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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बालकों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए विशेष POCSO अदालतें प्राथमिकता के आधार पर स्थापित करने का निर्देश दिया। 

POCSO अदालत के बारे में:

  • लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत, बालकों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई हेतु विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • ये अदालतें सेशन कोर्ट होती हैं, जिन्हें राज्य सरकार संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित करती हैं।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • पीड़ित बालकों की गवाही अदालत द्वारा संज्ञान लेने के 30 दिनों के भीतर दर्ज की जानी चाहिए।
    • विशेष अदालत को, यथासंभवमुकदमे की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी करनी चाहिए। 

हाल ही में, सिक्किम ने राज्य का दर्जा मिलने की 50वीं वर्षगांठ मनाई। 

सिक्किम राज्य की स्थापना के बारे में:

  • सिक्किम को 36वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के तहत भारत संघ के पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था।
    • इससे पहले, 35वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1974 द्वारा सिक्किम को संविधान के अनुच्छेद 2A के अंतर्गत भारत के “संबद्ध राज्य” (Associate State) का दर्जा दिया गया था।
      • बाद में 36वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 2A को निरस्त कर दिया गया था।
  • सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना।
  • अनुच्छेद 371F को संविधान में शामिल किया गया। इस अनुच्छेद में सिक्किम के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं।

CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी, गोवा की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कर्नाटक द्वारा महादेई नदी के जल को मोड़ने से गोवा पर "कम प्रभाव" पड़ेगा। इस रिपोर्ट के बाद गोवा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। 

  • विवाद की पृष्ठभूमि: गोवा और कर्नाटक के बीच कलसा-बंडूरी परियोजना को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य महादेई नदी की सहायक नदियों (कलसा और बंडूरी) का जल मालप्रभा नदी में मोड़ना है। इससे सूखा प्रभावित उत्तरी कर्नाटक में पेयजल की आपूर्ति की जा सकेगी।

महादेई नदी के बारे में:

  • इसे मांडोवी नदी भी कहा जाता है।
  • उद्गम: कर्नाटक के बेलगावी में भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से।  
  • यह नदी गोवा में पश्चिम की ओर बहती हुई पणजी में अरब सागर में मिल जाती है।
  • नदी बेसिन:
    • लगभग 2/3 हिस्सा गोवा में है, तथा शेष बेसिन कर्नाटक और महाराष्ट्र में है।
    • प्रसिद्ध स्थल: दूधसागर जलप्रपात इसी नदी पर स्थित है।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के अधिकारियों ने काजीरंगा टाइगर रिजर्व में त्वरित सर्वेक्षण के दौरान 36 वंशों (genera) की अलग-अलग प्रजातियों को दर्ज किया। 

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के बारे में:

  • अवस्थिति: यह ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ क्षेत्र में और कार्बी आंगलोंग की तलहटी में स्थित है। यह रिजर्व असम के गोलाघाट, नगांव और सोनितपुर जिलों में विस्तृत है।
  • वन प्रकार एवं बायोम: जलोढ़ मृदा वाले घास के मैदान, अर्ध-सदाबहार व आर्द्र पर्णपाती वन, आर्द्रभूमियाँ और रेतीले चौड़ (sandy chaurs)।
  • मुख्य वनस्पति (Flora): बॉम्बैक्स सीबा, अल्बिजिया प्रोसेरा, केरेया आर्बोरिया, लैगेर्स्ट्रोमिया आदि। 
  • मुख्य जीव-जंतु (Fauna): एक सींग वाला गैंडा (Indian Rhino), बाघ, ईस्टर्न स्वैम्प डियर, हाथी, भैंस, हूलॉक गिब्बन, केप्ड लंगूर, गंगा नदी डॉल्फिन आदि। 
  • बहने वाली नदियां: डिफालू (डिफ़्लु) और मोरडिफालू (मोरडिफ़्लु)।  
  • दर्जा: इसे 1985 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

नासा के ग्रेल मिशन ने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा तैयार किया। 

  • ग्रेल मिशन नासा के डिस्कवरी कार्यक्रम के अंतर्गत 2011 में लॉन्च किया गया था।
  • इस मिशन से प्राप्त नक्शा भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए एक सटीक लूनर रिफरेन्स फ्रेम और टाइम सिस्टम स्थापित करने में मदद करेगा। इससे चन्द्रमा का नेविगेशन अधिक सुरक्षित हो सकेगा।

