अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0 (AMRUT 2.0) {Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation 2.0 Mission} | Current Affairs | Vision IAS

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अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0 (AMRUT 2.0) {Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation 2.0 Mission}

28 Jan 2026
1 min

In Summary

  • संसदीय पैनल ने एएमआरटी की समीक्षा की, जिसमें वित्तपोषण की कमियों, यूएलबी में ओएंडएम क्षमता संबंधी मुद्दों और खंडित शासन व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया।
  • सिफारिशों में एकीकृत शहरी जल प्रबंधन, राष्ट्रीय अपशिष्ट जल पुन: उपयोग नीति और जल सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक मांग अनुमान शामिल हैं।
  • अमृत ​​2.0 का लक्ष्य जल सुरक्षा और स्थिरता है, जिसमें परिणाम-आधारित वित्तपोषण, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी को अपनाने पर जोर दिया गया है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों? 

हाल ही में, आवास और शहरी मामलों की स्थायी समिति (18वीं लोकसभा) ने लोकसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट का शीर्षक "शहरी पेयजल पर विशेष जोर देने के साथ अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) की समीक्षा" है। 

अन्य संबंधित तथ्य

  • संसदीय पैनल ने व्यापक अमृत (AMRUT) ढांचे के भीतर शहरी पेयजल पर ध्यान केंद्रित किया। इसने वित्तपोषण, संस्थागत व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और अपशिष्ट जल प्रबंधन की जांच की।
  • रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि अमृत ने शहरी कायाकल्प में काफी प्रगति की है। हालांकि, जल-सुरक्षित शहरों के लक्ष्य तक पहुँचने में अभी भी महत्वपूर्ण बाधाएं बनी हुई हैं। 
  • यह इस बात पर बल देती है कि वर्तमान प्रयासों को विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। साथ ही, स्थायी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (SBM) और जल शक्ति अभियान जैसी योजनाओं के साथ समन्वय आवश्यक है। 

स्थायी समिति के अवलोकन और सिफारिशें 

विषय

रेखांकित प्रमुख मुद्दे

सिफारिशें

शहरी जल अवसंरचना वित्तपोषण

  • उच्चाधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति (HPEC) के अनुमानों और AMRUT 2.0 आवंटन के बीच व्यापक वित्तपोषण अंतर है। 
  • छोटे शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies: ULBs) में सीमित संचालन और रखरखाव (O&M) क्षमता है।
  • वित्तपोषण के अंतर को पाटने के लिए व्यापक राज्य-स्तरीय मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही बहुपक्षीय वित्तपोषण का प्रयास किया जाना चाहिए। 
  • एक प्रोत्साहन-आधारित O&M ढांचा स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही, 2047 तक के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन किया जाना चाहिए।

संस्थागत शासन

  • शासन विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं में बंटा हुआ है। 
  • मौजूदा अभिसरण तंत्र के बावजूद संस्थागत तालमेल की कमी है।
  • एक औपचारिक अंतर-मंत्रालयी समन्वय मंच बनाकर एकीकृत शहरी जल प्रबंधन (IUWM) को संस्थागत रूप देना चाहिए। राज्य स्तर पर IUWM सेल स्थापित की जानी चाहिए। 

निगरानी, डेटा और पारदर्शिता

  • जल कवरेज, गैर-राजस्व जल (NRW), मीटरिंग और राज्यों एवं ULBs के वित्तीय योगदान के संबंध में डेटा रिपोर्टिंग अपर्याप्त है। 
  • एक मानकीकृत परिणाम निगरानी ढांचा शुरू किया जाना चाहिए। 24x7 आपूर्ति और NRW पर डेटा के लिए एक सार्वजनिक डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च किया जाना चाहिए। 
  • जवाबदेही बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यय को ट्रैक करने हेतु एक मजबूत तंत्र लागू किया जाना चाहिए।

अपशिष्ट जल उपचार और पुन: उपयोग

  • सीवेज की एक बड़ी मात्रा अनुपचारित रहती है। 
  • मौजूदा सीवेज उपचार संयंत्र (STPs) का कम उपयोग किया जा रहा है। 
  • 100% उपचार प्राप्त करने के लिए प्रवर्तनीय बेंचमार्क के साथ एक राष्ट्रीय शहरी अपशिष्ट जल पुन: उपयोग नीति तैयार किया जाना चाहिए। 
  • राज्य-स्तरीय पुन: उपयोग नीतियों को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप पेयजल के डायवर्जन में होने वाली कमी को ट्रैक किया जाना चाहिए।

दीर्घकालिक मांग अनुमान

  • वर्तमान में वर्ष 2047 तक शहरी पेयजल की मांग के लिए कोई समेकित राष्ट्रीय स्तर का अनुमान नहीं है।
  • अगले 25-30 वर्षों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय मूल्यांकन शुरू किया जाना चाहिए। इसमें जनसंख्या वृद्धि, प्रवासन और जलवायु लचीलेपन को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
  • यह आकलन राष्ट्रीय शहरी जल सुरक्षा रणनीति (National Urban Water Security Strategy) के निर्माण का आधार बनेगा। 

 

 

 

 

 

निष्कर्ष

संसदीय पैनल इस बात पर बल देता है कि अमृत ने शहरी सेवा वितरण के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार किया है। हालांकि, यह गति, पैमाने और एकरूपता के मामले में पीछे रह गया है। अमृत के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए क्षमता संबंधी कमियों को दूर करना और मजबूत वित्तपोषण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही परिणाम-उन्मुख शासन को लागू करना भी अनिवार्य है। AMRUT 2.0 के साथ जल सुरक्षा, संधारणीयता और जवाबदेही पर अधिक ध्यान दिया गया है। यह निवेश को स्थायी शहरी परिवर्तन में बदल सकता है।

अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0 (AMRUT 2.0) के बारे में

  • लॉन्च की तिथि: 1 अक्टूबर, 2021 {AMRUT (2015-2021) के बाद का मिशन}।
  • नोडल मंत्रालय: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय।
  • प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme: CSS)। 
  • विषय: जलापूर्ति, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, हरित स्थान तथा पार्क और गैर-मोटर चालित शहरी परिवहन के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास। 

योजना की अन्य विशेषताएं:

  • परिणाम-आधारित वित्तपोषण: शहरों को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। 
  • सामुदायिक भागीदारी: महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष बल दिया गया है। 
  • पेय जल सर्वेक्षण: शहरों का जल गुणवत्ता, मात्रा और पुन: उपयोग पर आकलन करने के लिए एक प्रतिस्पर्धी निगरानी उपकरण (स्वच्छ सर्वेक्षण के समान)। 
  • PPP अधिदेश: 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को अपने आवंटन का कम से कम 10% सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से लागू करना होगा।
  • प्रौद्योगिकी उप-मिशन: लाइट हाउस परियोजनाओं और जल-क्षेत्र के स्टार्टअप्स को समर्थन देने पर ध्यान। 
  • गिग इकोनॉमी मॉडल (AMRUT मित्र पहल): एक अनूठा सामाजिक एकीकरण जहाँ युवाओं और महिलाओं को फीडबैक और मूल्यांकन भूमिकाओं के लिए शामिल किया जाता है।
  • अनिवार्य सुधार और शहरी शासन: दीर्घकालिक संधारणीयता सुनिश्चित करने के लिए फंड को विशिष्ट सुधारों जैसे राजकोषीय स्वास्थ्य और जल दक्षता से जोड़ा गया है।

कार्यान्वयन और योजना तंत्र

योजना एक बॉटम-अप, डेटा-संचालित प्लानिंग पदानुक्रम का पालन करती है:

  • शहर जल संतुलन योजना (CWBP): यह आधारभूत कदम है। शहर वर्तमान आपूर्ति, मांग और अंतराल का आकलन करते हैं।
  • शहर जल कार्य योजना (CWAP): CWBP में चिह्नित कमियों को दूर करने के लिए परियोजनाएं तैयार की जाती हैं। 
  • राज्य जल कार्य योजना (SWAP): केंद्र (शीर्ष समिति) को प्रस्तुत की जाने वाली शहरी योजनाओं का एकत्रीकरण। 
  • शहरी एक्विफर प्रबंधन योजना: यह योजना शहरी एक्विफर प्रणालियों में सकारात्मक भूजल संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करेगी। 

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City Water Balance Plan (CWBP)

The foundational planning document for cities under AMRUT 2.0, where current water supply, demand, and existing gaps are assessed to form the basis for future action plans.

Public-Private Partnership (PPP)

A collaboration between government entities and private sector companies to finance, build, and operate projects or services. PPPs are crucial for large-scale infrastructure development and can be leveraged for affordable rental housing initiatives.

Centrally Sponsored Scheme (CSS)

A scheme funded by the central government but implemented by state governments. Responsibilities and costs are shared between the Centre and the States, with specific guidelines and norms set by the central government.

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