क्वांटम अर्थव्यवस्था (Quantum Economy) | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

28 Jan 2026
8 min

In Summary

  • नीति आयोग और आईबीएम ने 2047 तक भारत को एक शीर्ष क्वांटम अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के लिए एक रोडमैप जारी किया है।
  • इस योजना का उद्देश्य 2035 तक 100 मिलियन डॉलर से अधिक राजस्व अर्जित करने वाले 10 क्वांटम स्टार्टअप को बढ़ावा देना और वैश्विक क्वांटम सॉफ्टवेयर बाजार का 50% हिस्सा हासिल करना है।
  • क्वांटम विषयों से संबंधित स्नातकों की संख्या के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है, और कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य अपने स्वयं के क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।

In Summary

नीति आयोग और IBM ने वर्ष 2047 तक भारत को विश्व की शीर्ष तीन क्वांटम अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने के लिए रोडमैप जारी किया।

यह रोडमैप “भारत को क्वांटम-संचालित अग्रणी अर्थव्यवस्था में रूपांतरण (Transforming India into a leading Quantum-Powered Economy)” शीर्षक से जारी किया गया। इसका उद्देश्य भारत में स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग इकोसिस्टम विकसित करना और वैश्विक क्वांटम बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी प्राप्त करने में मदद करना है।

  • इसका लक्ष्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कम से कम 10 क्वांटम स्टार्टअप्स को विकसित करना है। इनमें से प्रत्येक स्टार्टअप का राजस्व 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होगा। साथ ही, 2035 तक वैश्विक क्वांटम सॉफ्टवेयर एवं सर्विसेज बाज़ार मूल्य में इनकी 50% से अधिक हिस्सेदारी होगी।  

भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी की वर्तमान स्थिति

  • प्रतिभाओं की संख्या: भारत में क्वांटम-संबंधित क्षेत्रों में स्नातक विद्यार्थियों की संख्या लगभग 91,000 है। इस मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। केवल यूरोपीय संघ (EU) ही भारत से आगे है।
  • राज्य-स्तरीय प्रतिस्पर्धा: विभिन्न राज्य अपने-अपने क्वांटम इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए: 
    • कर्नाटक ने क्वांटम रिसर्च पार्क (QuRP) स्थापित किया है।
    • आंध्र प्रदेश ने हाल ही में अमरावती क्वांटम वैली (AQV) लॉन्च किया है। 

क्वांटम प्रौद्योगिकी के बारे में

  • परिभाषा: क्वांटम प्रौद्योगिकी वह तकनीक है, जो क्वांटम यांत्रिकी (उप-परमाण्विक कणों की भौतिकी) पर आधारित सिद्धांतों का उपयोग करती है। क्वांटम यांत्रिकी में क्वांटम एंटेंगलमेंट और क्वांटम सुपरपोज़िशन शामिल हैं 
  • यह चार प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत है:
    • क्वांटम कंप्यूटिंग
    • क्वांटम संचार {जैसे क्वांटम कुंजी वितरण (QKD)}
    • क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी
    • क्वांटम पदार्थ। 

इसरो के LVM3-M6 मिशन ने ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को निम्न भू-कक्षा (LEO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया

  • LVM3-M6, 'LVM3' रॉकेट की छठी परिचालन उड़ान है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की कंपनी AST स्पेसमोबाइल के 'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए तीसरा समर्पित व्यावसायिक मिशन है।
  • इस मिशन को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिकी कंपनी AST के बीच एक व्यावसायिक समझौते का हिस्सा है।
    • NSIL को वर्ष 2019 में स्थापित किया गया था। यह अंतरिक्ष विभाग के तहत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली एक सरकारी कंपनी है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की व्यावसायिक शाखा के रूप में कार्य करती है।

