राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक अतिक्रमण की ओर संकेत किया एवं राष्ट्रपति द्वारा सहमति की समय सीमा पर स्पष्टता मांगी | Current Affairs | Vision IAS
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राष्ट्रपति मुर्मू ने अनुच्छेद 143 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को एक प्रेसिडेंशियल रेफरेंस भेजा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या वह अनुच्छेद 142 द्वारा प्रदत्त शक्तियों पर विवाद के बीच राष्ट्रपति और राज्यपालों द्वारा विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर सकता है।

  • ज्ञातव्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने 'तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपालमामले में निम्नलिखित के लिए समय सीमा निर्धारित की-
    • अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपालों के लिए राज्य विधान-मंडलों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर। 
    • अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति के लिए उन विधेयकों पर जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु आरक्षित कर रखा है।
  • राष्ट्रपति ने कई अनुच्छेदों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल पूछे हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
    • क्या न्यायपालिका अनुच्छेद 201 के अंतर्गत राष्ट्रपति के लिए तीन महीने की समय सीमा निर्धारित कर सकती है।
    • क्या राज्यपाल अनुच्छेद 200 के तहत मंत्रिपरिषद की सलाह से बाध्य है, आदि।

प्रेसिडेंशियल रेफरेंस में शामिल किए गए अलग-अलग अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति को कानूनी और लोक महत्त्व के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की राय लेने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 200: राज्य की विधान-मंडल द्वारा पारित विधेयकों के संबंध में राज्यपाल की शक्ति को रेखांकित करता है।
  • अनुच्छेद 201: राज्यपाल द्वारा आरक्षित विधेयकों पर राष्ट्रपति की शक्ति को रेखांकित करता है।
  • अनुच्छेद 361: राष्ट्रपति और राज्यपाल को उनके पद के कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी होने से संरक्षण प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 142: सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी आदेश या डिक्री पारित करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 145(3): संविधान की व्याख्या के संबंध में विधि के किसी सारवान प्रश्न से संबंधित किसी मामले पर निर्णय करने या अनुच्छेद 143 के अंतर्गत किसी संदर्भ पर सुनवाई करने के लिए न्यूनतम 5 न्यायाधीशों की नियुक्ति अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 131: सुप्रीम कोर्ट के आरंभिक अधिकार क्षेत्र से संबंधित।
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