यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है। साथ ही, इसमें पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर देश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से व्यक्तिगत छात्रवार डेटा एकत्र किया गया है।
2024-25 के लिए प्रमुख निष्कर्ष
- UDISE+ की शुरुआत के बाद पहली बार देशभर में शिक्षकों की कुल संख्या 2024-25 में 1 करोड़ से अधिक हो गई है। यह 2022-23 की तुलना में 6.7% की वृद्धि दर्शाता है।
- छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) NEP द्वारा अनुशंसित 1:30 अनुपात से अधिक हो गया है।
- वर्तमान PTR: फाउंडेशनल (10), प्रिपरेटरी (13), मिडिल (17) और सेकेंडरी स्तरों पर (21) है।
- स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की दर (Drop out rates): इसमें प्रिपरेटरी (2.3%), मिडिल (3.5%) और सेकेंडरी (8.2%) स्तरों पर गिरावट आई है।
- सकल नामांकन अनुपात (GER): यह मिडिल स्तर पर 90.3% और सेकेंडरी स्तरों पर 68.5% तक सुधर गया है।
- एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार, शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में भी लगभग 38 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय स्कूली शिक्षा में व्यापक डेटा और रुझान (2022-23 से 2024-25)
