संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 (NATIONAL SECURITY STRATEGY 2025 OF THE USA) | Current Affairs | Vision IAS

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संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 (NATIONAL SECURITY STRATEGY 2025 OF THE USA)

28 Jan 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 (NSS 2025) जारी की है। NSS जारी करना संयुक्त राज्य अमेरिका में एक वैधानिक आवश्यकता है, जिसमें अमेरिकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं, सिद्धांतों और फोकस को निर्धारित किया जाता है।

NSS 2025 की प्रमुख विशेषताएं

  • मुनरो सिद्धांत का पुनर्समर्थन: यह रणनीति पश्चिमी गोलार्ध को शीर्ष रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करती है।
    • इसमें लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिका की प्रधानता पर बल दिया गया है।
    • ज्ञातव्य है कि मुनरो सिद्धांत (1823) पश्चिमी गोलार्ध में यूरोपीय शक्तियों के गैर-हस्तक्षेप से संबंधित था।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा का आर्थिक सुदृढ़ता से जुड़ाव: यह पुन: औद्योगिकीकरण, महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच और ऊर्जा प्रभुत्व पर केंद्रित है। इसके लिए व्यापार पारस्परिकता, टैरिफ और बाजार पहुंच को प्रमुख नीतिगत साधनों के रूप में उपयोग किया जाएगा।
  • वैचारिक बदलाव: इस रणनीति में 'मूल्य-आधारित लोकतंत्र के प्रोत्साहन' के स्थान पर "सभ्यतागत बहुलवाद" को अपनाया गया है। इसमें अन्य देशों की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था में अमेरिका के हस्तक्षेप को समाप्त करने की बात कही गई है।
  • एशिया की भूमिका: एशिया को अमेरिका के भविष्य के लिए प्रमुख माना गया है। इसमें अमेरिका की सुरक्षा के लिए एक 'स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत' के संकल्प को दोहराया गया है।
  • महान शक्ति गतिशीलता: इसमें अब रूस और चीन को 'अस्तित्वगत खतरे' के रूप में चिन्हित नहीं किया गया है।
  • "गोल्डन डोम": इसमें विशेष रूप से सहयोगियों की सामूहिक रक्षा के बजाय 'होमलैंड सुरक्षा' (स्वदेश की रक्षा) के लिए एक अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा कवच विकसित करने का प्रयास किया गया है।

वैश्विक निहितार्थ 

  • आर्थिक भूगोल का सैन्यीकरण: संसाधन-संपन्न क्षेत्र, जैसे लैटिन अमेरिका और आर्कटिक, आर्थिक सुरक्षा (जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा माना जाता है) के लिए रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के मंच बन गए हैं।
    • वेनेजुएला (ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व और ऑपरेशन सदर्न स्पीयर) और ग्रीनलैंड में हालिया अमेरिकी कार्रवाइयों को इसी परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है।
    • वेनेजुएला के पास सबसे बड़ा तेल भंडार और लैटिन अमेरिका का सबसे अधिक स्वर्ण भंडार है, जबकि ग्रीनलैंड दुर्लभ भू तत्वों (जैसे क्वानफजेल और टैनब्रीज़ निक्षेप), तेल और गैस संसाधनों से समृद्ध है।
  • तानाशाही शासनों का सामान्यीकरण: NSS के माध्यम से विदेशों में उदार लोकतांत्रिक मूल्यों को थोपने का त्याग किया गया है और अमेरिकी हितों के साथ तालमेल बिठाने के लिए निरंकुश शासनों के साथ काम करने का यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया गया है।
    • इससे पाकिस्तान जैसे निरंकुश देशों को लाभ हो सकता है, क्योंकि मानदंडों और नियम-आधारित मानवाधिकारों को लागू करने की अमेरिकी इच्छा कम हो गई है।
  • नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा: उदाहरण के लिए, ट्रंप द्वारा रणनीतिक कारणों से ग्रीनलैंड या पनामा नहर के विलय की धमकी देना महत्वपूर्ण वैश्विक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
    • संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2 कानूनी रूप से राज्यों को आत्मरक्षा और सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत सामूहिक कार्रवाई के अलावा बल प्रयोग से बचने का प्रावधान करता है।
  • बहुपक्षवाद का कमजोर होना: NSS में कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को "संप्रभुता को क्षीण करने वाले हस्तक्षेप" के रूप में वर्णित किया गया है और राष्ट्रीय हितों से जुड़े द्विपक्षीय जुड़ाव (लचीला यथार्थवाद) को प्राथमिकता दी गई है।
    • उदाहरण: हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंकटाड सहित 66 संगठनों से स्वयं को अलग कर लिया। इसके अलावा वह पहले भी विभिन्न संगठनों से हट चुका है।
  • ग्लोबल साउथ को सहायता में कमी: NSS में 'ग्लोबल साउथ' शब्द को हटा दिया गया है और विदेशी प्रतिबद्धताओं के बजाय घरेलू आर्थिक पुनरुद्धार को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, इसमें सहायता को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ा गया है।
    • अमेरिका दुनिया में सहायता देने वाला सबसे बड़ा एकल दाता है, जो वैश्विक आधिकारिक विकास सहायता का 30% हिस्सा प्रदान करता है।
  • विश्व का संभवतः 'प्रभाव क्षेत्रों' में विभाजन: ऐसा इसलिए क्योंकि NSS में पश्चिमी गोलार्ध पर ध्यान केंद्रित किया गया है और क्षेत्रीय अभिकर्ताओं से अपनी सुरक्षा स्वयं प्रबंधित करने का आग्रह किया गया है।
    • यह चीन को एशिया, हिंद-प्रशांत और ग्लोबल साउथ में अपनी सैन्य और आर्थिक उपस्थिति बढ़ाने की अनुमति देती है।
  • हथियारों की प्रतिस्पर्धा: परमाणु आधुनिकीकरण और निवारण पर NSS का जोर हथियारों की प्रतिस्पर्धा को तेज करने और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण को कमजोर करने का जोखिम उत्पन्न करता है।

