रामसर आर्द्रभूमियां (Ramsar Wetlands) | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

28 Jan 2026
11 min

In Summary

  • भारत ने गोगाबील झील (बिहार), सिलिसेरह झील (राजस्थान) और कोपरा जलाशय (छत्तीसगढ़) को रामसर सूची में शामिल किया है, जिससे कुल संख्या 96 हो गई है।
  • सिलिसेरह झील राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि है, जो सरिस्का बाघ अभ्यारण्य के लिए एक बफर क्षेत्र का काम करती है और विविध प्रकार के जीव-जंतुओं का घर है।
  • छत्तीसगढ़ में स्थित कोपरा जलाशय, बिहार में एक घुमावदार आर्द्रभूमि और अंतर्राष्ट्रीय आर्द्रभूमि मान्यता के लिए रामसर सूची के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

In Summary

भारत ने बिहार की गोगाबील झील, राजस्थान की सिलीसेढ़ झील और छत्तीसगढ़ के कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची अर्थात ‘रामसर सूची’ में शामिल किया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 96 हो गई है। 

सिलीसेढ़ झील के बारे में

  • अवस्थिति: राजस्थान के अलवर जिले के पैतपुर में। 
    • यह अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यह सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में स्थित है।
  • यह एक कृत्रिम (मानव-निर्मित) आर्द्रभूमि है। इसका निर्माण 1845 ई. में महाराजा विनय सिंह द्वारा रूपारेल नदी की एक सहायक जलधारा पर बांध (बंड) बनाकर किया गया था।
  • जैव विविधता: यहां इजिप्शियन गिद्ध, ब्लैक स्टॉर्क, बाघ, भारतीय पैंगोलिन, तेंदुआ और सांभर जैसी प्रजातियां देखी जा सकती हैं। 

कोपरा जलाशय के बारे में

  • अवस्थिति: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में।  
  • यह महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में स्थित एक जलाशय है।
  • इसके विस्तृत खुला जल-क्षेत्र में उथले और पोषक तत्वों से समृद्ध पश्च जल (बैकवॉटर) जैसी विशेषता देखी जा सकती है।
  • जैव विविधता: बार-हेडेड गूज, इजिप्शियन गिद्ध, रिवर टर्न, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल।
  • मुख्य खतरे: अवसाद का जमाव, आक्रामक गैर-देशज प्रजातियों की उपस्थिति तथा आसपास के क्षेत्र में गहन कृषि-कार्य

गोगाबील झील

  • अवलोकन: यह बिहार के कटिहार जिले में स्थित एक गोखुर आर्द्रभूमि (oxbow wetland) है। 
    • गोगाबील उत्तर में महानंदा और कंखार नदियों तथा दक्षिण एवं पूर्व में गंगा के प्रवाह से बनी है। 
  • महत्त्व: यह बिहार का पहला सामुदायिक रिज़र्व है। 
    • यह विभिन्न प्रकार के पक्षियों का पर्यावास है, जिनमें से कुछ प्रवासी पक्षी भी हैं। 

रामसर सूची के बारे में

  • उत्पत्तिआर्द्रभूमि अभिसमय के अंतर्गत रामसर सूची का प्रावधान किया गया। इस अभिसमय को 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। यह विश्व में संरक्षित क्षेत्रों का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
    • संयुक्त राष्ट्र के लगभग 90% सदस्य देश इस अभिसमय के “संविदा पक्षकार (Contracting Parties)” हैं। इनमें भारत भी शामिल है। 
  • महत्त्व: रामसर सूची में शामिल आर्द्रभूमियों को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष दर्जा मिलता है। इन स्थलों को ‘मानवता के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र’ माना जाता है।
  • मानदंड: किसी आर्द्रभूमि को “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि” सूची में शामिल होने के लिए रामसर अभिसमय द्वारा निर्धारित नौ में से कम-से-कम एक मानदंड को पूरा करना आवश्यक है।   

खाद्य और कृषि के लिए अंतर्राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन संधि (ITPGRFA) के शासी निकाय का 11वां सत्र लीमा (पेरू) में संपन्न हुआ।

