आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण हेतु प्रौद्योगिकी {Technology in Disaster Management & Risk Reduction (DMRR)} | Current Affairs | Vision IAS
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आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण हेतु प्रौद्योगिकी {Technology in Disaster Management & Risk Reduction (DMRR)}

30 Oct 2024
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों? 

हाल के समय में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर आधारित भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी में प्रगति का आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण हेतु प्रौद्योगिकी (DMRR) के क्षेत्र में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। 

आपदा प्रबंधन चक्र में प्रौद्योगिकी का उपयोग: 

इसका उपयोग आपदा प्रबंधन चक्र के प्रत्येक चरण में किया जा सकता है। इसमें रोकथाम से लेकर तैयारी, कार्रवाई और पुनर्बहाली तक सभी चरण शामिल हैं। 

  • रोकथाम/ शमन: प्रौद्योगिकियां आपदा शमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये पूर्वानुमान प्रणाली को बेहतर बनाकर जोखिमों को कम करने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके खतरों की संभावना वाले क्षेत्रों के मानचित्र तैयार किए जा सकते हैं।
  • तैयारी: तकनीक का उपयोग आपातकालीन योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने में किया जा सकता है। इसका उपयोग संभावित खतरों, जैसे कि मौसम के पैटर्न पर नज़र रखने के लिए भी किया जा सकता है, जो प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकते हैं।
    • आपदा पूर्वानुमान और अग्रिम चेतावनी प्रणाली: डेटा एकत्र करने और उसे प्रोसेस करने के लिए रिमोट सेंसिंग, मशीन लर्निंग (ML) और ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। आमतौर पर डिजास्टर मॉडलिंग के लिए डीप लर्निंग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग होता है। गूगल की आपदा अलर्ट प्रणाली इसका एक प्रमुख उदाहरण है। 
    • ओडिशा राज्य आपदा शमन प्राधिकरण (OSDMA): इसने हीटवेव, आकाशीय बिजली, सूखा और बाढ़ जैसे विभिन्न खतरों की निगरानी के लिए अग्रिम चेतावनी जारी करने हेतु 'सतर्क/ SATARK' नामक एक वेब पोर्टल विकसित किया है।
    • इवेंट सिमुलेशन: इसका उद्देश्य लोगों को आपदा से निपटने के लिए तैयार करना और प्रशिक्षित करना है। इवेंट सिमुलेशन के लिए मुख्य रूप से ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) जैसी तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं। उदाहरण के लिए- मोबाइल लर्निंग हब फिलीपींस।
  • प्रतिक्रिया या कार्रवाई: किसी आपात स्थिति में कार्रवाई संबंधी प्रयासों के समन्वय और प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकता है। इसका उपयोग आपदा से प्रभावित लोगों को सूचना और सहायता प्रदान करने के लिए भी किया जा सकता है।
    • आपदा का पता लगाना: आपदाओं के दौरान सूचना और संचार के साधन के रूप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं। उदाहरण के लिए- 'X' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से भूकंप जैसी आपदाओं के लिए सूचना साझा करना संभव है, जिससे तेजी से प्रतिक्रिया और राहत कार्यों में मदद मिल सकती है। 
    • आपातकालीन संचार: आपदाओं के दौरान प्रबंधन और जनता के साथ संवाद करने के लिए AI संचालित चैटबॉट काफी बेहतर साधन हो सकते हैं। उदाहरण के लिए- WHO द्वारा लॉन्च किए गए कोविड-19 चैटबॉट। 
    • खोज और बचाव अभियान: सैटेलाइट इमेजरी या सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से गंभीर रूप घायल और अन्य जरूरतमंद लोगों की पहचान की जा सकती है। उदाहरण के लिए- भूस्खलन के बाद खोज और बचाव मिशन के लिए वायनाड में ड्रोन का उपयोग किया गया।
  • पुनर्बहाली: आपदा के बाद पुनर्निर्माण प्रक्रिया में तकनीक काफी मदद कर सकती है। इसका उपयोग नुकसान का आकलन करने, पुनर्निर्माण योजनाएं तैयार करने और राहत एवं बचाव संबंधी प्रयासों के समन्वय के लिए किया जा सकता है।
    • आपदा राहत संबंधी लॉजिस्टिक्स/ संसाधनों का वितरण: 3D प्रिंटिंग का उपयोग मशीनों के लिए विशेष घटकों को बनाने के लिए किया जा रहा है। यह तकनीक आपदा के दौरान महत्वपूर्ण प्रणालियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक होती है, क्योंकि आवश्यक उपकरणों और उनके पुर्जों को तेजी से विनिर्मित किया जा सकता है। 
    • ड्रोन का उपयोग महामारी के दौरान टीकाकरण या चिकित्सा सहायता हेतु आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किया जा सकता है।

प्रोद्योकियों इस्तेमाल में विद्यमान चुनौतियां

  • तकनीकी सीमाएं: इसमें तकनीकी ज्ञान, तकनीकी अवसंरचना की कमी एवं डिजिटल डिवाइड से संबंधित सीमाएं शामिल है। ये कमियां आपदा प्रबंधन के दौरान किसी प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग को बाधित कर सकती हैं।
  • उच्च लागत: AI और ड्रोन जैसी प्रौद्योगिकियों को अपनाने एवं उन्हें संचालित करने की लागत काफी अधिक हो सकती है।
  • डेटा संबंधी अनिवार्यताएं: सफलता के स्तर को बनाए रखने में डेटा एक महत्वपूर्ण कारक होता है। इसलिए डेटा के संबंध में मुख्य आयामों, जैसे- पहुंच, गुणवत्ता, समयबद्धता और प्रासंगिकता पर विचार करना जरूरी है। 
    • जब डेटा का उपयोग रियल टाइम में निर्णय लेने के लिए किया जाता है तो ऐसे में डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक चुनौती होती है। 
  • डेटा उत्तरदायित्व और शुचिता: निजता और शुचिता संबंधी चिंताओं सहित जिम्मेदारीपूर्वक डेटा के उपयोग और संग्रहण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका कमजोर आबादी के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
  • जेंडर संबंधी आयाम: प्रौद्योगिकी तक महिलाओं की संभावित सीमित पहुंच (या पहुंच की कमी) डेटा संग्रह और संकट प्रबंधन जैसी चिंताओं को बढ़ाती है। 

आगे की राह 

  • निजी क्षेत्रक की भागीदारी: यह प्रौद्योगिकी के उपयोग में असमानता को दूर करने और प्रौद्योगिकी-सक्षम आपदा प्रबंधन में भागीदारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • डिजिटल डिवाइड को पाटना और तकनीकी क्षमता को बढ़ाना: इसके तहत आपदा प्रबंधन में शामिल कर्मियों के तकनीकी ज्ञान, कौशल और डिजिटल साक्षरता के निर्माण के लिए कौशल विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • समुदाय-आधारित निजी क्षेत्रक के नेटवर्क को मजबूत बनाना: भावी अनुसंधान और प्रोत्साहन समुदाय-आधारित निजी क्षेत्रक के नेटवर्क को सशक्त बना सकते हैं। इससे आपदाओं के दौरान अपने समुदायों को अधिक प्रभावी ढंग से समर्थन दिया जा सकेगा और वैश्विक स्तर पर रिजिलिएंस और तैयारी में सुधार होगा। 

संबंधित सुर्खियां: पैरामीट्रिक बीमा 

  • नागालैंड ने SBI जनरल इंश्योरेंस के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। इस हस्ताक्षर के साथ नागालैंड आपदा जोखिम स्थानांतरण पैरामीट्रिक बीमा समाधान (DRTPS) को अपनाने वाला पहला राज्य बन गया है। 
  • पैरामीट्रिक बीमा (Parametric Insurance) के बारे में:
    • यह एक ऐसा बीमा है जो वास्तविक नुकसान की भरपाई करने की बजाय, नुकसान पहुंचाने वाली किसी निर्धारित घटना (जैसे- भूकंप, बाढ़, सूखा) के घटित होने पर बीमाधारक को सीधे भुगतान करता है। इसमें घटना के घटित होने की संभावना को कवर किया जाता है, न कि वास्तविक क्षति का मूल्यांकन या सत्यापन।
      • यह एक ऐसा समझौता है जो कवर की गई घटना की पूर्व-निर्धारित तीव्रता सीमा (जैसे- वर्षा की मात्रा, भूकंप की तीव्रता सीमा) पर पहुंचने या उससे अधिक होने पर पूर्व-निर्धारित भुगतान प्रदान करता है। इस बीमा में, घटना की तीव्रता की माप किसी वस्तुनिष्ठ मान (जैसे- वर्षा की मात्रा, भूकंप की तीव्रता) के आधार पर किया जाता है। इसीलिए इसे 'पैरामेट्रिक बीमा' कहा जाता है। यह बीमा घटना की तीव्रता पर आधारित होता है, न कि वास्तविक क्षति पर। इसके कारण दावा प्रक्रिया सरल और तेज हो जाती है, जैसे कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7 होने पर संभावित नुकसान का  बीमा कवर।  
    • इसके तहत कवर की गई घटनाएं: इसमें भूकंप, उष्णकटिबंधीय चक्रवात या बाढ़ जैसी आपदाएं शामिल हो सकती हैं, जहां पैरामीटर या सूचकांक क्रमशः रिक्टर स्केल पर प्रबलता, वायु गति या पानी की गहराई है।
  • पारंपरिक बीमा और पैरामीट्रिक बीमा के बीच अंतर 
    • पारंपरिक बीमा: इसका उपयोग स्वयं के स्वामित्व वाली भौतिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा होता है। 
      • किसी घटना के बाद पॉलिसी की शर्तों और नियमों के तहत वास्तविक नुकसान के आधार पर भुगतान किया जाता है।
    • पैरामीट्रिक बीमा: इसमें भुगतान उस घटना से जुड़ा होता है जो हानि उत्पन्न कर सकती है, न कि वास्तविक हानि के मूल्यांकन से। इसका अर्थ यह है कि भुगतान पूर्व निर्धारित पैरामीटर या घटना की तीव्रता के आधार पर किया जाता है। इस कारण से कवरेज का दायरा व्यापक हो जाता है।
      • इसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं (जैसे- तूफान, बाढ़, सूखा) के लिए कवरेज की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, जो बीमाधारक के लिए प्रमुख चिंता का विषय होती है। यह बीमा उत्पाद बीमाधारक को उन घटनाओं के लिए सुरक्षा कवर प्रदान करता है, जिनसे नुकसान का सटीक आकलन करना मुश्किल होता है।
  • पैरामीट्रिक बीमा के लाभ:
    • शीघ्र भुगतान की व्यवस्था: इसमें घटना से हुए वास्तविक नुकसान के आकलन की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि घटना के निश्चित पैरामीटर पर पहुंचने पर ही पूर्व निर्धारित राशि का भुगतान कर दिया जाता है। शीघ्र भुगतान से पॉलिसीधारकों को नुकसान से उबरने के लिए अपनी सेविंग्स या ऋण का सहारा लेने से बचाया जा सकता है।
    • निश्चितता की भावना: पॉलिसी धारक को प्राप्त होने वाली राशि का अनुमान लगाना सरल होता है।
    • पारदर्शिता: इसके तहत प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ा डेटा बीमाकर्ता और पॉलिसीधारक दोनों के लिए समान रूप से उपलब्ध होता है, तो इससे अस्पष्टता और गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है।
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