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हाल ही में, लोक सभा ने वित्त विधेयक, 2025 पारित किया।

वित्त विधेयक के बारे में

  • संविधान वित्तीय विधान को दो श्रेणियों में विभाजित करता है, अर्थात् धन विधेयक (अनुच्छेद 110) और वित्त विधेयक (अनुच्छेद 117)।
  • वित्त विधेयक की दो श्रेणियां:
    • अनुच्छेद 117(1): इसमें कुछ विषय धन विधेयक से जुड़े होते हैं है, लेकिन यह केवल धन विधेयक से संबंधित विषयों तक ही सीमित नहीं होता है;
      • इसे केवल लोक सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य होती है।
    • अनुच्छेद 117(3): इसमें वे कानून शामिल होते हैं, जिनके अधिनियमित होने और लागू होने पर भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा।
      • इसे किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य नहीं होती है।
      • इसे किसी भी सदन द्वारा तब तक पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति संबंधित सदन से इस पर विचार करने की सिफारिश न कर दे।
  • राज्य सभा इन विधेयकों को सामान्य विधेयकों की तरह अस्वीकार या संशोधित कर सकती है।

RRBs ने वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 7,571 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। साथ ही, जोखिम भारित आस्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (CRAR), जमा राशि, गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPAs), ऋण-जमा अनुपात जैसे प्रमुख वित्तीय संकेतकों में भी लगातार सुधार हुआ है।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के बारे में

  • उत्पत्ति: नरसिंहम वर्किंग ग्रुप (1975) की सिफारिशों के आधार पर 2 अक्टूबर, 1975 को RRBs की स्थापना हुई थी। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत इन्हें और मजबूत किया गया था।
  • स्वामित्व: इनका संयुक्त स्वामित्व केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और प्रायोजक वाणिज्यिक बैंकों के पास क्रमशः 50:15:35 के अनुपात में है।
  • विनियमन: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित और नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षित।
  • उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, व्यापार, वाणिज्य, उद्योग एवं अन्य उत्पादक गतिविधियों का विकास करना।
  • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण: इसे संशोधित करके 2016 में RBI द्वारा निर्धारित उप-लक्ष्यों के अंतर्गत कुल ऋण का 75% किया गया है।

हाल ही में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर नियमों में संशोधन करते हुए सेफ हार्बर का लाभ उठाने की सीमा 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दी है।

सेफ हार्बर नियम के बारे में:

  • यह भारत के ट्रांसफर प्राइसिंग फ्रेमवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तकनीकी रूप से, "सेफ हार्बर" उन परिस्थितियों को दर्शाता है, जहां कर प्राधिकरण, करदाता द्वारा घोषित ट्रांसफर प्राइसिंग को आर्म्स लेंथ प्राइस (स्वतंत्र बाजार मूल्य) मानकर स्वीकार करता है। यह आमतौर पर कार, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के आयात के दौरान करदाताओं एवं व्यवसायों को लाभ पहुंचाता है। 
  • सेफ हार्बर नियम कर निश्चितता प्रदान करते हैं। इससे व्यवसाय बिना किसी कर विवाद के अपना आर्म्स लेंथ प्राइस निर्धारित कर सकते हैं।  
  • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 92CB के तहत आर्म्स लेंथ प्राइस निर्धारित करने के लिए सेफ हार्बर नियम परिभाषित किए गए हैं। 
    • ट्रांसफर प्राइस: यह वह मूल्य है, जिस पर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी समूह की संबद्ध संस्थाओं के बीच लेन-देन होता है।  
    • आर्म्स लेंथ प्राइस: वह मूल्य है, जो स्वतंत्र और असंबंधित पक्षों के बीच खुले बाजार की शर्तों के तहत सहमति से तय किया जाता है।

हाल ही में, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) 3.0 लॉन्च किया।

