हाल ही में, रूस के राष्ट्रपति ने 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली का दौरा किया, जिसने रणनीतिक साझेदारी पर घोषणा (2000) की 25वीं वर्षगांठ को चिह्नित किया।
शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम
- व्यापार लक्ष्य: दोनों पक्षों ने 2030 तक $100 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया। साथ ही, आर्थिक सहयोग के लिए “कार्यक्रम 2030” को अपनाया गया।
- कार्यक्रम 2030: कार्यक्रम का उद्देश्य ऊर्जा और रक्षा से परे व्यापार का विविधीकरण करना है।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों में सहयोग: रूस औपचारिक रूप से भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA) में शामिल हुआ। यह 'बिग कैट' वाले और बिना 'बिग कैट' वाले देशों का भारत के नेतृत्व में बना एक गठबंधन है।"
- IBCA (मुख्यालय - नई दिल्ली): इसका लक्ष्य 7 'बिग कैट्स' - बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा- का संरक्षण करना है।
- मुद्रा और भुगतान: पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों से बचने के लिए, दोनों पक्ष रुपया-रूबल निपटान विकसित करने और भुगतान प्रणालियों की पारस्परिकता आदि को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
- वर्तमान में, लगभग 96% द्विपक्षीय व्यापार का निपटान राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके किया जा रहा है।
- जीवाश्म ईंधन और उर्वरक: रूस ने बाहरी दबावों के बावजूद भारत को तेल, गैस, कोयला और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया।
- भारत वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
- सिविल परमाणु ऊर्जा: रूस ने भारत के सिविल परमाणु कार्यक्रम (कुडनकुलम परियोजना, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर) को निरंतर समर्थन देने और तेल एवं गैस की निर्बाध आपूर्ति की प्रतिबद्धता दोहराई।
- श्रमिक गतिशीलता: रूस में श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए कुशल भारतीय श्रमिकों के कानूनी प्रवेश की सुविधा हेतु एक प्रवासन और गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
- आर्कटिक सहयोग: रूस ने भारत को आर्कटिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया, जिसमें ध्रुवीय जलक्षेत्रों के लिए भारतीय नाविकों के प्रशिक्षण से संबंधित समझौता ज्ञापन (MOU) भी शामिल है।
- वैश्विक स्तर पर अब तक अप्राप्त 13% तेल और 30% गैस भंडार के साथ आर्कटिक क्षेत्र का आर्थिक एवं रणनीतिक महत्व अत्यधिक है।
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1 sourceWSIS+20, संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित 'सूचना समाज पर विश्व शिखर सम्मेलन' (WSIS) की 20वीं वर्षगांठ की समीक्षा का प्रतीक है।
सूचना समाज पर विश्व शिखर सम्मेलन (WSIS) के बारे में
- यह संयुक्त राष्ट्र (UN) का एक दो-चरणीय सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (ICTs) के माध्यम से विकास को बढ़ावा देने हेतु मुद्दों, नीतियों और फ्रेमवर्क को परिभाषित करना था।
- प्रथम चरण: जेनेवा, 2003 – इसमें 'सिद्धांतों का घोषणा-पत्र' और 'कार्य योजना' को अपनाया गया।
- द्वितीय चरण: ट्यूनिस, 2005 – इसमें 'सूचना समाज के लिए ट्यूनिस एजेंडा' को अपनाया गया।
- इसके बाद से WSIS से संबंधित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें वार्षिक WSIS फोरम, समीक्षा प्रक्रिया WSIS+10 और आगामी WSIS+20 शामिल हैं।
- उद्देश्य:
- यह डिजिटल शासन और सहयोग पर आधारित संयुक्त राष्ट्र की एक बहु-हितधारक प्रक्रिया है, जिसका दृष्टिकोण जन-केंद्रित, समावेशी और विकास-उन्मुख सूचना एवं ज्ञान समाजों को बढ़ावा देना है।
- सूचना और ICT तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करके, डिजिटल विभाजन को कम करना और सतत विकास के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर एक समावेशी समाज का निर्माण करना।
- WSIS फोरम का आयोजन प्रतिवर्ष ITU, UNESCO, UNDP और UNCTAD द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है, और इसकी सह-मेजबानी ITU और स्विस परिसंघ (Switzerland) द्वारा की जाती है।
- इसकी प्रगति के आकलन के लिए WSIS+10 और WSIS+20 जैसे समीक्षा तंत्र बनाए गए हैं।
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1 sourceअंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) परिषद में भारत 2026-27 के लिए सर्वाधिक मतों से पुनर्निर्वाचित हुआ।
- IMO परिषद में तीन श्रेणियों (A, B और C) में 40 निर्वाचित सदस्य होते हैं और यह IMO के कार्यकारी निकाय के रूप में कार्य करती है।

समुद्री सुरक्षा में IMO की भूमिका
- IMO के प्रमुख अभिसमय और रणनीतियां:
- जहाजों से प्रदूषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (MARPOL): जहाजों से तेल, रसायन, सीवेज, अपशिष्ट आदि से होने वाले प्रदूषण को रोकना और न्यूनतम करना।
- ब्लॅास्ट जल प्रबंधन अभिसमय: हानिकारक जलीय जीवों और रोगजनकों के प्रसार को रोकना तथा नए समुद्री परिवेश में आक्रामक प्रजातियों के प्रवेश को रोकना।
- समुद्री जीवन के संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (SOLAS): जहाजों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक स्थापित करता है। इन मानकों में अग्निशमन और नेविगेशन के लिए आवश्यकताएं शामिल हैं।
- नाविकों के प्रशिक्षण, प्रमाणन और वॉचकीपिंग के मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय: यह नाविकों के प्रशिक्षण एवं प्रमाणन के लिए योग्यता निर्धारित करता है।
- जहाजों से ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी पर 2023 IMO रणनीति: इसका उद्देश्य 2050 तक नेट जीरो GHG उत्सर्जन प्राप्त करना है।
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1 sourceITU का विश्व दूरसंचार विकास सम्मेलन (WTDC-25) बाकू में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन प्रत्येक चार वर्षों में आयोजित किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के बारे में (मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड)
- परिचय: यह डिजिटल प्रौद्योगिकियों (ICTs) के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी है।
- सदस्य: 194 सदस्य देश, और 1000 से अधिक कंपनियां, विश्वविद्यालय, आदि।
- उत्पत्ति: इसकी स्थापना 1865 में हुई थी। पेरिस में हस्ताक्षरित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ अभिसमय से अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ संघ (ITU का पुराना नाम) की स्थापना हुई थी।
- मुख्य कार्य:
- प्रमुख संसाधनों का प्रबंधन: रेडियो आवृत्तियों का आवंटन और उपग्रहों की अवस्थिति।
- नियम निर्धारित करना: यह निर्बाध वैश्विक संपर्क के लिए तकनीकी मानक निर्धारित करता है।
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1 sourceथ्री सीज़ इनिशिएटिव (3SI) ने अपनी वैचारिक शुरुआत (2015) का एक दशक पूरा कर लिया है।
थ्री सीज़ इनिशिएटिव (3SI) के बारे में

- यह 13 सदस्य देशों का एक अंतर-सरकारी मंच है, जो बाल्टिक, एड्रियाटिक और काला सागर के बीच स्थित हैं।
- स्थापना: इसकी स्थापना 2015 में पोलैंड और क्रोएशिया के पूर्व राष्ट्रपतियों द्वारा की गई थी। यह एक क्षेत्रीय सहयोग के रूप में कार्य करता है जो यूरोपीय संघ (EU) की नीतियों का पूरक है।
- सदस्यता: ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, ग्रीस, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य ऊर्जा, परिवहन और डिजिटल क्षेत्रों में अवसंरचना के विकास हेतु सहयोग को बढ़ावा देना है।
- थ्री सीज़ इनिशिएटिव इन्वेस्टमेंट फंड (3SIIF): इसकी स्थापना 2019 में राष्ट्रीय और यूरोपीय संघ के सार्वजनिक वित्तपोषण पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी।
- प्रमुख उद्देश्य:
- आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा: रूस की ऊर्जा पर निर्भरता कम करते हुए मध्य और पूर्वी यूरोप में विकास को बढ़ावा देना।
- कनेक्टिविटी का पुनर्संतुलन: उत्तर-दक्षिण परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कॉरिडोर को बढ़ावा देकर सोवियत काल के पूर्व-पश्चिम प्रभुत्व को समाप्त करना।
- रणनीतिक एकीकरण: यूरोपीय संघ (EU) की एकजुटता को मजबूत करना और EU तथा नाटो (NATO) ढांचे के भीतर इस क्षेत्र की भूमिका को पुख्ता करना।
- IMEC के साथ जुड़ाव: यह भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के उत्तरी विस्तार के रूप में कार्य करता है, जो भूमध्यसागरीय बंदरगाहों को मध्य एवं पूर्वी यूरोप और बाल्टिक देशों से जोड़ता है।
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1 sourceहाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और रवांडा के बीच शांति व समृद्धि के लिए वाशिंगटन एकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए गए।
- पृष्ठभूमि: रवांडा समर्थित M23 विद्रोहियों ने पूर्वी DRC में नए हमले शुरू किए थे, जिससे विस्थापन और क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था।
एकॉर्ड्स के बारे में
- उद्देश्य: इन दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और खनिज समृद्ध पूर्वी DRC क्षेत्रों जैसे कटंगा, किवु, इटुरी आदि में स्थायी शांति सुनिश्चित करना।
