आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा (AI And Defence) | Current Affairs | Vision IAS
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा (AI And Defence)

30 Nov 2024
40 min

सुर्ख़ियों में क्यों? 

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इवैल्युएटिंग ट्रस्टवर्दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ETAI) फ्रेमवर्क और दिशा-निर्देशों का शुभारंभ किया है।

इवैल्युएटिंग ट्रस्टवर्दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ETAI) फ्रेमवर्क के बारे में

  • ETAI जोखिम-आधारित एक मूल्यांकन फ्रेमवर्क है। इसे महत्वपूर्ण रक्षा अभियानों में भरोसेमंद AI तकनीक को शामिल करने के लिए विकसित किया गया है।
  • इस फ्रेमवर्क में भरोसेमंद AI के मूल्यांकन के लिए मानदंडों के एक व्यापक सेट को परिभाषित किया गया है। इसके अलावा, यह भरोसेमंद AI के निर्माण और मूल्यांकन के लिए एक सुनियोजित एप्रोच भी प्रदान करता है।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा के बारे में

  • AI सिस्टम का उपयोग रक्षा क्षेत्रक में दो तरीकों यानी सहायक कार्य और आक्रामक कार्य प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में किया जा रहा है:
    • सहायक कार्य: जैसेखुफिया, निगरानी, ​​नेविगेशन और एडवांस कमांड और कंट्रोल (C2) क्षमता।
    • आक्रामक कार्य: जैसे- लक्ष्य का चयन करना और ड्रोन स्वार्म्स, AI-संचालित हैकिंग जैसे हमले करना।
  • AI के पास साइबर हमलों के पैटर्न का अध्ययन करने और मैलवेयर हमले के खिलाफ सुरक्षात्मक रणनीति बनाने का कौशल भी है।

रक्षा और सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं में AI के उपयोग का महत्त्व

  • स्वायत्त हथियार और लोइटरिंग (Loitering) हथियार प्रणाली: यह प्रणाली स्वायत्त रूप से लक्ष्यों की खोज करने, उनकी पहचान करने और उन पर हमला करने में सक्षम है। इसकी मदद से शीघ्र एवं अधिक सटीकता से हमले किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए- इजराइली हार्पी और हारोप ड्रोन।
  • लक्ष्य पहचान और सटीकता में वृद्धि: AI प्रणालियां नागरिक अवसंरचनाओं से बचते हुए विशिष्ट सैन्य लक्ष्यों की पहचान करने एवं उन पर हमला करने में सक्षम हैं।
    • उदाहरण के लिए, रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल किए गए ईरान द्वारा निर्मित शाहेद-136 AI ड्रोन।
  • रियल टाइम डेटा विश्लेषण: AI निगरानी प्रणालियों से प्राप्त बड़ी मात्रा में डेटा को रियल टाइम में प्रोसेस करके युद्ध-क्षेत्र में निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी प्रदान करने में सहायक है।
    • उदाहरण के लिए- अमेरिकी पहल प्रोजेक्ट मावेन के तहत बड़ी मात्रा में निगरानी डेटा का विश्लेषण किया जाता है।
  • वॉर सिमुलेशन और प्रशिक्षण: जनरेटिव AI नई प्रशिक्षण सामग्री तैयार करके सैन्य प्रशिक्षण और शैक्षिक कार्यक्रमों में सुधार कर सकता है। उदाहरण के लिए- सुखोई 30 MKl विमान के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल।
  • अपराधों का पूर्वानुमान और अपराधियों पर नज़र रखना: AI प्रणालियां कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस, सर्विलांस तथा रिकॉन्सेन्स (C4ISR) प्रणालियों का उपयोग करके अपराध होने की संभावना का पूर्वानुमान लगाने एवं अपराधियों की निगरानी करने में मददगार हैं।
    • उदाहरण के लिए- BEL ने एडवर्सरी नेटवर्क एनालिसिस टूल (ANANT) विकसित किया है। यह हमलों की भविष्यवाणी करने में मदद करता है। 
  • साइबर हमलों से सुरक्षा: AI तकनीक संभावित खतरों का पता लगा सकती है और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके भविष्य में होने वाले हमलों का पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण कर सकती है।
    • उदाहरण के लिए- इंडियन आर्मी द्वारा विकसित प्रोजेक्ट सीकर एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य सेना की विभिन्न इकाइयों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करना है।

रक्षा क्षेत्रक में AI के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं

  • गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा उपयोग: अपराधी और आतंकवादी योजनाबद्ध
  •  हमलों के लिए जनरेटिव AI मॉडल का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए- इस्लामिक स्टेट ने जनरेटिव AI टूल का उपयोग करने के लिए एक गाइड जारी किया है। 
  • सोशल इंजीनियरिंग: AI सोशल मीडिया एल्गोरिदम में हेर-फेर करके लक्षित समूहों को कट्टरपंथ को अपनाने के लिए प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए- टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर AI द्वारा निर्मित नव-नाजी कंटेंट शेयर करना।
  • नए मैलवेयर का निर्माण: AI के पास मैलवेयर (या दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर) की कोडिंग करने की क्षमता है, इसलिए आतंकवादियों या कट्टरपंथियों द्वारा AI का उपयोग इसे और खतरनाक बना सकता है।
    • उदाहरण के लिए- ब्लैकमांबा AI द्वारा उत्पन्न एक मैलवेयर है, जो अधिकांश मौजूदा एंडपॉइंट डिटेक्शन और रिस्पॉन्स (EDR) प्रणालियों को चकमा दे सकता है।
  • नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकार उल्लंघन पर इसकी सीमाओं की जांच करने के लिए कोई विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय कानून नहीं है।
  • निगरानी संबंधी कार्यों में AI के उपयोग से  गोपनीयता के उल्लंघन की चिंता: उदाहरण के लिए- चीन द्वारा अपने झिंजियांग प्रांत में फेशियल रिकग्निशन सर्विलांस सिस्टम का उपयोग करके उइगर मुसलमानों की निगरानी का कार्य किया जा रहा है, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।

नैतिक चिंताएं:  

  • स्वचालन पूर्वाग्रह: AI से जुड़ी स्वचालन प्रणालियां कई बार टारगेट और नागरिक लक्ष्यों के बीच अंतर नहीं कर पाती हैं, जिससे डेटा की कमी के कारण संभावित अप्रत्याशित हमले हो सकते हैं।
  • आनुपातिकता का सिद्धांत: इन प्रणालियों को यह निर्धारित करने के लिए गुणात्मक विश्लेषण की आवश्यकता होगी कि टारगेट के विरुद्ध किया गया हमला आनुपातिक माना जाएगा या नहीं।
  • स्वायत्त प्रणाली का अनुमान: यदि ऑपरेटर AI हथियार प्रणाली सिस्टम की समझ के अभाव में हथियार का नियंत्रण खो देता है, तो यह अंतर्राष्ट्रीय मानवीय नियमों के खिलाफ होगा।
  • मानव लक्ष्यों का वस्तुकरण: AI-सक्षम हथियार बहुत तेजी से निर्णय ले सकते हैं और हमले कर सकते हैं। साथ ही, ये अपने टार्गेट को केवल एक लक्ष्य के रूप में देखते हैं, न कि एक मानवीय दृष्टि से। ऐसे में, इन हथियारों के इस्तेमाल से आम नागरिकों सहित गैर-लड़ाकू लोगों को होने वाली क्षति की संभावना बढ़ जाती है।

रक्षा क्षेत्रक में AI को अपनाने के लिए भारत द्वारा की गई पहलें 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस टास्क फोर्स के लिए AI का रणनीतिक कार्यान्वयन: सी. चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य AI-आधारित हथियार प्रणालियों को मजबूत करना था।
    • इसकी सिफारिशों के आधार पर, 2019 में डिफेंस AI काउंसिल (DAIC) और डिफेंस AI प्रोजेक्ट एजेंसी (DAIPA) की स्थापना की गई।
  • 75 नई विकसित AI प्रौद्योगिकियों का शुभारंभ: रक्षा मंत्री ने जुलाई, 2024 में पहली बार आयोजित "AI इन डिफेंस' (AIDEF)" संगोष्ठी के दौरान AI प्रौद्योगिकियों का शुभारंभ किया।

रक्षा क्षेत्रक में AI को विनियमित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदम

  • यू.एन कन्वेंशन ऑन सर्टेन कंवेंशनल वेपंस (CCW) के तहत सरकारी विशेषज्ञों का समूह: इस समूह का गठन 2016 में किया गया था। इसका उद्देश्य AI सहित घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।
  • 2023 में संयुक्त राष्ट्र ने घातक स्वायत्त हथियारों पर नए प्रस्ताव को मंजूरी दी और सुझाव दिया कि हत्या से संबंधित निर्णयों पर एल्गोरिदम का पूर्ण नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान (UNIDIR) ने अक्टूबर, 2024 में सुरक्षा और डिफेंस में AI पर राष्ट्रीय रणनीतियों के विकास के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
  • अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC): इसने AI आधारित स्वायत्त हथियार प्रणालियों के विकास और उपयोग के लिए मानदंडों व नियमों के एक व्यापक एवं बाध्यकारी सेट का समर्थन किया है।

 

आगे की राह

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए:

  • इंटेलिजेंस सर्विलांस और रिकॉनसेंस (ISR): इंडियन आर्मी को AI क्षेत्र में कार्यरत भारत के निजी क्षेत्रक के साथ सहयोग स्थापित करने की जरूरत है, जैसा कि अमेरिका और चीन कर रहे हैं।
  • साइबर युद्ध की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का विकास: साइबर युद्ध के बढ़ते खतरे के मद्देनजर, साइबर सुरक्षा और जवाबी हमलों की क्षमताएं विकसित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

अंतर्राष्ट्रीय विनियमन के लिए:

  • अंतर्राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता: लक्ष्यों के प्रकार, भौगोलिक दायरे और संचालन के संदर्भ में नियमों को संहिताबद्ध करने की आवश्यकता है।
  • AI पर हथियार नियंत्रण व्यवस्था: राज्य और क्षेत्रीय संगठन AI हथियार प्रणालियों और उद्योगों को हथियार नियंत्रण व्यवस्था के अधीन लाने का प्रयास कर सकते हैं।
  • AI के सैन्य उपयोग के लिए जिम्मेदार सिद्धांतों की पहचान करना: सहयोगी बहुपक्षीय प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसे सिद्धांतों को आधिकारिक दस्तावेजों में संहिताबद्ध करना चाहिए।
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