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 के बारे में

  • यह LEO में स्थापित किए गए वैश्विक उपग्रह समूह का हिस्सा है। यह उपग्रह के माध्यम से डायरेक्ट-टू-मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करता है। यह 4G व 5G वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट, स्ट्रीमिंग और डेटा की सुविधा देता है।
    • निम्न भू-कक्षा (LEO): यह पृथ्वी की सतह के अपेक्षाकृत करीब (लगभग 160-1000 किमी की ऊंचाई पर) स्थित कक्षा है। यह सैटेलाइट इमेजिंग के लिए उपयोगी है और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भी यहीं स्थित है।
  • मुख्य विशेषता: इसमें 223 वर्ग मीटर का फेज़्ड ऐरे है, जो इसे LEO में स्थापित अब तक का सबसे बड़ा व्यावसायिक संचार उपग्रह बनाता है।
    • यह LVM3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड (6,100 किलोग्राम) है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPMs) के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना” को स्वीकृति दी। इस योजना का उद्देश्य देश में रेयर अर्थ मैग्नेट्स की निरंतर और दीर्घकाल तक आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा इनके आयात पर निर्भरता कम करना है।

  • सिंटरिंग (Sintering) के बारे में: सिंटरिंग एक प्रक्रिया है जिसमें मैग्नेट यानी चुंबकीय पदार्थों को बिना पिघलाए अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है। इससे मैग्नेट मजबूत होता है, उसकी चुंबकीय क्षमता बढ़ती है और वह जंग लगने से अधिक सुरक्षित रहता है।

REPMs विनिर्माण योजना की मुख्य विशेषताएं

  • वित्तीय परिव्यय: 7,280 करोड़ रुपये
    • वित्तीय प्रोत्साहन व्यवस्था: 
      • 6,450 करोड़ रुपये:  बिक्री-आधारित प्रोत्साहन (5 वर्षों तक)
      • 750 करोड़ रुपये: संयंत्र/फैसिलिटी की स्थापना के लिए पूंजीगत सब्सिडी
  • उद्देश्य: भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की एकीकृत REPMs विनिर्माण क्षमता स्थापित करना।
  • लाभार्थियों में विनिर्माण क्षमता का आवंटन:
    • 6,000 MTPA क्षमता वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से 5 लाभार्थियों को आवंटित की जाएगी।
    • प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 1,200 MTPA विनिर्माण क्षमता आवंटित की जा सकती है।
  • “एंड-टू-एंड” विनिर्माण एकीकरण: यह योजना उन सुविधाओं के विनिर्माण का समर्थन करेगी जो पूरी उत्पादन श्रृंखला को शामिल करती हैं। पूरी उत्पादन श्रृंखला में शामिल है:
    • रेयर अर्थ ऑक्साइड → धातुएं →मिश्र धातुएं →तैयार रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट्स। 
  • योजना की कुल अवधि: 7 वर्ष
    • 2 वर्ष: संयंत्र/फैसिलिटी की स्थापना (विकास अवधि में प्रोत्साहन) के दौरान;
    • 5 वर्ष: बिक्री के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन वितरण।

गूगल के CEO ने घोषणा की है कि कंपनी ने दीर्घकालिक अनुसंधान पहल, प्रोजेक्ट सनकैचर पर कार्य करना शुरू कर दिया है। यह पहल अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा संचालित डेटा केंद्रों को स्थापित करने पर केंद्रित है।  

प्रोजेक्ट सनकैचर के बारे में

  • यह गूगल की एक पहल है। इसका उद्देश्य निम्न भू-कक्षा में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले उपग्रहों के माध्यम से अंतरिक्ष में मशीन लर्निंग (LM) कंप्यूटिंग की संभावनाओं का परीक्षण करना है।
  • प्रत्येक उपग्रह में गूगल के कस्टम-बिल्ट टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) चिप्स लगाए जाएंगे। 
  • लाभ:
    • पृथ्वी-आधारित डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभाव से बचाव होगा।
    • अंतरिक्ष में स्थापित डेटा केंद्रों को विद्युत आपूर्ति अवरुद्ध होने या कटने, समुद्र के नीचे की केबल्स के कटने और प्राकृतिक आपदाओं जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। 
    • यह पहल डेटा संप्रभुता को सुविधाजनक बनाएगी, क्योंकि 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि के तहत बाहरी अंतरिक्ष किसी भी राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं है।

भारत और फ्रांस ने भारत में डायरेक्ट फायरिंग साइट नेविगेशन सिस्टम के संयुक्त उत्पादन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस प्रणाली में निम्नलिखित घटक शामिल हैं:

  • SIGMA 30N नेविगेशन सिस्टम: यह GPS के बिना स्वायत्त तोपखाने (Artillery) संचालन को सक्षम बनाता है।
  • CM3-MR डायरेक्ट फायरिंग साइट: इसे तोपखाने की दक्षता और ड्रोन-रोधी सटीकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

डायरेक्ट फायरिंग साइट नेविगेशन सिस्टम की मुख्य विशेषताएं

  • स्वायत्तता: यह प्रणाली GPS पर निर्भर हुए बिना कार्य करती है। इससे व्यापक 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' (सिग्नल जैमिंग) वाले परिवेश में भी परिचालन की विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
  • बहुमुखी प्रतिभा: यह भारी तोपखाने और रडार से लेकर सचल वायु रक्षा प्रणालियों तक, विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर के साथ आसानी से एकीकृत हो जाता है।
  • डायरेक्ट-फायर: यह दिखाई देने वाले लक्ष्यों (जैसे कि ड्रोन) पर तत्काल हमले के लिए उन्नत थर्मल और ऑप्टिकल साइट्स का उपयोग करता है।

भारत ने ध्रुव64/DHRUV64 माइक्रोप्रोसेसर लॉन्च किया।

ध्रुव64/DHRUV64 के बारे में:

  • यह भारत का पूरी तरह से स्वदेशी पहला 1.0 गीगाहर्ट्ज (GHz), 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।
    • माइक्रोप्रोसेसर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे मोबाइल, कंप्यूटर आदि के मस्तिष्क होते हैं।
  • विकासकर्ता: माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम (MDP) के तहत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा।
  • भारत द्वारा विकसित अन्य माइक्रोप्रोसेसर: शक्ति/SHAKTI (2018, IIT मद्रास), अजीत/AJIT (2018, IIT बॉम्बे), विक्रम/VIKRAM (2025, ISRO–SCL), और तेजस64/THEJAS64 (2025, C-DAC)।
    • अगली पीढ़ी के धनुष (Dhanush) और धनुष+ (Dhanush+) प्रोसेसर विकास के अधीन हैं।
  • महत्त्व: भारत वैश्विक स्तर पर निर्मित होने वाले सभी माइक्रोप्रोसेसर का लगभग 20% उपभोग करता है।

यह पहली बार है, जब 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गैर-संचारी रोगों (NCDs) और मानसिक स्वास्थ्य को संयुक्त रूप से संबोधित करने के लिए एक राजनीतिक घोषणा-पत्र को अपनाया गया। इसमें 2030 के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं (इंफोग्राफिक्स देखिए)।

घोषणा-पत्र के मुख्य बिंदु

  • विस्तारित दायरा: इसमें गैर-संचारी रोगों (NCDs) से संबंधित नवीन पहलुओं जैसे- मुख संबंधी स्वास्थ्य (oral health), फेफड़ों का स्वास्थ्य, बाल्यावस्था के दौरान कैंसर आदि को शामिल किया गया है।
  • नए निर्धारकों को शामिल किया गया: वायु प्रदूषण, स्वच्छतापूर्वक खाना बनाना, सीसे के संपर्क में आना और खतरनाक रसायनों को भी इसमें शामिल किया गया है।
  • डिजिटल स्वास्थ्य जोखिम: पहली बार इसमें डिजिटल स्वास्थ्य जोखिमों को शामिल किया गया है। उदाहरण के लिए- सोशल मीडिया से होने वाला नुकसान; स्क्रीन पर अत्यधिक समय व्यतीत करना; गलत सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार (Disinformation) आदि।
  • कठोर विनियमन: तंबाकू, अस्वास्थ्यकर भोजन, ट्रांस फैट्स और ई-सिगरेट के लिए कठोर नियमों पर बल दिया गया है।
  • समग्र-सरकार और समग्र-समाज दृष्टिकोण: इसमें नागरिक समाज, युवाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और निजी क्षेत्रक की भागीदारी शामिल है।
  • स्पष्ट जवाबदेही: संयुक्त राष्ट्र महासचिव लक्ष्यों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और WHO इसमें सहयोग करेगा।

