राज्य सभा ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित किया | Current Affairs | Vision IAS
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इस विधेयक में आपदाओं से निपटने में प्रतिक्रियात्मक पद्धति की जगह अग्र-सक्रिय (Proactive) के साथ-साथ नवाचारी और भागीदारी आधारित तरीका अपनाने पर बल दिया गया है।

विधेयक के मुख्य प्रावधानों पर एक नजर

  • आपदा प्रबंधन योजनाएं बनाना: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMAs) के पास आपदा-प्रबंधन योजनाएं बनाने की जिम्मेदारी होगी। 
  • NDMA और SDMAs के कार्य: इन्हें कई नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    • आपदा जोखिमों (जैसे-चरम जलवायु घटनाओं) की समय-समय पर समीक्षा करना, 
    • न्यूनतम राहत मानकों के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित करना, 
    • राष्ट्रीय और राज्य आपदा डेटाबेस बनाना आदि। 
  • NDMA में नियुक्तियां: NDMA को अपने स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या एवं श्रेणी निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी लेना आवश्यक है 
  • शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण: यह विधेयक राज्य सरकारों को राज्य की राजधानियों और नगर निगम वाले शहरों के लिए एक अलग आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित करने का अधिकार प्रदान करता है।
  • राज्य आपदा मोचन बल (SDRF): यह विधेयक राज्य सरकारों को SDRF स्थापित करने, इसके कार्यों को निर्धारित करने और इसके सदस्यों के लिए सेवा शर्तें तय करने का अधिकार देता है।
  • मौजूदा आपदा-प्रबंधन समितियों को वैधानिक दर्जा: विधेयक में राष्ट्रीय संकट-प्रबंधन समिति (NCMC) और उच्च स्तरीय समिति (HLC) जैसी मौजूदा संस्थाओं को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। 
    • NCMC: यह राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रकृति की विपदाओं से निपटने के लिए नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगी। 
    • HLC: यह आपदाओं के दौरान राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।   

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के बारे में

  • यह अधिनियम आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए कानूनी और संस्थागत फ्रेमवर्क निर्धारित करता है। 
  • संस्थागत फ्रेमवर्क: इस अधिनियम में NDMA, SDMAs और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (DDMAs) की स्थापना से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। इन संस्थाओं को अपने-अपने स्तर पर आपदा से निपटने की तैयारी और उससे होने वाले जोखिम को कम करने के लिए उपाय करने की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
  • वित्त-पोषण व्यवस्था: इस कानून में राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF), राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF), राष्ट्रीय आपदा-शमन कोष तथा राज्य एवं जिला स्तरीय कोषों की स्थापना संबंधी प्रावधान किए गए हैं।
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