उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price: FRP) | Current Affairs | Vision IAS
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प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने चीनी सीजन 2024-25 के लिए गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) को मंजूरी दी। 

उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) के बारे में:

  • इस मूल्य की घोषणा केंद्र सरकार करती है। इस मूल्य पर चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदना अनिवार्य होता है।
  • गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 केंद्र सरकार को गन्ने का FRP तय करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • यह मूल्य कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाता है।
  • उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड जैसे कुछ राज्य अपना राज्य परामर्शी मूल्य (State Advised Price: SAP) निर्धारित करते हैं, जो आमतौर पर FRP से अधिक होता है।

भारत ने स्टॉकहोम कन्वेंशन के तहत खतरनाक कीटनाशक क्लोरपायरीफॉस (Chlorpyrifos) को सूचीबद्ध करके इसके वैश्विक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से उपयोग समाप्त करने के प्रस्ताव का विरोध किया है।

  • क्लोरपायरीफॉस को 2021 में दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POP) के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए आवेदन दिया गया था। इसके बाद ही इसके वैश्विक स्तर पर उपयोग को समाप्त करने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।

स्टॉकहोम कन्वेंशन के बारे में:

  • उत्पत्ति: इसे 2001 में अपनाया गया था और 2004 में लागू किया गया था।
  • उद्देश्य: मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को POPs से सुरक्षित रखना।
    • POPs कार्बन-युक्त जैविक-रासायनिक पदार्थ होते हैं। ये लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं और जीवों में संचित होते रहते हैं। साथ ही, ये खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर जाते हैं। इस तरह ये मानव और वन्यजीव, दोनों के लिए विषाक्त सिद्ध होते हैं।
  • विशेषताएं: कन्वेंशन के तहत रसायनों को तीन अनुलग्नकों में सूचीबद्ध किया गया है:
    • अनुलग्न A: उपयोग की पूर्ण समाप्ति के लिए, 
    • अनुलग्न B और C: उपयोग को सीमित करने के लिए।
    • भारत ने स्टॉकहोम कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हुए हैं और इसकी अभिपुष्टि (ratify) भी कर दी है।

कार्बन को समुद्र से अवशोषित करने वाली एक क्रांतिकारी परियोजना “SeaCURE” ने इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर कार्य करना शुरू किया। 

प्रोजेक्ट SeaCURE के बारे में:

  • यह परियोजना यूनाइटेड किंगडम द्वारा वित्त-पोषित है।
  • यह एक लघु-स्तरीय पायलट परियोजना है।
  • इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या समुद्री जल से सीधे कार्बन को अवशोषित करना, वायुमंडलीय CO₂ के स्तर को कम करने का एक किफायती और प्रभावी तरीका हो सकता है।
  • कार्बन कैप्चर के पारंपरिक तरीकों के तहत उत्सर्जन के स्रोत पर ही कार्बन को कैप्चर करने का प्रयास किया जाता है या फिर सीधे हवा से CO₂ को पृथक किया जाता है। वहीं SeaCURE प्रोजेक्ट के तहत महासागरों से कार्बन अवशोषित करने का प्रयास किया जाता है, क्योंकि महासागरों में कार्बन की मात्रा वायुमंडल की तुलना में 150 गुना अधिक होती है।

एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि प्रतिदिन थैलेट्स के संपर्क में आने से दिल की बीमारी के कारण दुनिया भर में 3.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। यह दुनिया भर में दिल की बीमारी से होने वाली मौतों का 13 प्रतिशत है। 

  • थैलेट्स आमतौर पर घरों में उपयोग की जाने वाली प्लास्टिक वस्तुएँ बनाने में इस्तेमाल किए जाते हैं।

थैलेट्स के बारे में:

  • ऑर्थो-थैलेट्स को आम तौर पर “थैलेट्स” कहा जाता है। ये प्लास्टिक उत्पादों को मुलायम और कम नाजुक बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थ हैं। इनका विशेष रूप से पॉलीविनाइल क्लोराइड नामक प्लास्टिक में उपयोग होता है। 
  • ये रंगहीन, गंधहीन और तैलीय तरल पदार्थ होते हैं, जिन्हें “प्लास्टिसाइज़र” भी कहा जाता है।
  • ये उस प्लास्टिक सतह से स्थायी रूप से नहीं जुड़ते, जिन पर इन्हें लगाया जाता है।
  • उपयोग: औषधियां और चिकित्सीय उपकरण (जैसे मेडिकल ट्यूबिंग), फ़ूड पैकेजिंग, आदि।

