी मध्यवर्तियों को एक मंच पर लाता है।

स्वीडन के शोधकर्ताओं ने ‘अल्टरमैग्नेटिज्म’ नामक एक नए प्रकार के चुंबकत्व की सूचना दी। 

अल्टरमैग्नेटिज्म के बारे में

  • अर्थ: यह लौहचुम्बक (Ferromagnet) और गैर-लौहचुम्बक दोनों के लाभकारी गुणों को समेकित करता है। यह गुण इसे पारंपरिक लौहचुम्बक और गैर-लौहचुम्बक दोनों से अलग बनाता है।
    • पारंपरिक चुम्बक जैसे लोहा, निकल आदि पुश और पुल फाॅर्स (बल) प्रदान करने के लिए संरेखित स्पिन्स पर निर्भर करते हैं। वहीं, गैर-लौहचुम्बक इन बलों को काट देते हैं।
  • अल्टरमैग्नेट्स में जीरो नेट मैग्नेटाइजेशन (गैर-लौहचुम्बक) और नॉन-रिलेटिविस्टिक स्पिन स्प्लिटिंग (लौहचुम्बक) ये दोनों गुण होते हैं।
  • उपयोग: 
    • मेमोरी डिवाइस की परिचालन गति बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है, 
    • इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की दक्षता और प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है। 

मद्रास हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) पर 2025 के लिए राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) प्रकाशित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। 

  • NIRF का उद्देश्य संस्थानों की रैंकिंग के लिए एक व्यापक और मानकीकृत फ्रेमवर्क प्रदान करके उच्चतर शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाना है।

राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (National Board of Accreditation: NBA) के बारे में

  • इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) अधिनियम, 1987 की धारा 10(U) के तहत 1994 में स्थापित किया गया था।
    • 2010 में NBA को एक स्वायत्त संस्था बना दिया गया था।
  • प्रमुख कार्य: यह इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन आदि में डिप्लोमा से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर तक तकनीकी संस्थानों द्वारा प्रस्तुत प्रोग्राम्स की गुणवत्ता की जांच करता है।
    • NBA संस्थाओं को नहीं बल्कि उनके प्रोग्राम्स को प्रत्यायन देता है।

19 मार्च को मुजारा आंदोलन की वर्षगांठ मनाई गई।

  • यह आंदोलन मुजारा और तत्कालीन प्रशासन के बीच हुए हिंसक टकराव की स्मृति में हर साल मनाया जाता है।

मुजारा आंदोलन के बारे में

  • शुरुआत: यह आंदोलन पटियाला रियासत में शुरू हुआ था और 1930 के दशक में इसका तेजी से प्रसार हुआ था। 
    • इसकी उत्पत्ति 1920 के दशक के प्रजामंडल आंदोलन से संबंधित थीं।
  • पृष्ठभूमि: विभाजन-पूर्व पंजाब के काश्तकार किसानों (मुजारों) ने बिस्वेदारी प्रणाली (भूमि काश्तकारी संबंधी नियम) के तहत जमीदारों से भूमि के मालिकाना हक की मांग की थी।
    • मुजारों को अपनी पैदावार का एक हिस्सा बिस्वेदार (जमींदार) को देना होता था तथा कुछ हिस्सा अंग्रेजों को देना पड़ता था। इस दोहरी कर वसूली की वजह से किसानों का शोषण होता था।
  • उल्लेखनीय नेता: बूटा सिंह, कृपाल सिंह, आदि।
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