ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुष्प्रचार मनोवैज्ञानिक युद्ध को बढ़ावा दे रहा है | Current Affairs | Vision IAS
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारत के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाई जा रही गलत जानकारी या दुष्प्रचार से निपटने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

  • दुष्प्रचार (Disinformation) का अर्थ है झूठे व भ्रामक या दोनों प्रकार के कंटेंट को जानबूझकर क्रिएट करना और प्रसार करना। वहीं गलत जानकारी (Misinformation) अनजाने में इस तरह के कंटेंट का प्रसार होता है।

मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare - PSYWAR) क्या है?

  • यह युद्धों या भू-राजनीतिक तनावों के समय में प्रोपेगेंडा, धमकी और अन्य गैर-सैन्य रणनीतियों के योजनाबद्ध तरीके से उपयोग को कहते हैं। इसका उद्देश्य दुश्मन को गुमराह करना, डराना और मानसिक रूप से कमजोर करना होता है।
    • उदाहरण के लिए: दुश्मन को आत्मसमर्पण के लिए बाध्य करने वाले पर्चे वितरित करना या जनमत को प्रभावित करने हेतु सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना।
  • लक्ष्य: बिना प्रत्यक्ष युद्ध में उलझे शत्रु के संकल्प, एकता और प्रभावशीलता को कमजोर करना।
  • मनोवैज्ञानिक युद्ध में प्रयुक्त प्रोपेगेंडा के तीन प्रकार:
    • व्हाइट प्रोपेगेंडा: इसमें जानकारी सच्ची होती है, हालांकि आंशिक तौर पर पक्षपात भी होता है।
    • ग्रे प्रोपेगेंडा: इसमें जानकारी अधिकांशतः सत्य होती है और उसमें ऐसा कुछ नहीं होता जिसे गलत साबित किया जा सके।
    • ब्लैक प्रोपेगेंडा: इसमें जानकारी पूरी तरह झूठी होती है और उसे झूठे स्रोतों से जोड़ा जाता है।

मनोवैज्ञानिक युद्ध के प्रभाव:

  • जनता के विश्वास को कमजोर करना: जैसे कि झूठी कहानियाँ बनाई जाती हैं, ताकि आधिकारिक रिपोर्ट्स पर संदेह उत्पन्न हो।
  • सैन्य सफलता सुनिश्चित करना: जैसे आत्मसमर्पण को बढ़ावा देने वाले पर्चे वितरित कर अपनी सैन्य कार्रवाई को सफल बनाया जाता है।
  • ध्रुवीकरण और घबराहट पैदा करना: दुष्प्रचार समाज में विभाजन पैदा करता है और एकजुट राष्ट्रीय कार्रवाई में बाधा डालता है।
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