ITPGRFA सत्र में, पहुंच और लाभ-साझाकरण के कामकाज के लिए बहुपक्षीय प्रणाली (Multilateral System: MLS) के विस्तार पर वार्ता विफल रही।

  • MLS 35 प्रमुख खाद्य फसलों और 29 चारे वाली फसलों के आनुवंशिक संसाधनों के साझाकरण को नियंत्रित करता है।
    • संयुक्त रूप से ये फसलें विश्व के पादप-आधारित आहार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हैं। ये संधि के परिशिष्ट 1 में वर्णित हैं।
    • जब कोई देश ITPGRFA को अपनाता है, तो वह इन फसलों की आनुवंशिक विविधता को MLS के माध्यम से अन्य सभी सदस्यों के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत होता है। इन फसलों की आनुवंशिक विविधता को विशेष रूप से सार्वजनिक जीन बैंकों से उपलब्ध कराया जाता है। 

11वें सत्र में प्रस्तुत समझौता प्रस्ताव

  • संशोधित मानक सामग्री हस्तांतरण समझौते (SMTA) को अपनाया गया। साथ ही, यह भी तय किया गया कि पर्याप्त भुगतान दरें और सीमाएं शासी निकाय के 12वें  सत्र में अनुमोदित की जाएंगी। 
    • SMTA के निम्नलिखित कार्य हैं-
      • पादप आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान को नियंत्रित करना; 
      • इस सामग्री के दुरुपयोग को रोकना; तथा 
      • यह सुनिश्चित करना कि उत्पन्न होने वाले किसी भी वाणिज्यिक लाभ को निष्पक्ष व न्यायसंगत तरीके से साझा किया जाए।
  • भुगतान प्रणाली, परिशिष्ट I का विस्तार, और डिजिटल अनुक्रम सूचना (DSI) के नियम जैसे प्रमुख मुद्दे 12वें सत्र के लिए स्थगित कर दिए गए।

भारत का पक्ष

  • भारत ने संप्रभु अधिकारों और निष्पक्ष लाभ-साझाकरण की रक्षा करने की मांग की।
  • भारत ने अपारदर्शी मसौदे का विरोध किया और मांग की कि सभी अनसुलझे मुद्दों पर 12वें सत्र में फिर से विचार किया जाए।
  • “खाद्य एवं कृषि के लिए विश्व के भूमि और जल संसाधनों की स्थिति (SOLAW) 2025” रिपोर्ट
    • प्रत्येक दो वर्षों में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी की जाती है।
  • ग्लोबल एनवायरनमेंट आउटलुक (GEO)
    • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने GEO के 7वें संस्करण: 'ए फ्यूचर वी चूज़' (A Future We Choose) रिपोर्ट जारी की।

तमिलनाडु की एक IAS अधिकारी सुप्रिया साहू को भारत में प्लास्टिक और वन्यजीव संरक्षण सहित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों पर उनके अग्रणी नेतृत्व के लिए 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार प्रदान किया गया।

  • ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार के बारे में:
    • यह संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरणीय सम्मान है।
    • यह पुरस्कार 2005 से प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
    • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) जलवायु परिवर्तन, प्रकृति व जैव विविधता के नुकसान तथा प्रदूषण व अपशिष्ट के 'तीहरे ग्रहीय संकट' (triple planetary crisis) से निपटने के लिए अभिनव और सतत समाधानों पर कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को सम्मानित करता है।
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चंडीगढ़ ने ऊर्जा संरक्षण और दक्षता के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) 2025 में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) के बारे में:

  • यह पुरस्कार विद्युत मंत्रालय के तहत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा प्रदान किया जाता है। यह ऊर्जा दक्षता में उत्कृष्ट उपलब्धियों को पहचानने के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है।
  • यह पुरस्कार राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक (SEEI) के आधार पर प्रदान किया जाता है। 
    • SEEI ऊर्जा दक्ष अर्थवव्यस्था के लिए गठबंधन  (AEEE) के सहयोग से विकसित एक व्यापक राष्ट्रीय आकलन फ्रेमवर्क है। इसे BEE ने विकसित किया है। 
    • यह सूचकांक राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता पहलों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए “मांग आधारित क्षेत्रकों” का उपयोग करता है। ये क्षेत्रक हैं- भवन, उद्योग, नगरपालिका सेवाएं, परिवहन आदि।  

