पश्चिमी (पछुआ) विक्षोभ के कारण दिल्ली NCR क्षेत्र में भारी बारिश और तेज हवाएं चलीं | Current Affairs | Vision IAS
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारी बारिश और तेज हवाएं देखने को मिली ।

  • पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति में वृद्धि हुई है, जो सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है।

पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के बारे में 

  • पश्चिमी विक्षोभ बहिरुष्णकटिबंधीय (Extratropical) तूफान होते हैं, जो ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय पवनों के बीच परस्पर क्रिया से  बने कम दबाव वाले क्षेत्रों के कारण उत्पन्न होते हैं।
    • ये उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम से संबंधित हैं, जो हिमालय और तिब्बती उच्चभूमि के ऊपर वायुमंडल में प्रवाहित होती हैं। 
      • यह जेट स्ट्रीम वायुमंडल में अधिक ऊंचाई पर तेज गति से बहने वाली वायु धारा है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। 
  • पश्चिमी विक्षोभ कैस्पियन सागर या भूमध्य सागर क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं। ये हिंदू कुश, काराकोरम और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अचानक शीतकालीन वर्षा करते हैं।
  • विशेषताएं:
    • यह एक गैर-मानसूनी वर्षण है, जो पछुआ पवनों द्वारा संचालित होती है।
    • ये अधिकतर बोरियल शीतकाल (दिसंबर से मार्च) के दौरान सबसे अधिक सामान्य होते हैं।
    • इसके परिणामस्वरूप शीत लहरें, कोहरा, हिमस्खलन, भूस्खलन, बिजली गिरना और भारी वर्षा होती है।
      • उदाहरण के लिए- जून 2013 में उत्तराखंड में आई बाढ़।
    • महत्त्व: शीतकालीन वर्षा जल सुरक्षा और कृषि, विशेषकर रबी फसलों के लिए महत्वपूर्ण होती है।

जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ

  • वैश्विक तापमान में वृद्धि और इसके चलते उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम के प्रबल होने के कारण पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति में वृद्धि हुई है।
  • सर्दियों के मौसम के अलावा अन्य मौसम पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण भारी वर्षा एवं बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि होती है।
  • अरब सागर के तेजी से गर्म होने के कारण पश्चिमी विक्षोभ में आर्द्रता की मात्रा बढ़ रही है।
  • उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम के विस्तार के कारण पश्चिमी विक्षोभ का भी विस्तार हो रहा है।
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