इस रिपोर्ट में जल, सैनिटेशन और स्वच्छता (Water, Sanitation and Hygiene: WASH) की उपलब्धता के मामले में असमानताओं को उजागर किया गया है। इन असमानताओं के कारण SDG 6 (सभी के लिए स्वच्छ जल और सैनिटेशन की उपलब्धता सुनिश्चित करना) को हासिल करने में बाधा उत्पन्न हुई है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नज़र
- वैश्विक स्तर पर:
- खुले में शौच: निम्न आय वाले देशों में इसकी दर वैश्विक औसत से 4 गुना अधिक है।
- विश्व की 58% आबादी को बेहतर रूप से प्रबंधित सैनिटेशन सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- सुरक्षित प्रबंधन वाला पेयजल: इसका कवरेज 68% (2015) से बढ़कर 74% (2024) हो गया है।
- महिलाओं पर बोझ: महिलाओं द्वारा पानी लाने में अधिक समय व्यतीत करने के प्रमाण सामने आ रहे हैं।
- मेंस्ट्रुअल स्वास्थ्य संबंधी डेटा: इस मामले में 70 देशों में सभी आय स्तरों में व्यापक अंतराल मौजूद है।
- भारत के संबंध में:
- खुले में शौच: खुले में शौच की रोकथाम में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी ग्रामीण इलाकों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों में यह समस्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- सैनिटेशन कवरेज: बुनियादी सैनिटेशन तक पहुंच लगभग सार्वभौमिक है, लेकिन उनके उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन की गुणवत्ता में कमी दर्ज की गई है।
- पेयजल: घरेलू नल जल कनेक्शन का विस्तार हुआ है।
- सुरक्षित तरीके से प्रबंधित पेयजल की उपलब्धता सार्वभौमिक स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
- समानता के मुद्दे: जल की उपलब्धता और सैनिटेशन के मामले में हाशिये पर मौजूद समूह (जनजातीय आबादी, सबसे गरीब) अभी भी पिछड़े हुए हैं।
भारत में WASH संबंधी पहलें
- स्वच्छ भारत मिशन (SBM): इसके चलते खुले में शौच की प्रथा को समाप्त किया गया है। साथ ही, इसके तहत महिलाओं को सशक्त बनाया गया है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है।
- जल जीवन मिशन (JJM): इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के सभी घरों में व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।