मिशन की मुख्य उपलब्धियां

  • चंद्रमा की असमान आंतरिक संरचना:
    • पृथ्वी की ओर हिस्से वाला चंद्रमा का नियर-साइड वाला भाग अधिक गर्म और भूवैज्ञानिक रूप से अधिक सक्रिय है।
    • चंद्रमा का फार-साइड (जो पृथ्वी से कभी नहीं दिखता) अपेक्षाकृत अधिक ठंडा और निष्क्रिय है।

टाइडल विकृति (Tidal Deformation):

  • चंद्रमा के घूर्णन के दौरान पृथ्वी का गुरुत्व बल चंद्रमा के नियर-साइड को फार-साइड की तुलना में अधिक मोड़ता है। इस विकृति से चन्द्रमा के दोनों ओर के भौगोलिक व आंतरिक संरचनात्मक अंतर सामने आते हैं।
    • चंद्रमा के नियर-साइड में विशाल समतल मैदान हैं, जिन्हें मेयर (mare) कहा जाता है।
    • फार-साइड अधिक पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ वाला भू-भाग है।

भारत और जापान चंद्रयान-5/ लूपेक्स (LUPEX) (लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) मिशन के डिजाइन चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं।

  • यह मिशन निम्नलिखित मिशनों  के क्रम में है:
    • चंद्रयान-1 और 2 (ऑर्बिटर-आधारित चंद्र अन्वेषण);
    • चंद्रयान-3 (लैंडर-रोवर आधारित चन्द्रमा पर अन्वेषण); तथा
    • आगामी चंद्रयान-4 (भारत का पहला चंद्र नमूना वापसी मिशन)। 
  • भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजना है।

चंद्रयान-5 के बारे में

  • उद्देश्य: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में मौजूद अस्थिर पदार्थों का अध्ययन करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
    • इसरो मुख्य रूप से लैंडर का निर्माण करेगा, जबकि JAXA (जापान) रोवर प्रदान करेगा।
    • नासा और ESA द्वारा पर्यवेक्षण उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

मणिपुर के सेनापति जिले के विलोंग खुल्लेन गांव में स्थित प्राचीन मोनोलिथ संरचनाओं के शोध और प्रचार-प्रसार की कमी को लेकर चिंता जताई गई है।

मोनोलिथ के बारे में

  • माना जाता है कि ये महापाषाण काल की संरचनाएं हैं।
  • इन्हें मणिपुर का "स्टोनहेंज" कहा जाता है, क्योंकि इनका स्वरूप ब्रिटेन के प्रसिद्ध स्टोनहेंज स्मारक (लगभग 4,500 वर्ष पुराना) से मिलता-जुलता है।
    • हालांकि, ब्रिटेन के स्टोनहेंज के विपरीत, यहां के पत्थरों में कोई नियत क्रम या समरूपता नहीं है। ये अव्यवस्थित रूप से संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों या प्रतीकात्मक उद्देश्यों के लिए रखे गए हैं।
  • यहां बड़े-बड़े पत्थरों की संरचनाओं का एक रहस्यमय समूह देखने को मिलता है, जिनकी उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है।
  • हालांकि, यह माना जाता है कि ये मरम जनजाति की प्राचीन परंपराओं का हिस्सा हैं।

पुष्कर कुंभ और सरस्वती पुष्करालु का आयोजन क्रमशः उत्तराखंड एवं तेलंगाना में किया जा रहा है। इन दोनों मेलों का 12 साल में एक बार आयोजन किया जाता है।

पुष्कर कुंभ के बारे में

  • हर 12 साल में तब होता है, जब गुरु (बृहस्पति) ग्रह मिथुन (Gemini) राशि में प्रवेश करता है।
  • यह मेला उत्तराखंड के माणा गांव में अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम (केशव प्रयाग) पर लगता है।
  • धार्मिक महत्त्व:
    • यह वही पवित्र स्थान है, जहां वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना की थी।
    • वैष्णव तीर्थ: संत रामानुजाचार्य और माधवाचार्य ने यहां देवी सरस्वती से दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था।

सरस्वती पुष्करालु के बारे में

  • यह मेला भूमिगत सरस्वती नदी की पूजा को समर्पित है। यह नदी गोदावरी और प्राणहिता नदियों के साथ मिलकर कलेश्वरम के त्रिवेणी संगम पर मिलती है।
  • यह मेला तेलंगाना के कालेश्वरम तीर्थ नगर में मनाया जाता है, जो श्री कालेश्वर श्री मुक्तेश्वर स्वामी मंदिर का स्थल है।
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