कर्नाटक के विधायक को सजा मिलने के बाद उसे विधान सभा सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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अवैध खनन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद कर्नाटक के एक विधायक को अयोग्य घोषित किया गया है। इससे निर्वाचन क्षेत्र में उसकी सीट रिक्त हो गई है।

  • विधायक की यह अयोग्यता संविधान के अनुच्छेद 191 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 8 के तहत घोषित की गई है।

वर्तमान सांसद या विधायक की अयोग्यता

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 में वे स्थितियां दी गई हैं, जिनके आधार पर क्रमशः संसद सदस्य (MP) या विधान सभा सदस्य (MLA) को अयोग्य ठहराया जा सकता है। ये स्थितियां निम्नलिखित हैं:
    • लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) पर होना;
    • यदि सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त व्यक्ति (Person of unsound mind) घोषित किया गया हो;
    • अनुमोचित दिवालिया (undischarged insolvent) घोषित हुआ हो;
    • भारत का नागरिक न होना या किसी अन्य देश की नागरिकता स्वेच्छा से ले लेना; 
    • दलबदल का दोषी पाए जाने पर;
    • संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अंतर्गत अयोग्य ठहराया गया हो;
  • वैधानिक प्रावधानलोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, किसी विधि-निर्माता को निम्नलिखित कारणों से अयोग्य ठहराया जा सकता है:
    • रिश्वतखोरी, बलात्कार, वैमनस्य फैलाने या अस्पृश्यता जैसे अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद दो साल या उससे अधिक की सजा (धारा 8 के अनुसार) पाने पर;
    • भ्रष्ट आचरण में संलिप्तता के आधार पर;
    • भ्रष्टाचार/ गैर-वफादारी के मामले में सरकारी सेवा से बर्खास्तगी पर;
    • सरकार के साथ किसी अनुबंध में शामिल होने पर;
    • ऐसी कंपनी में प्रमुख पद पर होना जिसमें सरकार की 25% या अधिक हिस्सेदारी हो;
    • चुनावी व्यय की रिपोर्ट न देना। 
  • दोषसिद्ध विधायकों के लिए अयोग्यता की अवधि: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत, यदि किसी विधि-निर्माता को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह सजा की अवधि और उसके अतिरिक्त छह वर्षों के लिए अयोग्य होता है।

लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले (2013) में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि उपर्युक्त सजा मिलने पर विधि निर्माता तुरंत अयोग्य हो जाएगा।

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