जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने तारा बनने की प्रक्रिया की छवियां ली | Current Affairs | Vision IAS
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ये छवियां नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने जारी की हैं। छवियों में एक तारे से गैस और धूल का गुबार निकलता हुआ दिखाया गया है। यह तारा पृथ्वी से 625 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) के सबसे नजदीकी तारा-निर्माण क्षेत्रों में से एक में अवस्थित है।

  • JWST एक उन्नत अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला है। इसे 2021 में विशेष रूप से इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम में ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया था। ध्यातव्य है कि JWST को हबल स्पेस टेलीस्कोप के बाद उसकी जगह लेने के लिए विकसित किया गया है। 

एक तारे का जीवन चक्र

  • नेबुला (निहारिका) (जन्म): एक तारा बनने की प्रक्रिया नेबुला (गैस और धूल का विशाल बादल) से शुरू होती है। यह बादल मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैस से बना होता है।
    • प्रोटोस्टार: जब गुरुत्वाकर्षण बल इस नेबुला को अंदर की ओर संकुचित करता है, तो यह गर्म होने लगता है और घूर्णन करते हुए एक प्रोटोस्टेलर डिस्क निर्मित करता है।
  • मुख्य अनुक्रम: यह तारे का सबसे लंबा चरण होता है। इस दौरान तारे के केंद्र में हाइड्रोजन लगातार हीलियम में संलयित होती रहती है।
    • हमारे सूर्य ने अभी इसी चरण के लगभग आधे समय को पूरा कर लिया है।
  • लाल दानव या सुपरजाइंट बनने का चरण: जब तारे के केंद्र में हाइड्रोजन खत्म हो जाती है, तो यह अपने द्रव्यमान के आधार पर अलग-अलग रूप में विकसित होता है। 
    • कम से मध्यम द्रव्यमान वाले तारे (जैसे, सूर्य): इनका केंद्र सिकुड़ जाता है और बाहरी परतें फैल जाती हैं। इस प्रकार तारा लाल दानव बन जाता है।
    • विशालकाय तारे: ये तारे फैलकर सुपरजाइंट बन जाते हैं और क्रमिक चरणों में भारी तत्वों (जैसे कार्बन, ऑक्सीजन, आयरन आदि) का संलयन करते हैं।
  • अंतिम चरण 
    • कम से मध्यम द्रव्यमान वाले तारे: इसमें तारे की बाहरी परतें प्लेनेटरी नेबुला के रूप में बाहर निकलती हैं और इसका कोर एक सघन व गैर-संलयनकारी श्वेत वामन तारे के रूप में बदल जाता है। 
      • यदि इसका द्रव्यमान चंद्रशेखर सीमा (1.4 सौर द्रव्यमान) से कम रहता है, तो यह स्थिर बना रहता है।
    • उच्च द्रव्यमान वाले तारे (10 या अधिक सौर द्रव्यमान): जब तारे के कोर में आयरन का जमाव होता है, तो यह गुरुत्वाकर्षण के कारण संकुचित होकर ढह जाता है, जिससे सुपरनोवा नामक एक महाविस्फोट होता है। 
      • विस्फोट के बाद यदि बचे हुए कोर का द्रव्यमान 1.4 से 3 सौर द्रव्यमान के बीच रह जाता है, तो यह एक अत्यंत सघन न्यूट्रॉन स्टार बन जाता है।
      • विस्फोट के बाद यदि बचे हुए कोर का द्रव्यमान लगभग 3 सौर द्रव्यमान से अधिक रहता है, तो यह एक ब्लैक होल के रूप में बदल जाता है। ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि प्रकाश भी इससे बाहर नहीं निकल सकता।
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