सुर्ख़ियों में क्यों?
UNESCO की "मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची" में 'दीपावली' को आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया।

अन्य संबंधित तथ्य
- यह समावेशन नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) के संरक्षण हेतु अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान किया गया था। यह पहली बार था जब भारत ने इस सत्र की मेजबानी की थी।
- अंतर-सरकारी समिति का उद्देश्य 2003 के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण सम्मेलन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है। साथ ही, यह सदस्य देशों में उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
- इस नवीन समावेशन के साथ, यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भारत के कुल 16 तत्व शामिल हो चुके हैं (इन्फोग्राफिक देखिए)।
- सत्र के अन्य प्रमुख परिणाम इस प्रकार हैं:
- अत्यधिक संरक्षण की आवश्यकता वाली ICH सूची में नई विरासत हैं:
- डोंग हो (Đông Hồ) लोक वुडब्लॉक प्रिंटिंग (ठप्पा छपाई) शिल्प (वियतनाम);
- दैदा समुदाय का मवाज़िंदिका (Mwazindika) आध्यात्मिक नृत्य (केन्या);
- बोरेएंडो, भोरिंडो प्राचीन विलुप्त हो रहा लोक संगीत वाद्य (पाकिस्तान) आदि।
- मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में नवीन विरासत:
- जोरोपो, वेनेजुएला;
- तंगैल की पारंपरिक साड़ी बुनाई कला, बांग्लादेश;
- बिहजाद की मिनिएचर (लघु) चित्रकला शैली, अफगानिस्तान, आदि।
- अत्यधिक संरक्षण की आवश्यकता वाली ICH सूची में नई विरासत हैं:
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) के बारे में
- अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर अभिसमय के अनुसार, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे प्रथाएं, प्रस्तुतियां, अभिव्यक्तियां, ज्ञान और कौशल शामिल होते हैं, साथ ही उनसे जुड़े उपकरण, वस्तुएं, कलाकृतियां एवं सांस्कृतिक स्थल भी शामिल होते हैं, जिन्हें समुदाय, समूह तथा व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता देते हैं।
- मुख्य विशेषताएं:
- यह विरासत एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित होती रहती है।
- समुदाय और समूह इसे अपने पर्यावरण व प्रकृति के साथ अंतःक्रिया तथा ऐतिहासिक अनुभवों के अनुरूप निरंतर पुनर्जीवित या पुनर्गठित करते रहते हैं।
- यह समुदायों को अपनी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता का बोध कराती है।
- यह सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान तथा मानव रचनात्मकता को प्रोत्साहित करती है।
- यह निम्नलिखित विभिन्न क्षेत्रों में अभिव्यक्त होती है, जैसे-
- मौखिक परंपराएं और अभिव्यक्तियां;
- निष्पादन कलाएं;
- सामाजिक प्रथाएं,
- अनुष्ठान और त्यौहार;
- प्रकृति एवं ब्रह्मांड से संबंधित ज्ञान व प्रथाएं;
- पारंपरिक शिल्प कौशल आदि।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) के संरक्षण हेतु अभिसमय के बारे में
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अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) के संरक्षण हेतु भारत के प्रयास
- भारत की अमूर्त विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के लिए योजना: इसे संस्कृति मंत्रालय ने आरंभ किया है। इसका उद्देश्य देश में पहले से चल रहे, लेकिन विखंडित संरक्षण प्रयासों को एक केंद्रीकृत तंत्र के माध्यम से मजबूत करना है।
- राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) सूची: इस सूची को समय समय पर संगीत नाटक अकादमी अपडेट करती है।
- क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (Zonal Cultural Centres: ZCCs): भारत की लोक कलाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृति मंत्रालय ने 7 क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए हैं।
- गुरु-शिष्य परंपरा योजना: यह योजना निष्पादन कलाओं की सभी विधाओं, जैसे नाट्य समूह, रंगमंच समूह, संगीत मंडलियों, बाल रंगमंच आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
दीपावली के बारे में
- दीपावली को दिवाली भी कहा जाता है। यह त्यौहार कार्तिक अमावस्या पर, अक्टूबर/ नवंबर माह में मनाया जाता है।
- इस त्यौहार में अनेक महत्वपूर्ण अनुष्ठान और परंपराएं सम्मिलित हैं, जैसे-
- धनतेरस: लोग समृद्धि के प्रतीक के रूप में धातु के बर्तन या आभूषण खरीदते हैं;
- नरक चतुर्दशी: नकारात्मकता को दूर करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं;
- पवित्र लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है; और
- भाई दूज: यह भाई-बहन के प्रेम बंधन का प्रतीक है।
- मूल दर्शन: यह सभी के लिए समृद्धि, नवीनता और प्रचुरता का उत्सव है। अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

- दीपावली से जुड़ी प्रमुख लोक कथाएं / मान्यताएं
- रामायण: यह भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास के उपरांत उनके अयोध्या वापस लौटने तथा रावण पर उनकी विजय का प्रतीक है। इस अवसर पर अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनके मार्ग को प्रकाशित किया था।
- महाभारत: यह पांडवों के वनवास से लौटने का प्रतीक है।
- महाराष्ट्र में राजा बलि की वापसी: महाराष्ट्र में दीपावली राजा बलि के आगमन के रूप में मनाई जाती है, जो न्याय और उदारता का प्रतीक माने जाते हैं।
- जैन धर्म: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने पावापुरी में दीपावली के दिन ही निर्वाण प्राप्त किया था।
- दीपावली से संबंधित ऐतिहासिक एवं साहित्यिक संदर्भ
- हेनरी यूल और ए. सी. बर्नेल द्वारा संकलित 'आंग्ल-भारतीय शब्दों एवं शब्दावली का शब्दकोश' (1903): इसमें "देवाल्ली (Dewally)" शब्द का उल्लेख मिलता है, जो 1613 से प्रारंभ होने वाले विदेशी यात्रियों के वृतान्तों में पाया गया है।
- अल-बिरूनी (लगभग 1030 ई., 11वीं शताब्दी): इसने अपनी कृति 'तारीख़-अल-हिंद (भारत का इतिहास)' में कार्तिक अमावस्या को मनाई जाने वाली दीपावली का उल्लेख किया है।
- निकोलो दे कोंटी (15वीं शताब्दी), विजयनगर साम्राज्य में वेनिस का व्यापारी: उसने मंदिरों और छतों पर जलने वाले "अनगिनत तेल के दीपों" का वर्णन किया है। साथ ही, उसने लोगों द्वारा नए कपड़े पहनने, गाने, नाचने और दावतों का भी जिक्र किया है।
- अबुल फजल (आइन-इ-अकबरी, 1590): उसने दिवाली का उल्लेख किया है और इसकी तुलना 'शब-ए-बारात' से की है। यह दर्शाता है कि मुगल दरबार के रिकॉर्ड में भी दिवाली का विशेष महत्त्व था।
निष्कर्ष
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) सूची में दीपावली का शामिल होना, उन जीवित परंपराओं को मिली वैश्विक मान्यता को दर्शाता है, जो सांस्कृतिक पहचान, निरंतरता और साझा मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्ति करती हैं। साथ ही, भारत द्वारा अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेजबानी करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।