सुर्ख़ियों में क्यों?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 'राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति (NSFI) 2025–30' जारी की है। इस पांच वर्षीय योजना का उद्देश्य भारत में वित्तीय समावेशन को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाना है।
वित्तीय समावेशन के बारे में
- परिभाषा: वित्तीय समावेशन वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से समाज के कमज़ोर और निम्न-आय वर्गों को वहनीय लागत पर वित्तीय सेवाओं तक पहुँच तथा समयबद्ध और पर्याप्त ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।
- वर्तमान स्थिति:
- वित्तीय समावेशन सूचकांक (FII): RBI का वित्तीय समावेशन सूचकांक निरंतर वृद्धि के साथ वर्ष 2025 में 67.0 हो गया है।
- इस सूचकांक की शुरुआत 2021 में की गई थी। यह देश में बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन जैसे क्षेत्रकों में वित्तीय समावेशन की स्थिति को दर्शाता है।
- बैंक खाताधारक: विश्व बैंक के ग्लोबल फिन्डेक्स 2025 के अनुसार, भारत में बैंक खाताधारक अनुपात 2024 में 89% तक पहुँच गया। यह 2011 में 35% था।
- बैंकिंग अवसंरचना:: प्रति लाख जनसंख्या पर फिक्स्ड प्वाइंट बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (FBCs) यानी बैंक मित्र की संख्या 2019 में 30.1 बढ़कर 2024 में 85.6 हो गई।
- डिजिटल लेन-देन: RBI का डिजिटल भुगतान सूचकांक (RBI-Digital Payments Index: RBI-DPI) मार्च 2019 में 153.47 था जो बढ़कर मार्च 2025 में 493.22 हो गया।
- RBI-DPI की शुरुआत जनवरी 2021 में की गई थी। इसमें मार्च 2018 को आधार वर्ष (100) माना गया है। इसका उद्देश्य देश में डिजिटल भुगतान के स्तर को मापना है।
- वित्तीय समावेशन सूचकांक (FII): RBI का वित्तीय समावेशन सूचकांक निरंतर वृद्धि के साथ वर्ष 2025 में 67.0 हो गया है।
राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति (NSFI) 2025–30
- शुरुआत: यह रणनीति राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति 2019–2024 के दौरान प्राप्त की गई प्रगति और उपलब्धियों पर आधारित है। NSFI 2019–2024 को 2020 में जारी किया गया था।
- उद्देश्य: इसका मुख्य बल अंतिम व्यक्ति या सभी क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और उनके उपयोग को बेहतर बनाना है। इसमें पांच रणनीतिक उद्देश्यों को शामिल किया गया है, जिन्हें "पंच-ज्योति" कहा गया है।
NSFI 2025-30 के तहत रणनीतिक उद्देश्य और कार्य-बिंदु | |
रणनीतिक उद्देश्य | मुख्य कार्य-बिंदु |
परिवारों और सूक्ष्म उद्यमों के लिए वित्तीय सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु, समान, जिम्मेदार, उपयुक्त और वहनीय वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और उपयोग में सुधार करना। |
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महिला नेतृत्व वाले वित्तीय समावेशन के लिए महिला अनुकूल दृष्टिकोण अपनाना तथा विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों के लिए, परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाना। |
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आजीविका, कौशल विकास और सहायता व्यवस्था को आपस में जोड़ना तथा उनके वित्तीय समावेशन के साथ संबंधों को मजबूत करना। |
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वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय शिक्षा को एक प्रभावी साधन के रूप में उपयोग करना। |
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ग्राहक के संरक्षण तथा शिकायत निवारण उपायों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाना। |
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वित्तीय समावेशन के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): यह एक प्रमुख (फ्लैगशिप) वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम बुनियादी बचत और जमा खातों, विप्रेषण (रेमिटेंस), ऋण, बीमा और पेंशन सेवाओं तक वहनीय दर पर पहुँच प्रदान करता है।
