सुर्ख़ियों में क्यों?
संसदीय स्थायी समिति ने 'अंतर्राष्ट्रीय भारतीय प्रवासी जिनमें अनिवासी भारतीय (NRIs), भारतीय मूल के व्यक्ति (PIOs), भारत का विदेशी नागरिक (OCIs) और प्रवासी श्रमिक शामिल हैं' से संबंधित टिप्पणियों/सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट जारी की।
समिति की रिपोर्ट के प्रमुख अंश
प्रमुख रेखांकित मुद्दे | प्रमुख सिफारिशें |
'अनिवासी भारतीयों' (NRIs) के लिए एक समान परिभाषा का अभाव: विभिन्न कानूनों में अनिवासी भारतीय (NRI) शब्द की परिभाषा अलग-अलग है। | विदेश मंत्रालय को 'अनिवासी भारतीय' (NRI) शब्द के लिए एकरूप परिभाषा प्रस्तावित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए, जो सभी अधिनियमों के साथ-साथ राज्य के विधानों पर भी बाध्यकारी हो। |
NRIs के लिए सीमित मतदान अधिकार: 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950' की धारा 20A के तहत, मतदाता सूची में पंजीकृत NRIs को मतदान के लिए भौतिक रूप से उपस्थित होना पड़ता है। | NRIs के मतदान अधिकारों का विस्तार करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित डाक मतपत्र प्रणाली (ETPBS) जैसे समाधानों पर विचार किया जा सकता है। |
भारतीय प्रवासियों से संबंधित प्रामाणिक डेटा का अभाव: भारत के प्रवासियों के आधिकारिक आंकड़े संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग के अनुमानों से मेल नहीं खाते, जिससे डेटा में विसंगतियां सामने आती हैं। | मंत्रालय, आव्रजन ब्यूरो के साथ मिलकर, रियल टाइम के आधार पर प्रवासियों और वापस आने वालों पर विश्वसनीय डेटा एकत्र करने और मिलान करने के लिए तंत्र विकसित कर सकता है। |
दोषसिद्ध व्यक्तियों के स्थानांतरण में धीमी प्रगति: द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों के बावजूद, पिछले तीन वर्षों में केवल 8 भारतीय कैदियों को विदेशों से भारत स्थानांतरित किया गया। | गृह मंत्रालय को शेष देशों के साथ दोषसिद्ध व्यक्तियों के स्थानांतरण के लिए द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने चाहिए और कैदियों की सुगम वापसी की सुविधा के लिए मौजूदा समझौतों में संशोधन करना चाहिए। |
प्रवासियों के संरक्षण में कमियाँ: अपंजीकृत/ अवैध भर्ती एजेंटों (RAs) की बढ़ती संख्या और अवैध प्रवासन की समस्या। | जिन राज्यों में प्रवासी संरक्षक (PoE) कार्यालय मौजूद नहीं हैं, वहाँ उनकी स्थापना की व्यवहार्यता पर विचार किया जाए तथा भर्ती एजेंटों (RAs) पर कड़ी निगरानी के लिए प्रभावी पर्यवेक्षण तंत्र विकसित किया जाए। |
भारतीय प्रवासी समुदाय का महत्व

- सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर: भारतीय मूल के समुदायों ने भारतीय संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं को दुनिया के हर कोने में पहुँचाया है।
- यह सांस्कृतिक आवाज दक्षिण-पूर्व एशिया में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है (जहाँ औपनिवेशिक काल से ही हिंदू मंदिर और भारतीय त्योहार फलते-फूलते रहे हैं)।
- आर्थिक योगदान: भारत एक दशक से अधिक समय से दुनिया में विप्रेषण का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत को लगभग 135.46 अरब अमेरिकी डॉलर का विप्रेषण प्राप्त हुआ।
- यह विप्रेषण प्रवाह भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 3–3.5% का योगदान करते हैं और सेवा निर्यात के बाद बाह्य वित्तपोषण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत हैं।
- राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव: भारतीय मूल के 260 से अधिक लोग विभिन्न देशों की सरकारों में निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें कुछ मामलों में राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष भी शामिल हैं।
