खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता (SELF-RELIANCE IN MINERALS AND METALS) | Current Affairs | Vision IAS

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खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता (SELF-RELIANCE IN MINERALS AND METALS)

28 Jan 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

कोयला, खान और इस्पात संबंधी स्थायी समिति ने 'खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता' पर अपनी 16वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में आयात निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने हेतु भारत के लिए एक रोडमैप को रेखांकित किया गया है।

'खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता' पर 16वीं रिपोर्ट के प्रमुख विवरण

  • आत्मनिर्भरता की स्थिति
    • खनिज प्रोफ़ाइल: भारत 95 खनिजों का उत्पादन करता है, जिनमें 4 ईंधन, 10 धात्विक, 23 गैर-धात्विक, 3 परमाणु और 55 गौण खनिज शामिल हैं।
    • उत्पादन में वैश्विक स्थिति: विश्व खनिज उत्पादन, 2018-22 के अनुसार, भारत कच्चे इस्पात, प्राथमिक एल्यूमीनियम और परिष्कृत लेड (refined lead) में दूसरे स्थान पर, स्लैब जिंक और क्रोमाइट में तीसरे स्थान पर, तथा लौह अयस्क और ग्रेफाइट में चौथे स्थान पर है।
      • वर्ष 2023-24 के दौरान, उत्पादन के कुल मूल्य में निजी क्षेत्र का योगदान 61.4% रहा। 
    • GDP में योगदान: खनन क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 2% का योगदान देता है, जो ऑस्ट्रेलिया (12%) और कनाडा (6%) की तुलना में काफी कम है। यह दर्शाता है कि भारत को बढ़ी हुई अन्वेषण गतिविधियों और आत्मनिर्भरता के माध्यम से "कैच-अप" करने की आवश्यकता है। 
    • उच्च आत्मनिर्भरता: भारत लौह अयस्क (100%), क्रोमाइट (95%), चूना पत्थर (93%), बॉक्साइट (85%) और सिलिमेनाइट में आत्मनिर्भर या लगभग आत्मनिर्भर है।
    • आयात निर्भरता:
      • महत्वपूर्ण खनिज: भारत लिथियम, कोबाल्ट, निकल, नायोबियम और गैलियम के लिए 100% आयात पर निर्भर है
      • पर्याप्त निर्भरता: रॉक फॉस्फेट (15% आत्मनिर्भर)मैग्नेसाइट (22%) और मैंगनीज अयस्क (38%) के लिए बड़े पैमाने पर आयात की आवश्यकता होती है।
      • परिष्कृत तांबा: वर्तमान में भारत लगभग 40% आयात पर निर्भर है, हालांकि कच्छ कॉपर लिमिटेड जैसे नए संयंत्रों के चालू होने से आत्मनिर्भरता बढ़ने की संभावना है।

महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा खनिज

  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): ये ऐसे खनिज हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं। इनकी उपलब्धता की कमी या भौगोलिक संकेंद्रण आपूर्ति श्रृंखला में संवेदनशीलता उत्पन्न करता है।
    • भारत ने 30 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है। इनमें से 24 को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) की पहली अनुसूची के भाग D में शामिल किया गया है, जो केंद्र सरकार को नीलामी का विशेष अधिकार प्रदान करता है।
  • दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements - REEs): यह धात्विक तत्वों का एक समूह है जो स्वच्छ ऊर्जा (पवन टर्बाइन, ईवी मोटर्स) और रक्षा प्रणालियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    • मोनाजाइट भारत में REEs का प्रमुख स्रोत है, जो तटीय रेत और अंतर्देशीय प्लेसर निक्षेपों में पाया जाता है।
    • जिन REE में यूरेनियम/थोरियम नहीं होते, उन्हें महत्वपूर्ण खनिज की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं जिनमें ये पाए जाते हैं, उन्हें परमाणु खनिज माना जाता है और उनका विनियमन परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा किया जाता है।

 

 

आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नीतिगत पहलें

  • विधायी सुधार: MMDR संशोधन अधिनियम (2015-2023) के अंतर्गत पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था लागू की गई तथा 29 गहराई में स्थित एवं महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक नया 'अन्वेषण लाइसेंस' (EL) शुरू किया गया।
    • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM): सरकार ने महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु एक सुदृढ़ ढांचा स्थापित करने के लिए 2025 में NCMM की शुरुआत की।
  • विदेशों में रणनीतिक अधिग्रहण: विदेशों में, विशेष रूप से लिथियम और कोबाल्ट (जैसे, अर्जेंटीना, चिली में) में महत्वपूर्ण खनिज परिसंपत्तियों की पहचान और अधिग्रहण करने के लिए KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) का गठन किया गया था।
  • अपतटीय खनन: नीलामी शुरू करने के लिए 2023 में 'अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम' में संशोधन किया गया; 13 अपतटीय ब्लॉकों (जिसमें पॉलिमेटेलिक नोड्यूल्स और निर्माण रेत शामिल हैं) का पहला चरण 2024 में प्रारंभ किया गया था।
  • राजकोषीय उपाय: घरेलू परिशोधन को बढ़ावा देने हेतु बजट 2024–25 में 25 महत्वपूर्ण खनिजों (जिसमें तांबा अयस्क और लिथियम शामिल हैं) पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए भारत 2023 में अमेरिका के नेतृत्व वाली 'खनिज सुरक्षा साझेदारी' (MSP) में शामिल हुआ।

सिफारिशें

  • अंतर-मंत्रालयी निगरानी: खनिज परियोजनाओं की नीलामी के बाद की प्रगति की निगरानी करने और परिचालन को फास्ट-ट्रैक करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह की स्थापना की जाए।
  • उत्पादन को प्रोत्साहित करना: परिचालन में देरी के लिए दंड और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने पर विचार किया जाए।
  • शहरी खनन और चक्रीय अर्थव्यवस्था: ई-अपशिष्ट, औद्योगिक स्क्रैप तथा ईवी बैटरियों से खनिज पुनर्प्राप्ति को वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाए (जैसे प्रस्तावित ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना)
  • अनुसंधान एवं विकास पर बल: उत्कृष्टता केंद्रों (CoEs) के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास को सुदृढ़ किया जाए तथा खनिज लक्ष्यीकरण के लिए AI/ML का उपयोग किया जाए।
  • कौशल उन्नयन: यह सिफारिश की गई है कि खनन कंपनियों द्वारा AI और स्वचालन जैसी उन्नत तकनीकों के संचालन हेतु कार्यबल के कौशल विकास के लिए CSR निधि का एक हिस्सा निर्धारित किया जाए।
  • वैधानिक स्वीकृति: नीलामी और उत्पादन के बीच की अवधि को कम करने के लिए महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं को पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियों में प्राथमिकता दी जाए।

निष्कर्ष

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को थोक खनिजों में आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण खनिजों में आयात निर्भरता के बीच की खाई को पाटना होगा। इसके लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन जैसे रणनीतिक सुधारों को लागू करना, घरेलू अन्वेषण में तेजी लाना, सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देना तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों का एकीकरण करना आवश्यक है।

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CSR निधि

CSR निधि (Corporate Social Responsibility Fund) का अर्थ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनियों द्वारा सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन है। खनन कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे इस निधि का एक हिस्सा अपने कार्यबल के कौशल विकास पर खर्च करें, विशेषकर उन्नत तकनीकों के संचालन हेतु।

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शहरी खनन और चक्रीय अर्थव्यवस्था

शहरी खनन (Urban Mining) और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का तात्पर्य ई-कचरे, औद्योगिक स्क्रैप और पुरानी बैटरियों जैसे स्रोतों से मूल्यवान खनिजों और सामग्रियों को पुनर्प्राप्त करने की प्रक्रिया से है। इसका उद्देश्य कचरे को कम करना और संसाधनों का कुशल उपयोग करना है।

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