सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने डॉ. सोहेल मलिक बनाम भारत संघ एवं अन्य वाद (2025) में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 या पॉश (PoSH) अधिनियम, 2013 के दायरे का विस्तार किया है।
अन्य संबंधित तथ्य
- उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है कि यदि किसी महिला का अपने संगठन के बाहर के किसी व्यक्ति द्वारा कार्यस्थल पर उत्पीड़न किया जाता है, तब वह अपने स्वयं के कार्यस्थल की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास शिकायत दर्ज करा सकती है, न कि तृतीय पक्ष के प्रतिष्ठान की ICC के समक्ष।
- यह निर्णय पीड़ित महिला के कार्यस्थल पर गठित ICC को किसी अन्य कार्यस्थल के कर्मचारी पर भी अधिकार-क्षेत्र प्रयोग करने की अनुमति देता है।
पॉश (PoSH) अधिनियम 2013 के मुख्य प्रावधान
- PoSH अधिनियम का आधार उच्चतम न्यायालय का विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) का निर्णय है।
- अधिनियम की धारा 16 शिकायत दर्ज कराने वाली महिला की पहचान गोपनीय रखने के लिए शिकायत और जांच कार्यवाही की सामग्री के प्रकाशन या उसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाती है।
प्रमुख परिभाषाएं | |
यौन उत्पीड़न | इसमें निम्नलिखित में से कोई भी एक या अधिक अवांछित कृत्य या व्यवहार (चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या निहितार्थ रूप से) शामिल हैं, जो निम्नानुसार हैं:
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कार्यस्थल |
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पीड़ित/व्यथित महिला | इसमें सभी महिलाएं शामिल हैं, चाहे उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो और चाहे वे संगठित या असंगठित क्षेत्रकों, सार्वजनिक या निजी क्षेत्रकों में हों। इसमें क्लाइंट्स, ग्राहक और घरेलू कामगार भी शामिल हैं। |
शिकायत निवारण तंत्र | |
शिकायत समिति
| आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC)
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शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया |
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सुलह (Conciliation) |
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शिकायत की जाँच |
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दोषी के विरुद्ध कार्रवाई |
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अपील |
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झूठी शिकायत |
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पॉश (PoSH) अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दे
- आंतरिक समितियों (ICCs) का गठन न होना: अनेक संस्थान या तो ICCs का गठन नहीं करते हैं या उनका गठन अनुचित तरीके से करते हैं (उदाहरण के लिए, बाह्य सदस्य की अनुपस्थिति)। इससे अधिनियम का मूल प्रवर्तन तंत्र कमजोर हो जाता है।
- उदाहरण: देश के 30 राष्ट्रीय खेल महासंघों में से 16 ने अब तक ICC का गठन नहीं किया था।
- अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्रक: अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में, जहाँ नियोक्ता-कर्मचारी संरचनाएं अस्पष्ट हैं, वहां PoSH अधिनियम के संरक्षण तक पहुंचना और उन्हें लागू करना कठिन हो जाता है।
- उदाहरण: भारत की लगभग 80% महिला कामगार अनौपचारिक क्षेत्रक में कार्यरत हैं।
- प्रक्रियात्मक अस्पष्टता: जांच कैसे की जाए, इस बारे में कानून में अस्पष्टता तथा उत्पीड़न का सामना करने पर किसके पास जाना है, इसके बारे में महिला कर्मचारियों में पर्याप्त जागरूकता का अभाव जैसी समस्याएं हैं। ये समस्याएं इसके प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- कम रिपोर्टिंग: कलंक, प्रतिशोध के डर और करियर पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका के कारण पीड़िता प्रायः शिकायत दर्ज नहीं कराती हैं। अधिकारों और प्रक्रिया के प्रति जागरूकता की कमी भी रिपोर्टिंग को कम करती है।
- साक्ष्य संबंधी कठिनाइयां: यौन उत्पीड़न प्रायः निजी तौर पर होता है, जिससे इसे साबित करना मुश्किल हो जाता है; साक्ष्य को संभालने में स्पष्टता और मानकीकरण की कमी पीड़ित की सुरक्षा और आरोपी के प्रति निष्पक्षता दोनों को कमजोर कर सकती है।
- ग्रे एरिया (Grey areas): ICC को उत्पीड़न के मामलों में 'ग्रे एरिया' को पहचानने में कठिनाई होती है क्योंकि अनुचित व्यवहार और गलतफहमी के बीच का अंतर करना बहुत मुश्किल होता है। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक अंतर, व्यक्तिगत धारणाएं और अलग-अलग व्याख्याएं भी प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना देती हैं। (नोट: ग्रे एरिया का अर्थ उन स्थितियों से है जहाँ मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता और सही-गलत की लाइन बहुत महीन हो जाती है।)
महिलाओं के विरुद्ध अपराध रोकने के लिए उठाए गए अन्य कदम
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आगे की राह
- जाँच प्रक्रियाओं का मानकीकरण: ICC सदस्यों को जाँच प्रक्रिया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, संवेदनशील गवाहियों के प्रबंधन तथा तर्कपूर्ण रिपोर्ट लेखन पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे जांच विधिक रूप से सुदृढ़ और मानवीय बन सके।
- ICC की स्वतंत्रता: जब आरोपों में वरिष्ठ प्रबंधन (CEO स्तर) शामिल हो, तब रक्षोपायों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। इन रक्षोपायों में बाह्य सदस्य के लिए सशक्त भूमिका और निष्पक्षता व ICC निर्णयों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए संगठनात्मक दबाव को कम करने वाले तंत्र शामिल हैं।
- पीड़िता सुरक्षा: गोपनीयता भंग होने से रोकने हेतु कठोर आंतरिक प्रोटोकॉल बनाए जाने चाहिए, उल्लंघन पर दंड का प्रावधान होना चाहिए तथा पीड़िता को जाँच के दौरान सुरक्षित कार्य परिवेश (कोई प्रतिशोध नहीं) सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे रिपोर्टिंग और निष्पक्षता दोनों में वृद्धि हो सके।
- संवेदीकरण कार्यक्रम: अचेतन पूर्वाग्रहों को दूर करने और संगठन के भीतर सम्मान व समानुभूति की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए ताकि विश्वास और सुरक्षित कार्य परिवेश का निर्माण हो सके।
- साक्ष्य प्रबंधन प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करना: ICCs को साक्ष्य एकत्र करने और उनका आकलन करने के लिए सुदृढ़ प्रक्रियाओं को अपनाना चाहिए। साक्ष्यों में सत्यापित दस्तावेजी साक्ष्य (ईमेल, टेक्स्ट, रिकॉर्ड) और सावधानीपूर्वक क्रॉस-चेक किए गए गवाहों के बयान शामिल हैं।
निष्कर्ष
पॉश (PoSH) अधिनियम के दायरे का हालिया न्यायिक विस्तार कार्यस्थल की बदलती और आपस में जुड़े जगत में जवाबदेही की खामियों को दूर करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। आगे चलकर, सतत संस्थागत प्रतिबद्धता, निरंतर संवेदीकरण और प्रक्रियात्मक कठोरता, पॉश (PoSH) को एक प्रतिक्रियाशील निवारण तंत्र से सभी महिलाओं के लिए सुरक्षित, समावेशी और न्यायसंगत कार्यस्थलों की सक्रिय गारंटी में बदलने के लिए आवश्यक हैं।