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भौतिकी में 2024 का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize In Physics 2024)

30 Nov 2024
32 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

भौतिकी में 2024 का नोबेल पुरस्कार जॉन हॉपफील्ड और जेफ्री हिंटन को संयुक्त रूप से दिया गया है। यह पुरस्कार उन्हें उन विधियों के निर्माण के लिए दिया गया है, जिन्होंने आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स (ANNs) का उपयोग करके मशीन लर्निंग (ML) की आधारशिला रखने में मदद की थी। 

वे प्रमुख खोज जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया 

  • जॉन हॉपफील्ड ने हॉपफील्ड नेटवर्क का आविष्कार किया है। यह एक प्रकार का रिकरेन्ट न्यूरल नेटवर्क (Recurrent Neural Network) है, जो सूचना को स्टोर और पुनर्निर्मित कर सकता है।
    • ये नेटवर्क्स एक मेमोरी सिस्टम की तरह काम करते हैं, जहां वे पैटर्न्स (जैसे- इमेज) को स्टोर/ संग्रहित और उन्हें पुनर्निर्मित कर सकते हैं।
    • हॉपफील्ड नेटवर्क डोनाल्ड हेब्ब की परिकल्पना पर आधारित है। हेब्ब का मानना था कि जब न्यूरॉन्स एक साथ सक्रिय होते हैं, तो वे सूचना को प्रॉसेस और स्टोर करने के लिए नेटवर्क की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
    • हॉपफील्ड नेटवर्क का उपयोग इमेज रिकॉग्निशन और डेटा पुनर्निर्माण जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है, जो उन्हें मशीन लर्निंग में विभिन्न उपयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।
  • जेफ्री हिंटन ने बोल्ट्जमैन मशीन नामक विधि का आविष्कार किया था। यह स्वतंत्र रूप से डेटा में गुणों की खोज कर सकती है। इसलिए बोल्ट्ज़मैन मशीन अब उपयोग में आने वाले लार्ज AANs के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
    • बोल्ट्जमैन मशीन जेनरेटिव मॉडल का एक प्रारंभिक उदाहरण है, जो अपनी लर्निंग के आधार पर नए पैटर्न्स या उदाहरण बना सकता है। 
      • प्रशिक्षित बोल्ट्जमैन मशीन पहले से परिचित लक्षणों या विशेषताओं को किसी नए डेटा में भी पहचान सकती है।

आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स (ANNs) के बारे में

  • परिभाषा: आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क एक प्रकार का मशीन लर्निंग (ML) प्रोग्राम या मॉडल है, जो मानव मस्तिष्क से प्रेरित होता है। इसके लिए यह जैविक न्यूरॉन्स के एक साथ काम करने के तरीके की नकल करते हुए घटनाओं को समझकर मौजूद विकल्पों के आधार पर बेहतर निष्कर्ष प्रदान करता है। 
  • कार्यप्रणाली: इसमें मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की नकल करने का प्रयास किया गया है।
    • मानव मस्तिष्क कोशिकाएं (या न्यूरॉन्स) एक जटिल और परस्पर मजबूती से जुड़े हुए नेटवर्क का निर्माण करती हैं। यह मनुष्यों को किसी जानकारी को प्रॉसेस करने में मदद करने के लिए एक-दूसरे को विद्युत संकेत भेजती हैं।
    • इसी प्रकार, आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स भी कृत्रिम न्यूरॉन्स या नोड्स से बने होते हैं, जो किसी कार्य को पूरा करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
  • ANN संरचना: प्रत्येक न्यूरल नेटवर्क में कृत्रिम न्यूरॉन्स की तीन परतें (लेयर्स) होती हैं, जो आपस में कनेक्टेड होती हैं। ये हैं:
    • इनपुट लेयर: डेटा को प्रॉसेस करना, उसका विश्लेषण या वर्गीकरण करना, और उसे अगली लेयर तक भेजना।
    • हिडन लेयर: इनपुट लेयर से प्राप्त आउटपुट का विश्लेषण करना, उसे और प्रॉसेस करना तथा अगली लेयर तक भेजना। 
      • ANNs में प्रत्येक लेयर के साथ काफी संख्या में हिडन लेयर्स हो सकती हैं।
    • आउटपुट लेयर: यह ANN द्वारा प्रॉसेस किए गए सभी डेटा के आधार पर अंतिम परिणाम प्रदान करती है।
  • ANN के प्रमुख प्रकार: 
    • डीप न्यूरल नेटवर्क: ये ऐसे न्यूरल नेटवर्क हैं जिनमें कई परतें (लेयर्स) होती हैं। प्रत्येक परत पिछली परत के आधार पर काम करती है ताकि प्रेडिक्शन या वर्गीकरण को और अधिक परिष्कृत एवं इष्टतम किया जा सके।
    • कन्वेन्शनल न्यूरल नेटवर्क (CNNs): इनका उपयोग मुख्य रूप से कंप्यूटर विज़न और इमेज वर्गीकरण में किया जाता है। 
      • ये इमेज और वीडियो में से किसी लक्षण और पैटर्न का पता लगा सकते हैं। इस प्रकार, इनकी मदद से ऑब्जेक्ट डिटेक्शन, इमेज रिकॉग्निशन, पैटर्न रिकॉग्निशन और फेस रिकॉग्निशन जैसे कार्य संभव हो जाते हैं।
    • रिकरेन्ट न्यूरल नेटवर्क (RNNs): इसे अनुक्रमिक डेटा (Sequential data) को प्रॉसेस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो एक विशेष क्रम में या समय के साथ बदलता है। अतः आमतौर पर नेचुरल लैंग्वेज प्रॉसेसिंग और स्पीच रिकॉग्निशन में इसका उपयोग किया जाता है।
      • इनका उपयोग शेयर बाजार संबंधी प्रेडिक्शन, इमेज कैप्शनिंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रॉसेसिंग आदि में किया जाता है। 
    • जेनरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क (GAN): यह एक प्रकार का मशीन लर्निंग मॉडल है, जिसे नया और कृत्रिम (Synthetic) डेटा उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है। यह उत्पन्न डेटा उस मूल डेटा के समान होता है, जिस पर GANs को प्रशिक्षण दिया गया है। 
      • इनमें मानवीय चेहरे जैसी प्रतीत होने वाली इमेज शामिल हो सकती हैं। हालांकि ये इमेज किसी वास्तविक व्यक्ति की नहीं होती है, बल्कि कृत्रिम रूप से जनरेट होती हैं।

मशीन लर्निंग (ML)

  • मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक भाग है, जो डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करके AI को मानव की तरह सीखने की क्षमता प्रदान करता है और समय के साथ अपनी सटीकता में सुधार करता है।
  • मशीन लर्निंग में कंप्यूटर उदाहरण के द्वारा सीखता है। इससे वह उन समस्याओं को हल करने में सक्षम हो जाता है जो बहुत अस्पष्ट और जटिल होती हैं, जिन्हें चरण-दर-चरण निर्देशों के द्वारा प्रबंधित नहीं किया जा सकता।
    • इसका एक उदाहरण- किसी तस्वीर की व्याख्या करना और उसमें मौजूद लक्षणों की पहचान करना।
  • कार्यप्रणाली: मशीन लर्निंग (ML) में, एल्गोरिदम को विशिष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए डेटा के विशाल सेट पर प्रशिक्षित किया जाता है। यह प्रशिक्षण उन्हें पैटर्न पहचानने या वस्तुओं की पहचान करने जैसी जटिल कार्य करने में सक्षम बनाता है।
    • न्यूरल नेटवर्क या आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स (ANNs) वस्तुतः मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के विशिष्ट प्रकार होते हैं। 
    • मशीन लर्निंग का उपयोग: 
      • अनुसंधान एवं वैज्ञानिक उन्नति: हिग्स पार्टिकल की खोज और एक्सोप्लैनेट की खोज में सहायक।
      • नेचुरल लैंग्वेज प्रॉसेसिंग (NLP): ऑटोमेटिक स्पीच रिकॉग्निशन या स्पीच-टू-टेक्स्ट या जेनरेटिव AI में उपयोगी। 
      • कंप्यूटर विज़न: इमेज, वीडियो जैसे डिजिटल विजुअल इनपुट से सार्थक जानकारी प्राप्त करने में उपयोगी।
    • इससे संबंधित चुनौतियां और नैतिक मुद्दे: 
      • व्याख्यात्मकता (Explainability): मॉडल स्पष्ट नियमों के बजाय डेटा सेट के उदाहरणों से सीखते हैं, इसलिए उनके निर्णय लेने के कारणों को समझना अक्सर मुश्किल होता है।
      • सुपरइंटेलिजेंस: यहाँ जवाबदेही और जिम्मेदारी से संबंधित प्रश्न उठाया जाता है। उदाहरण के लिए, सेल्फ-ड्राइविंग कार के दुर्घटनाग्रस्त होने पर किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
      • पूर्वाग्रह और भेदभाव: मशीनों को मनुष्यों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, जिसके कारण मानवीय पूर्वाग्रह एल्गोरिदम में शामिल हो सकते हैं। अतः प्राप्त परिणाम में भेदभाव कायम रहने की संभावना हो सकती है।
      • अन्य: इसमें निजता और विनियमन संबंधी चिंताएं, दुरुपयोग आदि शामिल हैं।
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