                                                                                  भारत के लिए निहितार्थ

                    अवसर 

                  चुनौतियां 

संबंधों में सुधार: NSS में भारत के साथ बढ़ते वाणिज्यिक संबंधों की परिकल्पना की गई है और इसे उन प्रमुख शक्तियों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है जो अपने 'प्रभाव क्षेत्र' की आकांक्षा को स्वीकार करती हैं।

व्यापार और तकनीक का शस्त्रीकरण: NSS प्रशुल्क, निर्यात नियंत्रण, प्रतिबंध और प्रौद्योगिकी-निषेध को रणनीतिक उपकरणों के रूप में वैधता प्रदान करती है। उदाहरणतः, भारत को उच्च शुल्क (50%, प्रस्तावित वृद्धि 500% तक) तथा अपनी तकनीकी मानकों और निर्यात नियंत्रणों को अमेरिकी हितों के अनुरूप ढालने के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

तकनीक-संचालित रणनीतिक लाभ: NSS प्रौद्योगिकी, निर्यात और महत्वपूर्ण खनिजों की सोर्सिंग पर भारत-अमेरिका सहयोग की परिकल्पना करती है।

सुरक्षा दायित्व का स्थानांतरण: अमेरिका भारत से हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा की "प्रमुख जिम्मेदारी" लेने की अपेक्षा करता है, जबकि किसी औपचारिक संधि के समान सुरक्षा गारंटी प्रदान नहीं करता।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ी हुई भागीदारी: NSS हिंद-प्रशांत में क्वाड की भूमिका की पुष्टि करती है। 

इसमें भारत के एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम आधारित हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण का समर्थन किया गया है क्योंकि यह दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर देता है और ताइवान तथा 'प्रथम द्वीप श्रृंखला' के आसपास चीन का सामना करता है।

चीन के प्रति नरम रुख: उदाहरणतः, ट्रंप प्रशासन का चीन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख तथा "G2" व्यवस्था की चर्चा भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा सकती है।

रणनीतिक स्वायत्तता: वैचारिक बदलाव (हस्तक्षेप न करना) गैर-हस्तक्षेप के भारत के पुराने रुख के अनुरूप है। साथ ही, भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति संचालित करने की अनुमति प्रदान करती है।

द्विपक्षीय समझ में तनाव: NSS में यह दावा किया गया कि ट्रंप ने हालिया संघर्षों के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच "शांति वार्ता" कराई, जिसे नई दिल्ली ने अस्वीकार किया है।

 

भारत के लिए आगे की राह 

भारत उन क्षेत्रों में ( जहाँ अमेरिका के साथ उसके हित मेल खाते हों) संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ा सकता है। यह सहयोग विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, समुद्री समन्वय तथा आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हो सकता है। साथ ही, अमेरिका की अनिश्चितता से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए भारत अपनी बाह्य भागीदारियों में विविधता ला सकता है, जिसके तहत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (EUFTA) को अंतिम रूप देना तथा फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सुरक्षा एवं आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करना शामिल है।

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आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण

किसी भी एकल देश या स्रोत पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न देशों से माल और सेवाओं की खरीद को फैलाना।

रणनीतिक स्वायत्तता

यह वह क्षमता है जो एक देश को बाहरी दबावों या प्रतिबंधों से प्रभावित हुए बिना अपनी विदेश और रक्षा नीति के निर्णय स्वयं लेने की अनुमति देती है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अन्य देशों के साथ सहयोग करता है।

क्वाड (QUAD)

क्वाड, जिसे चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) भी कहा जाता है, चार देशों - भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका - के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक संवाद मंच है। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त, खुले और समावेशी व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, अवसंरचना विकास और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर सहयोग शामिल है।

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