- DRC अपने खनिजों जैसे तांबा व कोबाल्ट, टिन, टंगस्टन, टैंटलम, सोना और हीरों के लिए जाना जाता है।
- यह विश्व का सबसे बड़ा कोबाल्ट उत्पादक है, (वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का 70%)।
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र परक्राम्य माल दस्तावेज़ अभिसमय (अक्रा अभिसमय), 2025 का समर्थन करने वाले संकल्प को स्वीकार किया।
- परक्राम्य माल दस्तावेज़ (Negotiable Cargo Documents: NCDs) ऐसे दस्तावेज़ होते हैं, जो पारगमन (transit) में माल का प्रतिनिधित्व करते हैं, और दस्तावेज़ धारक को माल पर अधिकार प्रदान करते हैं। इन्हें किसी और को स्थानांतरित किया जा सकता है। ये दस्तावेज़ भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में होते हैं।
अक्रा अभिसमय (Accra Convention), 2025 के बारे में
- उद्देश्य: NCDs के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना। साथ ही, 'परक्राम्य माल दस्तावेजों' के लाभों को समुद्री परिवहन से आगे बढ़ाकर मल्टीमॉडल परिवहन (ट्रेन, ट्रक, विमान या जहाज) तक विस्तारित करना।
- यह यात्रा के बीच में ही माल (cargo) को बेचने, उसका मार्ग बदलने, या वित्त-पोषण के लिए उसे जमानत (गिरवी रखने) के रूप में उपयोग करने की अनुमति देता है।
- कानूनी प्रभाव: NCDs का वही कानूनी प्रभाव होता है, जो माल की भौतिक डिलीवरी का होता है।
- महत्त्व: यह व्यापार वित्त, वैश्विक व्यापार के डिजिटलीकरण आदि को सुगम बनाता है।
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1 sourceइजरायल स्व-घोषित सोमालीलैंड गणराज्य को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बना।
सोमालीलैंड गणराज्य के बारे में

- अवस्थिति: यह 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में स्थित है।
- सीमाएं: इसकी सीमाएं उत्तर में अदन की खाड़ी, उत्तर-पश्चिम में जिबूती, दक्षिण व पश्चिम में इथियोपिया और पूर्व में सोमालिया से लगती हैं।
- इतिहास: केंद्र सरकार के पतन और वर्षों के गृहयुद्ध के बाद, यह 1991 में सोमालिया से अलग हो गया था। तब से, यह एक 'वास्तविक राज्य' (de facto state) के रूप में अस्तित्वमान है। इसकी अपनी निर्वाचित सरकार है।
- राजधानी: हरगेईसा (Hargeisa)।
कुवैत ने मुबारक अल-कबीर बंदरगाह के निर्माण के लिए चीन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
मुबारक अल-कबीर बंदरगाह के बारे में
- अवस्थिति: यह बंदरगाह कुवैत के बूबियान द्वीप (Boubyan Island) पर स्थित है।
- उद्देश्य: क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन को बढ़ावा देना; कुवैत के आर्थिक विविधीकरण में योगदान देना और तेल पर इसकी निर्भरता को कम करना।
- चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का हिस्सा: BRI या 'नवीन रेशम मार्ग', चीन के नेतृत्व वाली अवसंरचना परियोजना है। इसे 2013 में शुरू किया गया था। इसके निम्नलिखित दो मुख्य घटक हैं:
- सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट: इसमें यूरोप, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और एशिया से होकर गुजरने वाले स्थलीय मार्ग शामिल हैं।
- मैरीटाइम सिल्क रोड: इसमें पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका को जोड़ने वाले समुद्री मार्ग शामिल हैं।
किम्बर्ले प्रॉसेस (KP) के पूर्ण सत्र ने 1 जनवरी 2026 से किम्बर्ले प्रॉसेस की अध्यक्षता ग्रहण करने के लिए भारत को चुना है।
किम्बर्ले प्रॉसेस (KP) के बारे में
- यह एक त्रिपक्षीय पहल है। इसमें सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय हीरा उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य "कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स" के व्यापार को रोकना है।
- कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स: ये कच्चे या अपरिष्कृत हीरे होते हैं। इनका उपयोग विद्रोहियों या उनके सहयोगियों द्वारा वैध सरकारों को अस्थिर करने के उद्देश्य से सशस्त्र संघर्षों के वित्त-पोषण के लिए किया जाता है। इन्हें "ब्लड डायमंड्स" भी कहा जाता है।
- सदस्य: भारत और यूरोपीय संघ सहित इसमें 60 प्रतिभागी शामिल हैं। ये कच्चे हीरों के वैश्विक व्यापार का 99% से अधिक हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
- कार्यप्रणाली: यह सख्त प्रमाणीकरण प्रोटोकॉल और अनुपालन मूल्यांकन लागू करके, यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रतिभागी देश उच्च मानकों को बनाए रखें जिससे कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स को अंतर्राष्ट्रीय बाजार से बाहर रखा जा सके।