सुर्ख़ियों में क्यों?
कोयला, खान और इस्पात संबंधी स्थायी समिति ने 'खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता' पर अपनी 16वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में आयात निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने हेतु भारत के लिए एक रोडमैप को रेखांकित किया गया है।
'खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता' पर 16वीं रिपोर्ट के प्रमुख विवरण
- आत्मनिर्भरता की स्थिति
- खनिज प्रोफ़ाइल: भारत 95 खनिजों का उत्पादन करता है, जिनमें 4 ईंधन, 10 धात्विक, 23 गैर-धात्विक, 3 परमाणु और 55 गौण खनिज शामिल हैं।
- उत्पादन में वैश्विक स्थिति: विश्व खनिज उत्पादन, 2018-22 के अनुसार, भारत कच्चे इस्पात, प्राथमिक एल्यूमीनियम और परिष्कृत लेड (refined lead) में दूसरे स्थान पर, स्लैब जिंक और क्रोमाइट में तीसरे स्थान पर, तथा लौह अयस्क और ग्रेफाइट में चौथे स्थान पर है।
- वर्ष 2023-24 के दौरान, उत्पादन के कुल मूल्य में निजी क्षेत्र का योगदान 61.4% रहा।
- GDP में योगदान: खनन क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 2% का योगदान देता है, जो ऑस्ट्रेलिया (12%) और कनाडा (6%) की तुलना में काफी कम है। यह दर्शाता है कि भारत को बढ़ी हुई अन्वेषण गतिविधियों और आत्मनिर्भरता के माध्यम से "कैच-अप" करने की आवश्यकता है।
- उच्च आत्मनिर्भरता: भारत लौह अयस्क (100%), क्रोमाइट (95%), चूना पत्थर (93%), बॉक्साइट (85%) और सिलिमेनाइट में आत्मनिर्भर या लगभग आत्मनिर्भर है।
- आयात निर्भरता:
- महत्वपूर्ण खनिज: भारत लिथियम, कोबाल्ट, निकल, नायोबियम और गैलियम के लिए 100% आयात पर निर्भर है।
- पर्याप्त निर्भरता: रॉक फॉस्फेट (15% आत्मनिर्भर), मैग्नेसाइट (22%) और मैंगनीज अयस्क (38%) के लिए बड़े पैमाने पर आयात की आवश्यकता होती है।
- परिष्कृत तांबा: वर्तमान में भारत लगभग 40% आयात पर निर्भर है, हालांकि कच्छ कॉपर लिमिटेड जैसे नए संयंत्रों के चालू होने से आत्मनिर्भरता बढ़ने की संभावना है।
महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा खनिज
|
आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नीतिगत पहलें

- विधायी सुधार: MMDR संशोधन अधिनियम (2015-2023) के अंतर्गत पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था लागू की गई तथा 29 गहराई में स्थित एवं महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक नया 'अन्वेषण लाइसेंस' (EL) शुरू किया गया।
- राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM): सरकार ने महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु एक सुदृढ़ ढांचा स्थापित करने के लिए 2025 में NCMM की शुरुआत की।
- विदेशों में रणनीतिक अधिग्रहण: विदेशों में, विशेष रूप से लिथियम और कोबाल्ट (जैसे, अर्जेंटीना, चिली में) में महत्वपूर्ण खनिज परिसंपत्तियों की पहचान और अधिग्रहण करने के लिए KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) का गठन किया गया था।
- अपतटीय खनन: नीलामी शुरू करने के लिए 2023 में 'अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम' में संशोधन किया गया; 13 अपतटीय ब्लॉकों (जिसमें पॉलिमेटेलिक नोड्यूल्स और निर्माण रेत शामिल हैं) का पहला चरण 2024 में प्रारंभ किया गया था।
- राजकोषीय उपाय: घरेलू परिशोधन को बढ़ावा देने हेतु बजट 2024–25 में 25 महत्वपूर्ण खनिजों (जिसमें तांबा अयस्क और लिथियम शामिल हैं) पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए भारत 2023 में अमेरिका के नेतृत्व वाली 'खनिज सुरक्षा साझेदारी' (MSP) में शामिल हुआ।
सिफारिशें
- अंतर-मंत्रालयी निगरानी: खनिज परियोजनाओं की नीलामी के बाद की प्रगति की निगरानी करने और परिचालन को फास्ट-ट्रैक करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह की स्थापना की जाए।
- उत्पादन को प्रोत्साहित करना: परिचालन में देरी के लिए दंड और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने पर विचार किया जाए।
- शहरी खनन और चक्रीय अर्थव्यवस्था: ई-अपशिष्ट, औद्योगिक स्क्रैप तथा ईवी बैटरियों से खनिज पुनर्प्राप्ति को वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाए (जैसे प्रस्तावित ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना)।
- अनुसंधान एवं विकास पर बल: उत्कृष्टता केंद्रों (CoEs) के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास को सुदृढ़ किया जाए तथा खनिज लक्ष्यीकरण के लिए AI/ML का उपयोग किया जाए।
- कौशल उन्नयन: यह सिफारिश की गई है कि खनन कंपनियों द्वारा AI और स्वचालन जैसी उन्नत तकनीकों के संचालन हेतु कार्यबल के कौशल विकास के लिए CSR निधि का एक हिस्सा निर्धारित किया जाए।
- वैधानिक स्वीकृति: नीलामी और उत्पादन के बीच की अवधि को कम करने के लिए महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं को पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियों में प्राथमिकता दी जाए।
निष्कर्ष
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को थोक खनिजों में आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण खनिजों में आयात निर्भरता के बीच की खाई को पाटना होगा। इसके लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन जैसे रणनीतिक सुधारों को लागू करना, घरेलू अन्वेषण में तेजी लाना, सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देना तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों का एकीकरण करना आवश्यक है।