हालिया शोध के अनुसार, ब्रह्मांड की मूल प्रकृति को यह जानकर निर्धारित किया जा सकता है कि वह कितना "क्लम्पी " या सघन है, जिसे S8 के माध्यम से मापा जाता है

S8 के बारे में:

  • यह ब्रह्मांड में पदार्थों के वितरण में विषमता (असमरूपता) की एक माप है।
  • इसे ब्रह्मांड के अलग-अलग क्षेत्रों में आकाशगंगाओं और अन्य खगोलीय पिंडों की गणना करके तथा पदार्थ के वितरण का मूल्यांकन करके निकाला जाता है।
  • S8 का अधिक मान यह दर्शाता है कि ब्रह्मांड में अधिक "क्लस्टरिंग" (पदार्थों का सामूहीकरण या  सघनता) है। वहीं कम मान यह संकेत करता है कि पदार्थ का वितरण अधिक समान रूप से हुआ है।
  • S8 टेंशन तब उत्पन्न होती है, जब S8 के मान को मापने के अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग अनुमान प्राप्त होते हैं।

शोधकर्ताओं ने उन जीनों की पहचान की है, जो ग्रेगर जोहान मेंडल द्वारा अध्ययन किए गए मटर के अंतिम तीन लक्षणों (traits) के लिए जिम्मेदार हैं।

  • ग्रेगर मेंडल ने लगभग 28,000 मटर के पौधों के बीच क्रॉस-ब्रीड किया था और बीजों व फली के आकार एवं रंग जैसे लक्षणों का अध्ययन कर आनुवंशिक वंशानुक्रम के बारे में महत्वपूर्ण खोजें की थी।
  • उद्देश्य: यह समझना और पहचानना कि मटर के पौधों में ये लक्षण आने वाली पीढ़ियों को कैसे विरासत में मिलते हैं। 

मेंडेलियन वंशानुक्रम के बारे में

  • यह एक दृष्टिकोण है, जो इस बात की व्याख्या करता है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को लक्षण या गुण अलग-अलग इकाइयों या जीनों के माध्यम से कैसे विरासत में मिलते हैं।
  • वंशानुक्रम के सिद्धांत को समझाने के लिए, उन्होंने तीन नियमों का प्रतिपादन किया। ये नियम हैं- प्रभुत्व का नियम, पृथक्करण का नियम और स्वतंत्र वर्गीकरण का नियम।

यूनाइटेड किंगडम स्थित एन्सेफलाइटिस इंटरनेशनल ने एन्सेफलाइटिस और अन्य वैक्सीन द्वारा रोकथाम योग्य बीमारियों के बढ़ते खतरे के खिलाफ टीकाकरण के महत्त्व को बढ़ावा देने हेतु एक वैश्विक अभियान शुरू किया।

एन्सेफेलाइटिस के बारे में

  • यह मस्तिष्क के सक्रिय ऊतकों में सूजन है, जो किसी संक्रमण (वायरल, बैक्टीरियल आदि) या ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया के कारण होती है। इससे मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, जिससे सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, तेज प्रकाश से परेशानी, मानसिक भ्रम और दौरे पड़ने लगते हैं।
  • जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस (JEV), इन्फ्लूएंजा, वेस्ट नाइल वायरस, आदि रोगजनकों की वजह से एन्सेफलाइटिस रोग होता है।
  • भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP)जापानी एन्सेफलाइटिस सहित 12 बीमारियों के खिलाफ नि:शुल्क टीकाकरण कवर प्रदान करता है।

बादामी के चालुक्य राजवंश के विक्रमादित्य प्रथम के समय का एक दुर्लभ अभिलेख दावणगेरे जिले (कर्नाटक) के मदापुरा झील में खोजा गया।

विक्रमादित्य प्रथम के बारे में

  • कालावधि: 644 ईस्वी-681 ईस्वी।
  • पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम के हाथों अपने पिता पुलकेशिन द्वितीय की पराजय के बाद विक्रमादित्य प्रथम सिंहासन पर आसीन हुआ था। 
  • सैन्य विजय: विक्रमादित्य प्रथम की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि चालुक्यों की राजधानी वातापी को पल्लवों से पुनः प्राप्त करना था।
  • स्थापत्य संरक्षण: उसने मुक्त खड़े मंदिरों के निर्माण में योगदान दिया था, जो चालुक्य स्थापत्य कला की विशिष्टता की पहचान बन गए।
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