प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना {PRADHAN MANTRI GRAM SADAK YOJANA (PMGSY)} | Current Affairs | Vision IAS

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प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना {PRADHAN MANTRI GRAM SADAK YOJANA (PMGSY)}

28 Jan 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने 2025 में अपने 25 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं।

PMGSY के बारे में

  • उत्पत्ति: चरण-I का शुभारंभ वर्ष 2000 में किया गया था। 
  • कार्यान्वयन: यह ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा संचालित केंद्र प्रायोजित योजना है
  • उद्देश्य: पात्र एवं संपर्क-विहीन ग्रामीण बस्तियों को सभी मौसम में उपयोगी सड़कों के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान करना।
  • कार्यक्रम का चरणबद्ध विकास:
    • चरण-I: 2000 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य संपर्क-विहीन ग्रामीण बस्तियों को सभी मौसम में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करना था।
    • चरण-II: 2013 में शुरू किया गया। यह मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और समेकित करने पर केंद्रित था।
      • इस चरण के तहत परिवहन दक्षता में सुधार और ग्रामीण आर्थिक विकास को गति देने के लिए ग्रामीण बाजारों, विकास केंद्रों और सेवा केंद्रों को जोड़ने वाले आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों के उन्नयन को प्राथमिकता दी गई।
      • रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण/उन्नयन के लिए 2016 में एक पृथक घटक के रूप में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) शुरू की गई थी।
    • चरण-III: 2019 में शुरू किया गया, जो अन्य बातों के साथ-साथ बस्तियों को ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने वाले 'संपर्क मार्गों' और प्रमुख ग्रामीण संपर्कों के उन्नयन पर केंद्रित था।
    • चरण-IV: वित्तीय वर्ष 2024–25 से 2028–29 की अवधि के लिए शुरू किया गया।
      • इसका उद्देश्य 25,000 संपर्क-विहीन ग्रामीण बस्तियों को सभी मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करना है, जो 2011 की जनगणना के जनसंख्या मानदंडों पर आधारित है:
        • मैदानी क्षेत्रों में 500 और उससे अधिक जनसंख्या वाली बस्तियां,
        • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 250 और उससे अधिक जनसंख्या वाली बस्तियां, और
        • विशेष श्रेणी के क्षेत्रों में स्थित बस्तियां, जिनमें जनजातीय (अनुसूची V) क्षेत्र, आकांक्षी जिले/ ब्लॉक और मरुस्थलीय क्षेत्र शामिल हैं।
  • सहायक एजेंसी: ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने कार्यक्रम को परिचालन एवं प्रबंधन संबंधी सहयोग प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी की स्थापना की है।
  • निगरानी: ऑनलाइन प्रबंधन, निगरानी और लेखा प्रणाली (OMMAS) के माध्यम से सभी कार्यों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की गई है।
  • PMGSY सड़कों का इलेक्ट्रॉनिक रखरखाव (e-MARG) प्लेटफॉर्म: यह प्लेटफॉर्म अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से जियो-टैग की गई तस्वीरों का उपयोग कर सड़क अनुरक्षण कार्यों का सत्यापन करता है, जिससे भुगतान सुनिश्चित होता है तथा ठेकेदारों के प्रदर्शन की निगरानी की जाती है।

PMGSY की उपलब्धियां

  • सड़क अवसंरचना: योजना की शुरुआत से, PMGSY के तहत कुल 8,25,114 किमी ग्रामीण सड़कों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 7,87,520 किमी का निर्माण पूरा हो चुका है, जो दिसंबर 2025 तक लगभग 95% भौतिक प्रगति को दर्शाता है।
  • कृषि: फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज का सुदृढ़ीकरण, परिवहन लागत में कमी, बाजार तक पहुंच में वृद्धि, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्ति, आदि सकारात्मक उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन: स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में वृद्धि, संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी तथा माध्यमिक और उच्च विद्यालयों तक पहुंच में सुधार हुआ है।
  • जनजातीय और अनुसूचित जाति सशक्तीकरण: PMGSY-IV को दो लक्षित पहलों के साथ अभिसरण में लागू किया जा रहा है। इनका उद्देश्य जनजातीय और अनुसूचित जाति की आबादी का समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
    • इन दो लक्षित पहलों में प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) शामिल हैं।
  • जलवायु लचीलापन: अपशिष्ट प्लास्टिक, कोल्ड मिक्स और फुल डेप्थ रिक्लेमेशन जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है जिससे पर्यावरणीय प्रभाव में कमी आयी है। जुलाई 2025 तक इन विधियों का उपयोग करके 1.24 लाख किमी से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है।

PMGSY से जुड़ी चुनौतियां

  • पुराना जनसांख्यिकीय आधार: योजना 2011 की जनगणना पर आधारित है, जो वर्तमान जनसंख्या, बस्तियों के विस्तार तथा विकसित होती अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती है।
  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी का अभाव: सड़कें अक्सर गांव की परिधि पर समाप्त हो जाती हैं, और कई छोटी बस्तियां (देसम, ढाणियां, टोले, माजरा, हैमलेट्स) 2-3 किमी अंदर रह जाती हैं। इससे वे कनेक्टिविटी के लाभों से वंचित रह जाती हैं।
  • वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित क्षेत्रों में धीमी प्रगति: योजना की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के अंतर्गत अनेक कार्य अब भी लंबित हैं।
  • सड़कों के निर्माण की खराब गुणवत्ता: मानकों का अनुपालन न होना, निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का उपयोग तथा मौसम, यातायात एवं मानसून जैसी परिस्थितियों को सहन न कर पाने वाली सड़कों की समस्या सामने आती है।

निष्कर्ष

पिछले 25 वर्षों में, PMGSY भारत के सबसे परिवर्तनकारी ग्रामीण बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरी है। इसने कनेक्टिविटी को केवल एक भौतिक परिसंपत्ति के बजाय समावेशी विकास के आधार के रूप में फिर से परिभाषित किया है। समावेशी और सतत ग्रामीण विकास प्राप्त करने के लिए डेटा अपडेट को उत्तरोत्तर मजबूत करना, एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना, कठिन क्षेत्रों में कार्यों में तेजी लाना और गुणवत्ता मानकों को लागू करना महत्वपूर्ण है।

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वामपंथी उग्रवाद (LWE)

यह भारत में माओवादी-नक्सली विचारधारा से प्रेरित हिंसक आंदोलनों को संदर्भित करता है, जो अक्सर सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और सरकारी नीतियों के विरोध से जुड़े होते हैं।

जलवायु लचीलापन

बुनियादी ढांचे को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने और उनसे उबरने की क्षमता। PMGSY में अपशिष्ट प्लास्टिक और कोल्ड मिक्स जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि निर्मित सड़कें अधिक टिकाऊ और पर्यावरणीय रूप से अनुकूल हों।

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN)

यह योजना विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (PVTGs) के सामाजिक-आर्थिक विकास पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ना है। PMGSY-IV के साथ अभिसरण में इसे लागू किया जा रहा है।

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