वैज्ञानिकों ने लकवाग्रस्त व्यक्तियों की मदद के लिए ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) प्रणाली विकसित की | Current Affairs | Vision IAS
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यह प्रणाली किसी लकवाग्रस्त व्यक्ति को केवल उस गतिविधि की कल्पना करने में सक्षम बनाती है, जिसे वह करना चाहता है। इस दौरान सेंसर्स उसके मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं और एक AI को प्रशिक्षित करते हैं, जो एक रोबोटिक आर्म को संचालित करता है।

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) के बारे में

  • अर्थ: यह एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) द्वारा उत्पन्न मस्तिष्क संकेतों को प्राप्त करती है, उनका विश्लेषण करती है और उन्हें इच्छित क्रिया के लिए आउटपुट डिवाइस को भेजे जाने वाले कमांड्स में बदलती है।
  • यह न तो आवाज से चालित है और न ही मांसपेशियों से संचालित है। साथ ही, यह न ही मस्तिष्क के विचार पढ़ने वाला उपकरण है।

BCI प्रणाली के घटक-

  • सिग्नल एक्वीजीशन: इसमें मस्तिष्क संकेतों को मापा जाता है, जिन्हें डिजिटाइज़ कर कंप्यूटर को भेजा जाता है।
  • फीचर एक्सट्रैक्शन: यह संकेतों का विश्लेषण करने की प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत प्रासंगिक संकेत विशेषताओं (जैसे कि व्यक्ति की मंशा) को बाहरी सामग्री से अलग किया जाता है। 
  • फ़ीचर ट्रांसलेशन एल्गोरिदम: यह आउटपुट डिवाइस के लिए विशेषताओं को उपयुक्त कमांड्स में बदलता है। 
  • डिवाइस आउटपुट: यह लैटर सेलेक्शन, कर्सर कंट्रोल, रोबोटिक आर्म ऑपरेशन आदि के माध्यम से किया जाता है।

BCI के मुख्य उपयोग 

  • संचार और नियंत्रण: यह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक वैकल्पिक संचार चैनल प्रदान करता है।
  • चिकित्सा: यह निवारण (धूम्रपान, मोशन सिकनेस, आदि), पहचान एवं निदान (मस्तिष्क या नींद संबंधी विकार), तथा स्वास्थ्यलाभ और सुधार (मस्तिष्क या नींद संबंधी विकार), आदि में उपयोगी साबित हो सकता है।
  • सुरक्षा और प्रमाणीकरण: मस्तिष्क तरंगों की विशिष्टता के आधार पर सुरक्षित पहचान सुनिश्चित करता है। पासवर्ड और बायोमेट्रिक से जुड़ी कमजोरियों को कम करता है।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण: अध्ययन की गई जानकारी, व्यक्तिगत अंतर्क्रिया आदि की स्पष्टता निर्धारित करता है।
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