भीम 3.0 की मुख्य विशेषताएं

  • कई भाषा में उपलब्ध: यह अब 15+ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
  • इसके तहत आसानी से खर्चों को ट्रैक, प्रबंधित और स्प्लिट किया जा सकता है।
  • अस्थिर इंटरनेट कनेक्शन वाले क्षेत्रों के लिए अनुकूलित: यह अस्थिर नेटवर्क कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी निर्बाध लेन-देन सुनिश्चित करता है।
  • बिल्ट-इन टास्क असिस्टेंट: उपयोगकर्ताओं को लंबित बिलों, UPI  लाइट एक्टिवेशन और कम बैलेंस के बारे में अलर्ट करता है।
  • भीम वेगा: यह एक इन-ऐप पेमेंट सॉल्यूशन है, जो ऑनलाइन मर्चेंट प्लेटफॉर्म्स के साथ सीधे एकीकृत हो जाता है। इससे थर्ड पार्टी एप्लीकेशंस के साथ इंटरऑपरेबिलिटी संभव हो जाती है।

बिहार में शिक्षा के एक अन्य प्राचीन केंद्र विक्रमशिला को पुनर्जीवित करने का कार्य चल रहा है। इससे पूर्व सरकार ने एक दशक पहले राजगीर की तलहटी में बसे नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया था।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय के बारे में

  • स्थापना: इसका निर्माण पाल शासक धर्मपाल (8वीं-9वीं शताब्दी ई.) ने कराया था। यह नालंदा के साथ-साथ विकसित हुआ था। 
    • धर्मपाल ने ही आधुनिक बांग्लादेश में सोमपुर महाविहार की स्थापना की थी।
  • विक्रमशिला विश्वविद्यालय में वज्रयान/ तंत्रयान बौद्ध धर्म, गुप्त विद्या (Occult studies) और धर्मशास्त्र आदि विषयों का अध्ययन कराया जाता था।
  • तिब्बत से कई विद्वान यहां अध्ययन के लिए आते थे। कई पांडुलिपियों की संस्कृत में रचना की गई थी और उनका तिब्बती भाषा में अनुवाद भी किया गया था।
  • पाल साम्राज्य के बौद्ध विद्वान आतिश दीपांकर (980-1054 ई.) विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अध्यक्ष थे।
  • 12वीं शताब्दी के अंत में कुतुबुद्दीन ऐबक के सैन्य कमांडर बख्तियार खिलजी ने इसे नष्ट कर दिया था।

सरकार ने स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (GMS) के मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सरकारी जमा (MLTGD) घटकों को 26 मार्च, 2025 से बंद करने का फैसला किया है।

स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के बारे में

  • शुरुआत: 2015 में। 
  • उद्देश्य: स्वर्ण आयात कम करना तथा घरेलू एवं संस्थागत स्वर्ण को उत्पादक कार्यों में लगाना।
  • कार्यान्वयनकर्ता: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को छोड़कर सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक।
  • योजना के अंतर्गत श्रेणियां:
    • अल्पावधि बैंक जमा (STBD): 1-3 वर्ष (बैंकों द्वारा प्रबंधित)।
    • मध्यम अवधि सरकारी जमा (MTGD): 5-7 वर्ष।
    • दीर्घकालिक सरकारी जमा (LTGD): 12-15 वर्ष।
  • मौजूदा मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सरकारी जमा के तहत निक्षेप, RBI की वर्तमान गाइडलाइंस के अनुसार परिपक्वता अवधि तक जारी रहेंगे। 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर विभागीय स्थायी समिति ने वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत अपर्याप्त खर्च को लेकर चिंता जताई।

प्रदूषण नियंत्रण योजना के बारे में

  • प्रशासित: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।
  • प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना।
  • प्रारम्भ: 2018 से।
  • उद्देश्य: देश भर में वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता और ध्वनि प्रदूषण स्तर की निगरानी करना। इसके अलावा, वायु प्रदूषण शमन के लिए उचित कदम उठाना।
  • योजना के घटक:
    • कमजोर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/ प्रदूषण नियंत्रण समितियों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को प्रदूषण निवारण हेतु सहायता प्रदान करना;
    • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP);
    • पर्यावरण निगरानी नेटवर्क कार्यक्रम; तथा 
    • अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रम।
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