अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के मूल्य कम करने से संबंधित एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

इस कार्यकारी आदेश का मुख्य लक्ष्य अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों को उन कीमतों के बराबर लाना है जो अन्य समान देशों में दी जाती हैं। यह आदेश "मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN)" मूल्य निर्धारण नीति को लागू करता है, जिसका अर्थ है कि अमेरिका उन दवाओं के लिए वही कीमत चुकाएगा जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे कम है। इसका सम्भवतः भारत के दवा क्षेत्रक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

  • वर्तमान में, अमेरिका अन्य उच्च आय वाले देशों की तुलना में समान दवाओं के लिए लगभग तीन गुना अधिक भुगतान करता है।

मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) के बारे में

  • MFN सिद्धांत बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का प्रमुख आधार है। यह नियम-आधारित व्यवस्था लागू करने का प्रयास करता है। इसके तहत व्यापार अधिकार देशों की आर्थिक या राजनीतिक शक्ति पर निर्भर नहीं होकर नियमों पर आधारित होते हैं। 
  • इसका तात्पर्य यह है कि एक देश को दी गई सर्वोत्तम पहुंच की शर्तें अपने आप प्रणाली में अन्य सभी देशों को प्राप्त हो जाती है।
  • प्रशुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT), 1994 के अनुच्छेद 1 के तहत, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रत्येक सदस्य देश द्वारा अन्य सभी सदस्य देशों को MFN का दर्जा दिए जाने का प्रावधान है।
    • WTO के समझौतों के तहत, MFN दर्जा प्राप्त देश अपने व्यापारिक साझेदारों के बीच भेदभाव नहीं कर सकते।

भारतीय फार्मा क्षेत्रक पर संभावित प्रभाव

  • निर्यात संबंधी चिंताएं: भारत के फार्मा निर्यात में लगभग एक-तिहाई हिस्सा (लगभग 10 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष) संयुक्त राज्य अमेरिका का है। ऐसे में इस आदेश का भारत की फार्मा कंपनियों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • अनुसंधान पर प्रभाव: यदि अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमतें घटती हैं, तो फार्मा कंपनियों के मुनाफे में कमी आएगी। इससे नई दवाओं के अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए धन की कमी हो सकती है।
  • घरेलू बाजार में कीमतों में वृद्धि: फार्मा कंपनियां अमेरिका में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भारत जैसे देशों में दवाओं की कीमतें बढ़ा सकती हैं।
Watch Video News Today
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet