दीर्घ-स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (Persistent organic pollutants: POPs) | Current Affairs | Vision IAS
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वैज्ञानिकों को मानव बस्तियों से दूर रहने वाली नॉर्थ अटलांटिक ओर्का (किलर व्हेल) के ब्लबर में भी उच्च मात्रा में विषाक्त POPs प्राप्त हुए हैं।

दीर्घ-स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs) के बारे में

  • POPs कार्बन युक्त रासायनिक पदार्थ हैं। ये पर्यावरण में लंबे समय तक अस्तित्व में रहते हैं। इनमें पेस्टिसाइड, औद्योगिक रसायन या औद्योगिक प्रक्रियाओं के अवांछित उपोत्पाद शामिल हैं।
  • इनका आसानी से फोटोलिटिक, जैविक और रासायनिक अपघटन नहीं होता है। 
    • POPs के उदाहरण हैं- पॉलीक्लोरिनेटेड बाइफिनाइल (PCBs) आदि।

POPs के मुख्य भौतिक और रासायनिक गुण

  • ये वसा में तेजी से घुलने वाले पदार्थ होते हैं। इस वजह से ये पदार्थ प्राणियों में संचित होते रहते हैं।
  • ये अर्ध-वाष्पशील पदार्थ होते हैं। इसलिए, ये वायुमंडल में लंबी दूरी तय करने के बाद जमा हो पाते हैं।
  • POPs पर स्टॉकहोम कन्वेंशन के तहत कई रसायनों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है।

हाल ही में, हरित आवरण में वृद्धि के लिए वृक्षारोपण के पारंपरिक तरीकों के अलावा मियावाकी वृक्षारोपण जैसी कई नवीन पद्धतियां भी अपनाई जा रही हैं। 

मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति के बारे में

  • उत्पत्ति: इसे 1970 के दशक में जापानी वनस्पतिशास्त्री श्री अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। 
  • तकनीक: इस विधि में प्रति वर्ग मीटर के भीतर दो से चार प्रकार के देशज वृक्ष, झाड़ियां, ग्राउंड कवर प्लांट्स आदि रोपित किए जाते हैं। 
    • यह तकनीक छोटे भूखंडों के लिए आदर्श है और शहरी क्षेत्रों में लघु वन विकसित करने के लिए उत्तम है। 
    • इस विधि के लिए पादपों की उन प्रजातियों का चयन किया जाता हैं, जिन्हें बहुत कम रखरखाव की आवश्यकता होती है। साथ ही , जो खराब मौसम और जल की कमी की स्थिति में भी जीवित रह सकते हैं।

हाल ही में, कैलिफोर्निया के मालिबू में हुई वनाग्नि की घटना का मुख्य कारण "सांता एना" पवनों और जलवायु परिवर्तन को बताया जा रहा है।

सांता एना पवनों के बारे में 

  • उत्पत्ति: ये पवनें ग्रेट बेसिन क्षेत्र (उच्च दाब) तथा कैलिफोर्निया के तट (निम्न दाब) के मध्य दाब में भिन्नता के कारण उत्पन्न होती हैं। 
    • ग्रेट बेसिन क्षेत्र: संयुक्त राज्य अमेरिका में रॉकी पर्वत और सिएरा नेवादा के बीच का क्षेत्र। 
  • वनाग्नि से संबंध: ये पवनें जब पहाड़ों से नीचे की तरफ आती हैं, तब ये संपीडित होकर गर्म हो जाती हैं। इससे नमी में गिरावट आती है। नमी में यह गिरावट वनस्पति को शुष्क कर देती है। इससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • अवधि: सांता एना पवनें आमतौर पर अक्टूबर से जनवरी तक चलती हैं।

हाल ही में एक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने हेंडरसन सिद्धांत की व्याख्या की। 

हेंडरसन सिद्धांत के बारे में

  • उत्पत्ति: इस सिद्धांत का उल्लेख सबसे पहले हेंडरसन बनाम हेंडरसन, 1843 नामक ब्रिटिश मामले में किया गया था। 
  • परिचय: इस सिद्धांत के अनुसार किसी मामले में एक ही विषय से उत्पन्न होने वाले सभी मुद्दों को एक ही मुकदमे के तहत निपटाया जाना चाहिए। 
    • यह सिद्धांत वास्तव में उन मुद्दों पर फिर से मुकदमा चलाने से रोकता है, जिन्हें पहले की न्यायिक कार्यवाहियों में उठाया जा सकता था या उठाया जाना चाहिए था।
    • यह कोई सख्त नियम नहीं बल्कि एक लचीला सिद्धांत है। 
  • महत्त्व: 
    • इससे न्यायिक अभियोजन सद्भावनापूर्वक संचालित होता है; 
    • यह विवाद के पक्षकारों को ऐसे हथकंडे अपनाने से रोकता है, जो मुकदमेबाजी को अलग-अलग या कमजोर करते हैं।

हाल ही में SHRI कार्यक्रम के पांच साल पूरे हुए हैं। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने भारत के प्राचीन ज्ञान को समकालीन वैज्ञानिक नवाचारों के साथ मिलाने के परिवर्तनकारी प्रभावों को रेखांकित किया।

SHRI कार्यक्रम के बारे में

  • यह विविध क्षेत्रकों के विशेषज्ञों को एक साथ लाता है। इसका उद्देश्य डेटा प्राप्त और विश्लेषण करना, नए सहयोग बनाना तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु व्यवहार्य तकनीक का विकास करना है। 
  • SHRI कार्यक्रम के तहत प्रमुख पहलें: इनमें शामिल हैं- विरासत संरक्षण के लिए नॉन-इनवेसिव तकनीक, अजंता गुफाओं का डिजिटलीकरण, कलाकृतियों का जीर्णोद्धार आदि।
  • कार्यान्वयन मंत्रालय/ विभाग: भारत सरकार का विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग।

हाल ही में, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) ने "ड्रोन का उपयोग करके चेहरे की पहचान" (Face Recognition Using Drone) तकनीक विकसित करने के लिए साझेदारी की है। 

  • C-DOT, दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत कार्य करता है। 
  • सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष के दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि कार्यक्रम के तहत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

ड्रोन के जरिए चेहरे की पहचान/ का सत्यापन

  • तकनीक के बारे में: यह तकनीक लॉन्ग-रेंज कैमरा युक्त ड्रोन का उपयोग करके व्यक्ति के चेहरे का सत्यापन करती है। लॉन्ग-रेंज कैमरों को चेहरे को पहचानने, उच्च सटीकता वाली एज प्रोसेसिंग और रियल टाइम डेटा ट्रांसमिशन के लिए तैयार किया गया होता है।  
  • महत्त्व: यह तकनीक गतिमान कैमरा और चलते व्यक्ति, कम रोशनी जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटर विज़न और AI तकनीकों का लाभ उठाती है।
  • उपयोग: यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्षा, पर्यावरण निगरानी, ​​आदि में।

मिरर बैक्टीरिया ऐसे सिंथेटिक बैक्टीरिया होते हैं, जिनके निर्माण खंड उनके प्राकृतिक समकक्षों के एनैन्टीओमर होते हैं।

  • एक एनैन्टीओमर को उन दो रासायनिक रूप से समान आणविक प्रजातियों में से एक के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो एक-दूसरे की नॉन-सुपरपोज़ेबल मिरर छवियां होती हैं।

मिरर बैक्टीरिया से उत्पन्न खतरा

  • प्रतिरक्षा वंचना: ये मानव प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को बायपास कर सकते हैं। 
  • पर्यावरणीय प्रभाव: यदि मिरर बैक्टीरिया को प्राकृतिक पारिस्थितिकी-तंत्र में लाया जाता है, तो ये देशी सूक्ष्म जीवों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन आ सकता है।
  • जैव सुरक्षा जोखिम: इनका जैविक युद्ध में दुरुपयोग किया जा सकता है।
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