घोषणा-पत्र का महत्व

  • NCDs के कारण प्रतिवर्ष लगभग 1.8 करोड़ असामयिक मृत्यु होती हैं।
    • ये रोग लंबी अवधि के होते हैं और आनुवंशिक, शारीरिक, पर्यावरणीय एवं व्यवहारिक कारकों के संयोजन का परिणाम होते हैं।
  • संपूर्ण विश्व में 1 अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हैं।
  • NCDs और मानसिक स्वास्थ्य विकार दोनों ही सामान्य एवं रोके जा सकने वाले कारकों से प्रेरित हैं: जैसे- तंबाकू, अस्वास्थ्यकर खाद्य व पेय पदार्थ, शराब, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण। 

NCDs और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भारत में आरंभ की गई पहलें

NCDs के लिए पहलें:

  • अमृत/AMRIT (उपचार के लिए किफायती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण {Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment} ): कैंसर, हृदय रोगों आदि के उपचार के लिए सस्ती दवाएं तथा विश्वसनीय प्रत्यारोपण उपलब्ध कराना।
  • ईट राइट इंडिया: FSSAI द्वारा संचालित यह आंदोलन स्वास्थ्यप्रद खान-पान को बढ़ावा देता है।
  • फिट इंडिया मूवमेंट (2019): यह शारीरिक रूप से सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने और फिटनेस को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने पर लक्षित है। 
  • मानसिक स्वास्थ्य के लिए पहलें:
    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP), 1982: निकट भविष्य में सभी के लिए न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करना।
    • अन्य: टेली-मानस (Tele-MANAS), मनोदर्पण आदि।

भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नाइट्रोफ्यूरान्स अवशेषों की उपस्थिति के परीक्षण के लिए अंडों के नमूने एकत्र करने हेतु अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया।

नाइट्रोफ्यूरान्स के बारे में

  • नाइट्रोफ्यूरान्स ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दवाओं का एक वर्ग है। उदाहरण के लिए- फ़्यूराज़ोलिडोन, नाइट्रोफ़्यूराज़ोन आदि।
  • इनका उपयोग आमतौर पर पशु चिकित्सा दवाओं के रूप में जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
  • हालांकि, भारत में खाद्य-उत्पादन करने वाले पशुओं के उपयोग के लिए इन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • चिंताएं: ये जीनविषाक्त, उत्परिवर्तनकारी और कैंसरकारी होते हैं। इनके अवशेष भोजन के पकने के बाद भी बने रह सकते हैं।

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अमरावती क्वांटम वैली (AQV - Amaravati Quantum Valley)

एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र या क्लस्टर जिसे आंध्र प्रदेश में क्वांटम प्रौद्योगिकी के विकास और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

क्वांटम रिसर्च पार्क (QuRP)

एक समर्पित सुविधा या केंद्र जो क्वांटम प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है, जिसमें प्रयोगशालाएं, सह-कार्य स्थान (co-working spaces) और सहयोग के अवसर शामिल हैं।

क्वांटम स्टार्टअप्स (Quantum Startups)

नई कंपनियां जो क्वांटम प्रौद्योगिकियों के विकास और व्यावसायीकरण पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जैसे कि क्वांटम कंप्यूटिंग हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, या क्वांटम-आधारित सेवाएं।

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