ऑपरेशन थंडर 2025 के तहत 30,000 जीवित जानवर जब्त किए गए।

ऑपरेशन थंडर के बारे में

  • इसे इंटरपोल और विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) द्वारा इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑन कॉम्बेटिंग वाइल्डलाइफ एंड फॉरेस्ट्री क्राइम (ICCWC) के समर्थन से समन्वित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अवैध रूप से व्यापार किए गए वन्यजीवों और वानिकी उत्पादों को रोकना एवं जब्त करना है। साथ ही, इस प्रकार के पर्यावरणीय अपराधों में शामिल आपराधिक नेटवर्कों की पहचान करना, उन्हें बाधित करना और नष्ट करना है।

हाल ही में, गुजरात के रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में बाघ की उपस्थिति दर्ज की गई। इसी के साथ गुजरात ने 33 वर्षों के बाद पुनः 'टाइगर स्टेट' (बाघ पर्यावास वाला राज्य) का दर्जा हासिल कर लिया।

  • गुजरात अब भारत का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जहां तीन प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियां (शेर, बाघ और तेंदुआ) एक साथ मौजूद हैं।

रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • अवस्थिति: यह मध्य गुजरात के दाहोद जिले में गुजरात-मध्य प्रदेश सीमा पर स्थित है।
  • इतिहास: इसे 1982 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
    • विशेषता: पूरे राज्य में इस अभयारण्य में स्लोथ बीयर (भालू) की सर्वाधिक आबादी पाई जाती है।
  • वन्यजीव: तेंदुआ, स्लोथ बीयर, नीलगाय, चौसिंगा मृग आदि।
  • पारिस्थितिक महत्त्व: यहां के वन मध्य गुजरात की एक प्रमुख नदी, पानामा नदी के जलग्रहण क्षेत्र का निर्माण करते हैं। 

भारत 2032 तक अंटार्कटिका में वर्तमान 'मैत्री' अनुसंधान केंद्र को नए डिजाइन वाले मैत्री-II स्टेशन से बदलने की योजना बना रहा है। 

  • मैत्री-II को एक अत्याधुनिक और वर्ष भर परिचालन योग्य अनुसंधान केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि करेगा। 

मैत्री अनुसंधान केंद्र के बारे में

  • इसका निर्माण 1988 में किया गया था।
  • यह मध्य ड्रोनिंग मौड लैंड (Dronning Maud land) में स्थित सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। ड्रोनिंग मौड लैंड शिरमाकर (अंटार्कटिका) के दक्षिण में स्थित है।

भारत के अन्य ध्रुवीय अनुसंधान केंद्र

  • भारती (अंटार्कटिका), दक्षिण गंगोत्री (अंटार्कटिका में स्थित भारत का पहला वैज्ञानिक आधार केंद्र, जो अब सेवामुक्त हो चुका है), और हिमाद्रि (आर्कटिक)।
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भारत के 100 गांवों को 'सुनामी के लिए तैयार' बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। 

वर्तमान में, ओडिशा के 24 तटीय गांवों को यूनेस्को के सुनामी तैयारी मान्यता कार्यक्रम (TRRP) के तहत 'सुनामी के लिए तैयार' गांवों के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता राष्ट्रीय सुनामी तैयारी मान्यता बोर्ड (NTRB) द्वारा सत्यापन के आधार पर दी गई है।

  • ‘सुनामी के लिए तैयार’ गांव (Tsunami-ready village): किसी गांव को 'सुनामी के लिए तैयार' तब प्रमाणित किया जाता है, जब वहां: 
    • सुनामी के बारे में उच्च जागरूकता हो;
    • खतरे के खिलाफ तैयारी और मैपिंग की गई हो;
    • निकासी हेतु मार्गदर्शक मानचित्रों (Evacuation maps) को सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किया गया हो;
    • 24 घंटे चेतावनी प्रणाली उपलब्ध हो;
    • मॉक ड्रिल्स में नियमित भागीदारी हो आदि।