- 2025 तक, 56 करोड़ से अधिक जन धन बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 55 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के नाम हैं।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): भारत में होने वाले सभी डिजिटल लेन-देन में UPI की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है और यह विश्व के लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान को संचालित करता है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): यह विनिर्माण, व्यापार या सेवा क्षेत्रकों में लगे आय-सर्जक लघु और सूक्ष्म उद्यमों को ₹20 लाख तक के ऋण की सुविधा प्रदान करता है।
- पिछले दशक में, मुद्रा योजना के तहत ₹35.13 लाख करोड़ की राशि के 53 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
- सभी के लिए बीमा और पेंशन: वर्ष 2015 में शुरू की गई तीन 'जन सुरक्षा' योजनाओं ने बहुत कम प्रीमियम पर निर्धन वर्ग को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। ये योजनाएं हैं; जीवन बीमा के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), दुर्घटना बीमा के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), और वृद्धावस्था में आय सुरक्षा के लिए अटल पेंशन योजना (APY)।
- बैंकिंग अवसंरचना और नवाचार: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भौतिक शाखाओं और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल, दोनों के माध्यम से बैंकिंग आउटलेट्स के विस्तार की सुविधा प्रदान की है।
- उपर्युक्त के अतिरिक्त, RBI ने पेमेंट्स बैंक और लघु विकास बैंक जैसे बैंकों की नई श्रेणियां बनाई हैं, जिनका उद्देश्य कम आय वाले और ग्रामीण ग्राहकों को विशिष्ट बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है।
भारत की वित्तीय समावेशन विकास यात्रा में प्रमुख चुनौतियां
- निष्क्रिय बैंक खाते: एक अनुमान के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 23% प्रधानमंत्री जन धन योजना खातों में कोई लेनदेन नहीं हुआ है। यह अन्य विकासशील देशों में देखी जाने वाली 3-4% की निष्क्रियता दर से कहीं अधिक है।
- ग्लोबल फिन्डेक्स सर्वे के अनुसार, इसके मुख्य कारणों में बैंक का अधिक दूरी पर होना, विश्वास कम होना और खातों का उपयोग न करना है। 28% निष्क्रिय खाताधारकों के मामले में बैंक बहुत दूर हैं, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में।
- लैंगिक अंतराल और सामाजिक बाधाएं: जन धन खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 56% है, किंतु उनमें से केवल 28% ही सक्रिय रूप से डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा लगभग 41% है।
- महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों को औपचारिक ऋण प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है। केवल लगभग 10% को ही संस्थागत स्रोतों अर्थात बैंकों से ऋण प्राप्त होता है। इसका मुख्य कारण संपार्श्विक (कोलैटरल) के लिए संपत्ति का नहीं होना और पूर्वाग्रह हैं।
- शहरी-ग्रामीण विभाजन: शहरों के लगभग 59% वयस्क UPI या डेबिट-क्रेडिट कार्ड जैसे माध्यमों का उपयोग करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात केवल 14 से 27% है।
- कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, अनियमित विद्युत आपूर्ति और स्मार्टफोन की कम पहुंच डिजिटल बैंकिंग के मार्ग में बाधा बनती है।
- निम्न वित्तीय साक्षरता और जागरूकता: एक बुनियादी चुनौती यह है कि वित्तीय साक्षरता का स्तर अभी भी काफी कम है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, केवल लगभग 27% भारतीय वयस्क ही वित्तीय रूप से साक्षर हैं।
निष्कर्ष
वित्तीय समावेशन के विस्तार के लिए वित्तीय साक्षरता को मजबूत करना, अंतिम व्यक्ति तक पहुँच के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना तथा वंचित वर्गों के लिए आवश्यकता - आधारित वित्तीय उत्पादों की शुरुआत करना आवश्यक है। इसके साथ ही, नवोन्मेषी डिजिटल ऋण व्यवस्था और ऋण चुकाने की क्षमता के मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था से कम ऋण राशि वाले लोगों की वित्तीय समस्याओं को दूर किया जा सकता है। ये सभी उपाय सम्मिलित रूप से न केवल वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे बल्कि सार्थक और समावेशी वित्तीय भागीदारी भी सुनिश्चित कर सकते हैं।