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ESC

केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए 'सेफ हार्बर' की अवधारणा लागू करने पर विचार कर रही है। 

सेफ हार्बर के बारे में

  • सेफ हार्बर एक कानूनी अवधारणा है। यह व्यवस्था उन वेबसाइट्स को कानूनी जवाबदेही से सुरक्षा प्रदान करती है, जिन पर कोई थर्ड पार्टी यूजर गैर-कानूनी कंटेंट पोस्ट करता है या साझा करता है।
  • जरूरत क्यों है: 
    • ऑनलाइन इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए, और 
    • वेबसाइट्स के संचालकों को उन कंटेंट्स के लिए अनुचित रूप से जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाना, जिसे उन्होंने स्वयं प्रकाशित नहीं किया है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79: भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे मध्यवर्तियों को ऐसी सुरक्षा प्रदान करती है।
    • हालांकि, यदि किसी मध्यवर्ती को उसकी वेबसाइट पर गैर-कानूनी कंटेंट की "वास्तविक जानकारी" प्राप्त होती है और वह निर्धारित समय सीमा के भीतर उसे हटाने की कार्रवाई नहीं करता, तो वह यह कानूनी सुरक्षा खो सकता है।

महाराष्ट्र की कडबनवाडी घासभूमि में एंडेंजर्ड इंडियन ग्रे वुल्फ पाए जाते हैं। हालिया दिनों में कुत्तों के हमलों ने उन्हें और अधिक असुरक्षित बना दिया है। 

इंडियन ग्रे वुल्फ (कैनिस ल्यूपस पैलिप्स) के बारे में:

  • इंडियन ग्रे वुल्फ वास्तव में ग्रे वुल्फ की एक उप-प्रजाति है। यह प्रजाति दक्षिण-पश्चिम एशिया से लेकर भारतीय उपमहाद्वीप तक पाई जाती है।
    • यह भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क खुले मैदानों तथा घासभूमियों का शीर्ष शिकारी है।
  • व्यवहार: यह प्रजाति हमेशा छोटे झुंडों में रहती है और ग्रे वुल्फ की अन्य प्रजातियों की तुलना में कम आवाज करती है।
  • संरक्षण स्थिति:
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित।
  • मुख्य खतरे:
    • घासभूमियों का कृषि और औद्योगिक उपयोगों में इस्तेमाल होना,
    • मानवीय गतिविधियों की वजह से पर्यावासों में बदलाव आना,
    • प्राकृतिक शिकार की कमी,
    • आवारा व जंगली कुत्तों से बीमारियों का संक्रमण।

जंगली केले की प्रजाति मूसा इंडेंडैमेनेंसिस में लगभग 4.2 मीटर लंबा फल-गुच्छ/ पुष्प-क्रम (Infructescence) दर्ज किया गया। यह किसी केले के पौधे में दर्ज किया गया अब तक का सबसे लंबा फल-गुच्छ है।

  • फल-गुच्छ (Infructescence): यह फलों का एक समूह या गुच्छ होता है, जो एक धुरी/ तने पर उग आया होता है। इसमें एक मुख्य डंठल होता है और अक्सर शाखाओं की जटिल संरचना भी होती है।

मूसा इंडेंडैमेनेंसिस के बारे में:

  • खोज: इसे पहली बार 2012 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कृष्णा नाला रिजर्व फॉरेस्ट के पास एक दुर्गम उष्णकटिबंधीय वन में दर्ज किया गया था।
  • विशेषताएँ:
    • इसमें हरे रंग के विशिष्ट फूल खिलते हैं और इसका फल-गुच्छ (लक्स/ धुरी) सामान्य केले की प्रजातियों की तुलना में तीन गुना बड़ा होता है।
    • यह लगभग 11 मीटर लंबा पौधा होता है, जबकि सामान्य केले के पौधे की ऊँचाई तीन से चार मीटर होती है।
  • लाभ: प्लांट ब्रीडर्स इस प्रजाति का उपयोग उच्च उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने के लिए एक प्राकृतिक आनुवंशिक संसाधन के रूप में कर सकते हैं।

RIMES की चौथी मंत्रिस्तरीय बैठक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित की गई। इसमें “आपदा से निपटने की तैयारी पर घोषणा-पत्र” को अपनाया गया।

क्षेत्रीय एकीकृत बहु-आपदा पूर्व-चेतावनी प्रणाली (RIMES), 2009 के बारे में:

  • यह एक अंतर-सरकारी संस्था है। यह अपने सदस्य देशों को पूर्व-चेतावनी सेवाएं, आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियां, और क्षमता निर्माण सेवाएं प्रदान करता है।
  • यह प्रणाली 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के प्रयासों से विकसित हुई है, ताकि क्षेत्रीय पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा सके।
  • सदस्य: RIMES में 22 सदस्य राष्ट्र और 26 सहयोगी राष्ट्र शामिल हैं।
  • कार्यालय: इसका क्षेत्रीय पूर्व-चेतावनी केंद्र थाईलैंड के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्थित है।

भारत में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया गया।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के बारे में:

  • यह दिवस प्रत्येक वर्ष 11 मई को मनाया जाता है। यह दिवस 1998 में ऑपरेशन शक्ति के तहत राजस्थान के पोखरण में किए गए सफल परमाणु परीक्षणों और स्वदेशी रूप से विकसित हल्के विमान हंसा-3 की पहली उड़ान के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
    • भारत ने 1998 में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। भारत ने 1974 में ‘स्माइलिंग बुद्धा’ के तहत अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था।
  • पोखरण परमाणु परीक्षणों का महत्त्व: इन परीक्षणों ने भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया। साथ ही, भारत ने अपनी वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता को विश्व मंच पर प्रदर्शित किया।

नासा ने घोषणा की है कि इसकी कुछ संभावना है कि YR4 2032 चंद्रमा से टकरा सकता है।

क्षुद्रग्रह YR4 के बारे में

  • इसे चिली में स्थित एस्ट्रोइड टेरेस्टियल-इम्पैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम (एटलस/ ATLAS) का उपयोग करके खोजा गया था।
    • एटलस में विश्व भर के कई टेलिस्कोप शामिल हैं।
  • यह एक नियर-अर्थ क्षुद्रग्रह है।

क्षुद्र ग्रह के बारे में

  • ये चट्टानी व वायुमंडल विहीन खगोलीय पिंड होते हैं, जो हमारे सौरमंडल के शुरुआती निर्माण के दौरान उत्पन्न अवशेष हैं।
    • इन्हें प्रायः लघु ग्रह कहा जाता है। 
  • अधिकांश क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
  • नियर-अर्थ क्षुद्रग्रहों की परिक्रमा कक्षाएं पृथ्वी के निकट से गुजरती हैं।
    • वे क्षुद्रग्रह जो वास्तव में पृथ्वी के कक्षीय पथ को काटते हैं, उन्हें अर्थ-क्रॉसर्स कहा जाता है।

एक नए अध्ययन में लाफोरा रोग के उपचार में आशा की किरण जगाई है।

लाफोरा रोग के बारे में

  • यह एक दुर्लभ, जानलेवा और गंभीर आनुवंशिक विकार है, जो मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
  • यह ऑटोसोमल रिसेसिव प्रोग्रेसिव मायोक्लोनस एपिलेप्सी (PME) बीमारियों के समूह में से एक है।
    • इन रोगों के कारण दौरे पड़ते हैं, मोटर स्किल की हानि होती है, तथा मानसिक क्षमता में गिरावट आती है।
  • आनुवंशिक कारक: यह EPM2A या EPM2B (NHLRC1) जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है।
  • व्यापकता: यह मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में होता है, जहां रक्त-संबंधी विवाह (करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाह) अधिक आम हैं।
  • विशेषकर भूमध्यसागरीय देशों (स्पेन, इटली व फ्रांस), उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में।

एक अध्ययन में पाया गया कि तिरुवनंतपुरम के पून्थुरा में जियोट्यूबिंग समुद्र तटीय कटाव को नियंत्रित करने में प्रभावी है।

जियोट्यूबिंग के बारे में

  • जियोट्यूब बड़े व पारगम्य फैब्रिक की ट्यूब होती हैं, जो ड्रेज्ड सामग्रियों या अन्य हाइड्रोलिक सामग्रियों से भरी होती हैं।
    • जियोटेक्सटाइल फैब्रिक से जल पार हो जाता है, जबकि ठोस कण अंदर ही फंस जाते हैं। इससे ये अतिरिक्त जल निकासी के लिए तथा मिट्टी को कटाव से बचाए रखने के लिए प्रभावी हो जाती हैं।
  • ये ट्यूब हाई-स्ट्रेंथ, पारगम्य सामग्रियों विशेष रूप से पॉलीप्रोपीलीन से बुने हुए जियोटेक्सटाइल से निर्मित होती हैं। इससे ये अधिक टिकाऊ हो जाती हैं और पर्यावरणीय कारकों को सहने में सक्षम हो जाती हैं।
  • महत्त्व: यह तटीय कटाव को नियंत्रित करती है, लहर के प्रभाव को कम करती है, और समुद्र तट स्थिरीकरण को बढ़ावा देती है।
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