यूनेस्को-IOC सुनामी तैयारी मान्यता कार्यक्रम (TRRP) के बारे में 

  • TRRP का परिचय: यह यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (UNESCO-IOC) का एक अंतर्राष्ट्रीय स्वैच्छिक समुदाय-आधारित प्रयास है। यह वैश्विक तटीय क्षेत्रों में जोखिम की रोकथाम और शमन को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
  • कार्यप्रणाली: इसमें लगातार मूल्यांकन के लिए 12 तैयारी संकेतक शामिल हैं। एक बार मान्यता मिलने के बाद, इसे प्रत्येक चार वर्षों में नवीनीकृत किया जाता है।
  • भारत में कार्यान्वयन एजेंसी: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा स्थापित NTRB इसे लागू करता है। 
    • NTRB का अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) का  निदेशक होता है। इसमें INCOIS, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), और गृह मंत्रालय के अधिकारी शामिल होते हैं।

सुनामी से निपटने के लिए भारत के अन्य प्रयास

  • सुनामी जोखिम प्रबंधन दिशा-निर्देश: NDMA के दिशा-निर्देश बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण, शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) की सिफारिश करते हैं।
  • भारतीय सुनामी पूर्व-चेतावनी केंद्र (ITEWC): यह अंतिम-मील कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए हिंद महासागर के 25 तटीय देशों को सुनामी संबंधी सलाह प्रदान करता है।
  • तकनीक का उपयोग: सुनामी की चेतावनी के लिए बॉटम प्रेशर रिकॉर्डर्स (BPRs) बोय (buoys) और उपग्रह संचार का उपयोग किया जाता है।

सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना {Subansiri Lower Hydroelectric Project (LEP)}

  • यह भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इसमें प्रत्येक 250 मेगावाट की 8 इकाइयां शामिल हैं। इसे 'रन-ऑफ-द-रिवर' योजना के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएं नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और माइक्रो टरबाइन जनरेटर का उपयोग करती हैं। इससे जल द्वारा वहन की जाने वाली गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) को विद्युत में परिवर्तित किया जा सकता है। 
  • क्रियान्वयन: इसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (NHPC) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
  • अवस्थिति: यह अरुणाचल प्रदेश और असम की सीमा पर उत्तरी लखीमपुर में स्थित है।
  • सुबनसिरी नदी, ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • श्योक सुरंग:
    • अवस्थिति: यह पूर्वी लद्दाख में दुरबुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी (DS-DBO) रोड पर स्थित है।
      • यह सड़क लेह को चीन सीमा (LAC) के पास स्थित उच्च ऊंचाई वाली दौलत बेग ओल्डी (DBO) सैन्य चौकी से जोड़ती है।
    • विशेषताएं: सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित 920 मीटर लंबी कट-एंड-कवर सुरंग।
    • महत्त्व: यह अत्यधिक हिमपात, हिमस्खलन और चरम तापमान वाले क्षेत्रों में सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। 

सिक्किम में चो ला और डोक ला दर्रों को भारत रणभूमि दर्शन पहल के तहत रणभूमि पर्यटन के लिए खोला गया है।

  • भारत रणभूमि दर्शन नागरिकों को ऐतिहासिक युद्ध क्षेत्रों और सैन्य महत्त्व के स्थलों पर जाने की सुविधा देने के लिए भारतीय थल सेना और पर्यटन मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।

दर्रों के बारे में:

  • चो ला दर्रा:
    • अवस्थिति: यह पूर्वी हिमालय की चोला रेंज में स्थित है। यह समुद्र तल से 17,782 फीट ऊपर है।
      • नाथू ला और जेलेप ला दर्रे भी चोला रेंज में स्थित हैं।
    • यह दर्रा सिक्किम और चुम्बी घाटी को जोड़ता है।
    • यहां 1967 में भारत-चीन के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था।
  • डोका ला (डोकलाम) दर्रा:
    • अवस्थिति: यह पूर्वी सिक्किम में डोकलाम पठार के किनारे पर भारत, भूटान और चीन के त्रि-संगम के निकट स्थित है। 
    • यह 2017 में भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध (border standoff) का स्थल था।
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