- प्रवासी समुदाय की उपस्थिति भारत के रणनीतिक हितों को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिए- खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध वहाँ रहने वाले लाखों भारतीय श्रमिकों द्वारा निर्मित परस्पर निर्भरता से मजबूत होते हैं।
- ज्ञान और तकनीकी प्रभाव: भारतीय प्रवासी तेजी से वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। इसमें STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्र में भारतीयों की संख्या महत्वपूर्ण है।
- यह अनुमान लगाया गया है कि सिलिकॉन वैली में लगभग 25% स्टार्टअप का प्रबंधन भारतीय मूल के लोगों द्वारा किया जाता है।
अपने प्रवासी समुदाय के साथ भारत का जुड़ाव
भारत सरकार की प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ाव की नीति चार आधारभूत स्तंभों देखभाल (Care), जुड़ाव (Connect), उत्सव (Celebrate), और योगदान (Contribute) पर केंद्रित है।
- देखभाल:
- प्रवासी भारतीय बीमा योजना (PBBY): यह एक कल्याणकारी योजना है जो आपात स्थिति में सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने के लिए विदेश में भारतीय श्रमिकों को बीमा कवर प्रदान करती है।
- मदद (MADAD) पोर्टल: यह समयबद्ध तरीके से कांसुलर शिकायतों के निवारण के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है।
- प्रवासन और गतिशीलता समझौते: ये प्रमुख देशों के साथ साझेदारी समझौते है। इनका उद्देश्य भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करना तथा भारतीय छात्रों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों और पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को प्रोत्साहित करना है।
- जुड़ाव:
- प्रवासी भारतीय दिवस (PBD): यह एक प्रमुख कार्यक्रम है जो सरकार और प्रवासियों के बीच जुड़ाव के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- प्रवासी भारतीय दिवस हर दो वर्ष में 9 जनवरी को मनाया जाता है।
- नो इंडिया प्रोग्राम (KIP): यह प्रवासी युवाओं को भारत के इतिहास, विरासत और शासन व्यवस्था से प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से परिचित कराने हेतु डिज़ाइन किया गया कार्यक्रम है।
- प्रवासी भारतीय दिवस (PBD): यह एक प्रमुख कार्यक्रम है जो सरकार और प्रवासियों के बीच जुड़ाव के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- उत्सव:
- प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार (PBSA): यह प्रवासी भारतीयों के लिए भारत का सर्वोच्च सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है।
- गिरमिटिया जुड़ाव: गिरमिटिया भारतीयों के वंशजों के साथ जुड़ने और उनकी विरासत का जश्न मनाने के लिए अनुसंधान, आउटरीच और भविष्य में 'गिरमिटिया अध्ययन और अनुसंधान केंद्र' की स्थापना।
- योगदान:
- ज्ञान साझाकरण पहलें: जैसे कि वज्र (विजिटिंग एडवांस्ड ज्वाइंट रिसर्च फैकल्टी स्कीम-VAJRA), प्रभास (प्रवासी भारतीय अकादमिक और वैज्ञानिक संपर्क-PRABHASS) और वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (VAIBHAV) फेलोशिप। इनका उद्देश्य वैश्विक भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना है।
निष्कर्ष
भारतीय प्रवासी समुदाय वास्तव में विश्वभर में "भारत का विस्तारित परिवार" है, जो गर्व, सहयोग और प्रभाव का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। अब तक हासिल की गई उपलब्धियों को सुदृढ़ करते हुए और उभरती चुनौतियों का सक्रिय रूप से सामना करते हुए, भारत इस जीवंत सेतु को और अधिक मजबूत बना सकता है। आगे की राह एक द्विपक्षीय साझेदारी को बनाए रखने में निहित है कि भारत अपने प्रवासी समुदाय को सशक्त बनाए और प्रवासी समुदाय भारत को सशक्त बनाए। एक साझा दृष्टिकोण और निरंतर सहभागिता के साथ, यह गतिशील संबंध आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक समृद्धि और वैश्विक स्तर पर प्रमुखता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति बन सकता है।