महाकुंभ 2025 की तैयारी में मियावाकी तकनीक का उपयोग करके पिछले दो वर्षों में प्रयागराज में लगभग 56,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में सघन वन उगाए गए हैं।
मियावाकी तकनीक के बारे में
- यह जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक पुनर्वनीकरण तकनीक है।
- इस तकनीक को शहरी क्षेत्रों में घने और देशी लघु वन विकसित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- इस विधि में प्रति वर्ग मीटर के भीतर दो से चार प्रकार के देशज वृक्ष, झाड़ियां, ग्राउंड कवर प्लांट्स आदि रोपित किए जाते हैं।
- यह तकनीक भूमि के लघु खंडों के लिए आदर्श है।
- यह तकनीक संभावित प्राकृतिक वनस्पति (PNV) की अवधारणा पर आधारित है।
- PNV वह वनस्पति है, जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के उगती है।
Article Sources
1 sourceआंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में NGHM के अंतर्गत भारत के पहले ग्रीन हाइड्रोजन हब की आधारशिला रखी गई।
NGHM के बारे में
- घोषणा: जनवरी 2023 में की गई थी।
- मंत्रालय: इसे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने शुरू किया है।
- उद्देश्य: भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके घटकों के उत्पादन, उपयोग व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना।
- लक्ष्य: इसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
- मिशन की उप-योजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
- स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन्स फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन प्रोग्राम (SIGHT): इस कार्यक्रम का उद्देश्य इलेक्ट्रोलाइजर के घरेलू विनिर्माण का समर्थन करना है। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
- हरित हाइड्रोजन हब्स का विकास।
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1 sourceहाल ही में, राजस्थान के जैसलमेर के एक गांव में आर्टिजियन दशाएं देखी गई।
आर्टिजियन दशाएं
- इसके तहत भूमिगत जल अपेक्षाकृत अभेद्य या अपारगम्य चट्टान की परतों में फंसा रहता है।
- यह पृथ्वी की सतह के नीचे गहराई में कम पारगम्य चट्टानों से घिरा रहता है। इसके परिणामस्वरूप, भूमिगत दबाव बहुत अधिक हो जाता है।
- आर्टिजियन दशाएं तब बनती हैं, जब भूजल का प्रवाह पुनर्भरण क्षेत्र से निम्न ऊंचाई वाले निकासी बिंदु तक होने लगता है। उदाहरण के लिए, प्राकृतिक जल सोते (Springs), ड्रिलिंग उद्योग, आदि।
- ट्यूबवेल या कुएं से पानी निकालने के लिए इलेक्ट्रिक पंप की जरूरत होती है, लेकिन आर्टिजियन जल स्वयं भूमिगत दबाव के कारण ऊपर धरातल की ओर निकलने लगता है।
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने उत्तराखंड के बागेश्वर में सेलखड़ी के अनियमित खनन के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई।
सेलखड़ी के बारे में
- सेलखड़ी के बारे में: इसे स्टिऐटाइट के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खनिज टैल्क से बनी एक रूपांतरित चट्टान है। इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उद्योगों में किया जाता है।
- स्रोत खदान के आधार पर इसमें अन्य खनिजों जैसे अभ्रक, क्लोराइट, एम्फिबोल्स, क्वार्ट्ज आदि की अलग-अलग मात्रा होती है।
- स्वरूप: ग्रे, नीला, हरा या भूरा रंग।
- गुण: अपेक्षाकृत नरम, बहुत सघन, और अत्यधिक ताप-प्रतिरोधी।
- उपयोग: काउंटरटॉप्स, सिंक, अंगीठी, मूर्तियों आदि के निर्माण व डिजाइन में।
- भंडार: भारतीय खान ब्यूरो के अनुसार राजस्थान (57%), उत्तराखंड (25%) आदि।
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय नौसेना के लिए इंटरऑपरेबल सोनोबुय का सह-उत्पादन करेंगे।
- यह पहल क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (ICET) पर भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका पहल के उद्देश्य से जुड़ी हुई है।
सोनोबुय के बारे में
- यह हवा से लॉन्च किया जाने वाला एक्सपेंडेबल व इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एकॉस्टिक (ध्वनिक) सेंसर है।
- यह अन्य सोनार प्रणालियों की सटीकता बढ़ाने के लिए जल के तापमान से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
- सोनार/ SONAR (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग) ध्वनि तरंगों का उपयोग करके समुद्र के अन्वेषण और मानचित्रण के लिए सहायक है।
- यह पनडुब्बी-रोधी युद्ध और समुद्र विज्ञान अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है।
एआई टच LLP (सीमित देयता भागीदारी) को दूरसंचार विभाग की USOF की TTDF योजना के तहत वित्तीय अनुदान प्रदान किया गया है। एआई टच 5जी RAN के लिए घटकों का विकास करेगा।
- उल्लेखनीय है कि सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) को अब "डिजिटल भारत निधि" के नाम से जाना जाता है।
RAN के बारे में
- इसके बारे में: यह वायरलेस दूरसंचार प्रणालियों का एक प्रमुख घटक है। यह सेलफोन और कंप्यूटर जैसे उपकरणों को रेडियो लिंक के माध्यम से नेटवर्क से कनेक्ट करने में सक्षम बनाता है।
- यह उपयोगकर्ता उपकरण और कोर नेटवर्क के बीच संचार की सुविधा प्रदान करता है। कोर नटवर्क ग्राहक के डेटा और स्थान की जानकारी का प्रबंधन करता है।
- घटक:
- एंटीना: विद्युत संकेतों को रेडियो तरंगों में परिवर्तित करना;
- रेडियो: डिजिटल सूचना को संकेतों में बदलना; तथा
- बेसबैंड यूनिट्स (BBUs): संकेतों को प्रोसेस करना।
Article Sources
1 sourceविश्व आर्थिक मंच (WEF) ने फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट, 2025 जारी की।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:
- 2030 तक वैश्विक समष्टिगत रुझानों से लगभग 170 मिलियन नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
- प्रौद्योगिकी से संबंधित भूमिकाएं प्रतिशत के हिसाब से सबसे तेजी से बढ़ने वाली नौकरियां हैं। इनमें बिग डेटा विशेषज्ञ, फिनटेक इंजीनियर आदि शामिल हैं।
- लिपिकीय (Clerical) और सचिवीय कर्मचारियों की पूर्ण संख्या में सबसे बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है।
- 2025-2030 की अवधि में कामगारों के सभी कौशलों में से ⅖ भाग यानी 39 प्रतिशत में बदलाव लाने होंगे या वे उपयोगी नहीं रह जाएंगे।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बारे में
- WEF सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
- यह सहयोग और प्रगति के लिए हितधारकों के बीच सार्थक संबंधों हेतु प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि भारत में LPG कनेक्शंस की संख्या 2014 के 14.52 करोड़ से दोगुनी से अधिक होकर 2024 में 32.83 करोड़ हो गई है।
- इनमें से 10.33 करोड़ LPG कनेक्शन PMUY के तहत प्रदान किए गए हैं।
PMUY, 2016 के बारे में
- उद्देश्य: ग्रामीण और वंचित परिवारों को खाना पकाने के लिए LPG जैसा स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना। यह योजना पारंपरिक खाना पकाने के ईंधनों जैसे लकड़ी, कोयला, गाय के गोबर के उपले आदि के उपयोग को कम करने के लिए बनाई गई है।
- लाभार्थी: निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी एक से संबंधित वयस्क महिला को कनेक्शन दिया जाता है-
- अनुसूचित जाति (SC);
- अनुसूचित जनजाति (ST);
- प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) आदि।
- मंत्रालय: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय।