भारत में वित्तीय समावेशन (FINANCIAL INCLUSION IN INDIA) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

भारत में वित्तीय समावेशन (FINANCIAL INCLUSION IN INDIA)

28 Jan 2026
1 min

In Summary

  • आरबीआई ने वित्तीय सेवाओं की अंतिम-मील पहुंच और उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति (एनएसएफआई) 2025-30 की शुरुआत की।
  • एनएसएफआई 2025-30 के पांच रणनीतिक उद्देश्य हैं, जिनमें समान वित्तीय सेवाएं, लिंग-संवेदनशील दृष्टिकोण और वित्तीय शिक्षा का लाभ उठाना शामिल हैं।
  • पीएमजेडीवाई और यूपीआई जैसी सरकारी पहलों के बावजूद, प्रमुख चुनौतियों में निष्क्रिय खाते, लिंग और शहरी-ग्रामीण विभाजन और कम वित्तीय साक्षरता शामिल हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 'राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति (NSFI) 2025–30' जारी की है। इस पांच वर्षीय योजना का उद्देश्य भारत में वित्तीय समावेशन को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाना है। 

वित्तीय समावेशन के बारे में 

  • परिभाषा: वित्तीय समावेशन वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से समाज के कमज़ोर और निम्न-आय वर्गों को वहनीय लागत पर वित्तीय सेवाओं तक पहुँच तथा समयबद्ध और पर्याप्त ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। 
  • वर्तमान स्थिति: 
    • वित्तीय समावेशन सूचकांक (FII): RBI का वित्तीय समावेशन सूचकांक निरंतर वृद्धि के साथ वर्ष 2025 में 67.0 हो गया है। 
      • इस सूचकांक की शुरुआत 2021 में की गई थी। यह देश में बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन जैसे क्षेत्रकों में वित्तीय समावेशन की स्थिति को दर्शाता है।
    • बैंक खाताधारक: विश्व बैंक के ग्लोबल फिन्डेक्स 2025 के अनुसार, भारत में बैंक खाताधारक अनुपात 2024 में 89% तक पहुँच गया। यह 2011 में 35% था। 
    • बैंकिंग अवसंरचना:: प्रति लाख जनसंख्या पर फिक्स्ड प्वाइंट बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (FBCs) यानी बैंक मित्र की संख्या 2019 में 30.1 बढ़कर 2024 में 85.6 हो गई। 
    • डिजिटल लेन-देन: RBI का डिजिटल भुगतान सूचकांक (RBI-Digital Payments Index: RBI-DPI) मार्च 2019 में 153.47 था जो बढ़कर मार्च 2025 में 493.22 हो गया।
      • RBI-DPI की शुरुआत जनवरी 2021 में की गई थी। इसमें मार्च 2018 को आधार वर्ष (100) माना गया है। इसका उद्देश्य देश में डिजिटल भुगतान के स्तर को मापना है। 

राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति (NSFI) 2025–30

  • शुरुआत: यह रणनीति राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति 2019–2024 के दौरान प्राप्त की गई प्रगति और उपलब्धियों पर आधारित है। NSFI 2019–2024 को 2020 में जारी किया गया था।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य बल अंतिम व्यक्ति या सभी क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और उनके उपयोग को बेहतर बनाना है। इसमें पांच रणनीतिक उद्देश्यों को शामिल किया गया है, जिन्हें "पंच-ज्योति" कहा गया है। 

NSFI 2025-30 के तहत रणनीतिक उद्देश्य और कार्य-बिंदु

रणनीतिक उद्देश्य

मुख्य कार्य-बिंदु

परिवारों और सूक्ष्म उद्यमों के लिए वित्तीय सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु, समान, जिम्मेदार, उपयुक्त और वहनीय वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और उपयोग में सुधार करना।

  • बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स अर्थात बैंक मित्र के नेटवर्क को मजबूत करना। 
  • डिजिटल माध्यम से वित्तीय सेवाओं का विस्तार: डिजिटल भुगतान के माध्यम से एक अरब उपयोगकर्ताओं तक पहुँचना, सभी बैंकों और बीमा कंपनियों को जनसुरक्षा पोर्टल से जोड़ना।
  • नए समाधानों के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों को सहायता उपलब्ध कराना।

महिला नेतृत्व वाले वित्तीय समावेशन के लिए महिला अनुकूल दृष्टिकोण अपनाना तथा विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों के लिए, परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाना।

  • महिला बैंक मित्रों की संख्या बढ़ाना। 
  • लक्षित सेवाओं के लिए वंचित/अल्प सेवा प्राप्त वर्गों की पहचान करना तथा उनके लिए अलग-अलग वित्तीय उत्पाद और उपयुक्त सेवा वितरण माध्यम उपलब्ध कराना। 

आजीविका, कौशल विकास और सहायता व्यवस्था को आपस में जोड़ना तथा उनके वित्तीय समावेशन के साथ संबंधों को मजबूत करना।

  • क्रेडिट और बाजार से जुड़ी कमियों को दूर करने तथा जनसांख्यिकीय व भौगोलिक असमानताओं को कम करने के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब और स्थानीय सामुदायिक संगठनों का उपयोग करना। 

वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय शिक्षा को एक प्रभावी साधन के रूप में उपयोग करना।

  • लक्षित वित्तीय साक्षरता पहलों को निरंतर जारी रखना और उन्हें और मजबूत बनाना।
  • वहनीय ऋण व्यवहार को बढ़ावा देना और अत्यधिक ऋणग्रस्तता से बचाव करना।
  • बैंकिंग और वित्त से जुड़े सामान्य सवालों के समाधान हेतु AI और ML आधारित सार्वजनिक समाधान प्रणालियों का विकास करना। 

ग्राहक के संरक्षण तथा शिकायत निवारण उपायों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाना।

  • साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (Citizen Financial Cyber Frauds Reporting and Management System: CFCFRMS) का प्रभावी उपयोग करना।
  •  डार्क पैटर्न्स से उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना तथा तकनीकी नवाचारों के लिए उचित सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना।

 

वित्तीय समावेशन के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम   

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): यह एक प्रमुख (फ्लैगशिप) वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम बुनियादी बचत और जमा खातों, विप्रेषण (रेमिटेंस), ऋण, बीमा और पेंशन सेवाओं तक वहनीय दर पर पहुँच प्रदान करता है।
    • 2025 तक, 56 करोड़ से अधिक जन धन बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 55 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के नाम हैं।
  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): भारत में होने वाले सभी डिजिटल लेन-देन में UPI की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है और यह विश्व के लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान को संचालित करता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): यह विनिर्माण, व्यापार या सेवा क्षेत्रकों में लगे आय-सर्जक लघु और सूक्ष्म उद्यमों को ₹20 लाख तक के ऋण की सुविधा प्रदान करता है।
    • पिछले दशक में, मुद्रा योजना के तहत ₹35.13 लाख करोड़ की राशि के 53 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
  • सभी के लिए बीमा और पेंशन: वर्ष 2015 में शुरू की गई तीन  'जन सुरक्षा' योजनाओं ने बहुत कम प्रीमियम पर निर्धन वर्ग को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। ये योजनाएं हैं; जीवन बीमा के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), दुर्घटना बीमा के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), और वृद्धावस्था में आय सुरक्षा के लिए अटल पेंशन योजना (APY)
  • बैंकिंग अवसंरचना और नवाचार: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भौतिक शाखाओं और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल, दोनों के माध्यम से बैंकिंग आउटलेट्स के विस्तार की सुविधा प्रदान की है।
    • उपर्युक्त के अतिरिक्त, RBI ने पेमेंट्स बैंक और लघु विकास बैंक जैसे बैंकों की नई श्रेणियां बनाई हैं, जिनका उद्देश्य कम आय वाले और ग्रामीण ग्राहकों को विशिष्ट बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है।

भारत की वित्तीय समावेशन विकास यात्रा में प्रमुख चुनौतियां

  • निष्क्रिय बैंक खाते: एक अनुमान के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 23% प्रधानमंत्री जन धन योजना खातों में कोई लेनदेन नहीं हुआ है। यह अन्य विकासशील देशों में देखी जाने वाली 3-4% की निष्क्रियता दर से कहीं अधिक है।
    • ग्लोबल फिन्डेक्स सर्वे के अनुसार, इसके मुख्य कारणों में बैंक का अधिक दूरी पर होना, विश्वास कम होना और खातों का उपयोग न करना है। 28% निष्क्रिय खाताधारकों के मामले में बैंक बहुत दूर हैं, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में।
  • लैंगिक अंतराल और सामाजिक बाधाएं: जन धन खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 56% है, किंतु उनमें से केवल 28% ही सक्रिय रूप से डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा लगभग 41% है।
    • महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों को औपचारिक ऋण प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है। केवल लगभग 10% को ही संस्थागत स्रोतों अर्थात बैंकों से ऋण प्राप्त होता है। इसका मुख्य कारण संपार्श्विक (कोलैटरल) के लिए संपत्ति का नहीं होना और पूर्वाग्रह हैं।
  • शहरी-ग्रामीण विभाजन: शहरों के लगभग 59% वयस्क UPI या डेबिट-क्रेडिट कार्ड जैसे माध्यमों का उपयोग करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात केवल 14 से 27% है।
    • कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, अनियमित विद्युत आपूर्ति और स्मार्टफोन की कम पहुंच डिजिटल बैंकिंग के मार्ग में बाधा बनती है।
  • निम्न वित्तीय साक्षरता और जागरूकता: एक बुनियादी चुनौती यह है कि वित्तीय साक्षरता का स्तर अभी भी काफी कम है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, केवल लगभग 27% भारतीय वयस्क ही वित्तीय रूप से साक्षर हैं।  

निष्कर्ष 

वित्तीय समावेशन के विस्तार के लिए वित्तीय साक्षरता को मजबूत करना, अंतिम व्यक्ति तक पहुँच के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना तथा वंचित वर्गों के लिए आवश्यकता - आधारित वित्तीय उत्पादों की शुरुआत करना आवश्यक है। इसके साथ ही, नवोन्मेषी डिजिटल ऋण व्यवस्था और ऋण चुकाने की क्षमता के मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था से कम ऋण राशि वाले लोगों की वित्तीय समस्याओं को दूर किया जा सकता है। ये सभी उपाय सम्मिलित रूप से न केवल वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे बल्कि सार्थक और समावेशी वित्तीय भागीदारी भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

AI और ML आधारित सार्वजनिक समाधान प्रणाली

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करके विकसित की गई प्रणालियाँ जो बैंकिंग और वित्त से संबंधित सामान्य प्रश्नों का समाधान प्रदान कर सकती हैं।

वित्तीय साक्षरता

व्यक्तियों की वित्तीय जानकारी को समझने, प्रबंधित करने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता, जो उन्हें सूचित वित्तीय निर्णय लेने में मदद करती है।

डार्क पैटर्न्स

डिजाइन या मार्केटिंग की ऐसी तकनीकें जिनका उपयोग उपभोक्ताओं को अनजाने में या बलपूर्वक कुछ करने के लिए किया जाता है, जैसे कि अनचाहे सब्सक्रिप्शन या अतिरिक्त शुल्क लेना।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet