डिस्कनेक्ट होने का अधिकार (Right to Disconnect) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

डिस्कनेक्ट होने का अधिकार (Right to Disconnect)

28 Jan 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में लोक सभा में एक गैर-सरकारी सदस्य द्वारा 'राइट टू डिस्कनेक्ट' विधेयक प्रस्तुत किया गया। 

राइट टू डिस्कनेक्ट (कार्य से असंबद्ध होने का अधिकार) क्या है?

  • राइट टू डिस्कनेक्ट एक कानूनी सुरक्षा है, जो कर्मचारियों को कार्य समय पूर्ण होने के बाद कार्य से असंबद्ध होने और नियोक्ता के संबंधित इलेक्ट्रॉनिक संचार की उपेक्षा करने की अनुमति देती है।
  • मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के अनुच्छेद 24 के आधार पर: 'प्रत्येक व्यक्ति को विश्राम और अवकाश का अधिकार है, जिसमें कार्य के घंटों की उचित सीमा और सवेतन आवधिक अवकाश शामिल हैं।'
  • राइट टू डिस्कनेक्ट का संवैधानिक आधार:
    • अनुच्छेद 21: प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण का अधिकार और गरिमा का अधिकार।
    • अनुच्छेद 39(e): यह राज्य को कर्मचारियों के स्वास्थ्य और शक्ति के दुरुपयोग को रोकने का निर्देश देता है।
    • अनुच्छेद 42: राज्य कार्य की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए उपबंध करेगा।

राइट टू डिस्कनेक्ट की आवश्यकता

  • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: डिजिटल युग में हर समय उपलब्ध रहने की अपेक्षा से अनिद्रा, अत्यधिक तनाव, नींद की कमी और मानसिक थकावट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • उत्पादकता में गिरावट: उदाहरण के लिए, विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात होता है कि प्रति सप्ताह 50 घंटे से अधिक कार्य करने पर उत्पादकता कम हो जाती है। इससे देश की समग्र आर्थिक संवृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • सामाजिक-मनोवैज्ञानिक प्रभाव: अत्यधिक कार्य करने से कार्य-जीवन संतुलन बिगड़ता है और सामाजिक संबंध प्रभावित होते हैं(जैसे - सामाजिक अलगाव)।
    • उदाहरण के लिए, 2024 में पुणे में अत्यधिक कार्य के कारण अर्न्स्ट एंड यंग के एक कर्मचारी की मृत्यु हो गई।
  • नियोक्ता-कर्मचारी संबंध: चौबीसों घंटे उपलब्ध न रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का खतरा शक्ति संतुलन को नियोक्ताओं के पक्ष में झुका देता है।
  • लैंगिक समानता: एक हालिया रिपोर्ट से ज्ञात होता है कि ऑडिटिंग, आईटी और मीडिया जैसी  पेशेवर नौकरियों में कार्यरत भारतीय महिलाएं प्रति सप्ताह 55 घंटे से अधिक कार्य करती हैं।

राइट टू डिस्कनेक्ट से संबंधित प्रमुख सावधानियां 

  • लॉजिस्टिक और अनुपालन संबंधी आवश्यकताएं: नियोक्ताओं को ऐसे क़ानून की निगरानी, क्रियान्वयन और पालन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रणालियां बनानी होंगी, खासकर जब टीमें अलग-अलग राज्यों या देशों में काम कर रही हों।
  • आवश्यक सेवाओं के लिए अपवाद: स्वास्थ्य सेवा, पुलिस, अग्निशमन सेवा, विद्युत, आईटी संचालन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को आपात स्थिति या परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के दौरान यह अधिकार नहीं दिया जा सकता है।
  • ऑन-कॉल ड्यूटी: संविदात्मक ऑन-कॉल जिम्मेदारियों वाले कर्मचारियों को संपर्क में रहने की आवश्यकता हो सकती है, और ऐसी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित और उचित पारिश्रमिक सहित निर्धारित किया जाना चाहिए।
  • उचित संचार: सार्वजनिक सुरक्षा या व्यावसायिक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, आपातकालीन या अप्रत्याशित परिस्थितियों में सीमित समय के लिए कार्यालय समय के बाद संपर्क की अनुमति दी जा सकती है।
  • कार्यान्वयन में लचीलापन: भारत में क्षेत्रीय, क्षेत्रकीय (सेक्टोरल) और परिचालन विविधताओं को ध्यान में रखते हुए नियोक्ताओं के लिए नीति-निर्माण में लचीलापन दिया जाना आवश्यक है।

'राइट टू डिस्कनेक्ट' पर वैश्विक स्थिति

  • फ्रांस का अल खोमरी कानून (2017): डिस्कनेक्ट होने के अधिकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश है।
  • ऑस्ट्रेलिया के फेयर वर्क कानून में 2024 का संशोधन: इसके अंतर्गत कर्मचारी काम के समय के बाद आने वाले संदेशों को अनदेखा कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इनकार करना अनुचित न हो (जैसे आपात स्थिति में)।
  • पुर्तगाल: हाँ "राइट टू डिस्कनेक्ट" क़ानून है, जिसके तहत आपात स्थिति को छोड़कर नियोक्ताओं के लिए काम के समय के बाहर कर्मचारियों से संपर्क करना अवैध है।
  • स्पेन: सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों को अपने डिजिटल उपकरण बंद (स्विच ऑफ) करने का अधिकार प्राप्त है।

निष्कर्ष

डिजिटल युग में अत्यधिक कार्य के बोझ के जवाब में 'राइट टू डिस्कनेक्ट' एक समयोचित उपाय है, जो कर्मचारियों के कल्याण को गरिमा, स्वास्थ्य और मानवीय कार्य परिस्थितियों जैसे संवैधानिक मूल्यों के साथ जोड़ता है। बढ़ते तनाव, लैंगिक प्रभावों और वैश्विक उदाहरणों को देखते हुए, उचित अवकाशों वाला एक संतुलित कानूनी ढांचा उत्पादकता या आवश्यक सेवाओं से समझौता किए बिना कार्य-जीवन संतुलन को बनाए रख सकता है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet