तमिलनाडु ने भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों की अपनी सूची में पांच और उत्पाद जोड़े।
नए GI उत्पादों में निम्नलिखित शामिल हैं
- वोरैयूर सूती साड़ी: तिरुची जिले की मूल कारीगरी।
- कविंदपडी नट्टू सक्कारै: एक गुड़ पाउडर।
- नमक्कल मक्कल पतिरांगल: सोपस्टोन (खड़िया पत्थर) के बर्तन।
- थूयामल्ली चावल की किस्म: थूयामल्ली का अर्थ है 'शुद्ध चमेली’। यह 135 से 140 दिनों में उगाई जाने वाली एक पारंपरिक साम्भा-सीज़न चावल की किस्म है।
- अम्बासमुद्रम चोप्पू सामान: लकड़ी के खिलौने।
नोट: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के पोंडुरु खादी को भी भौगोलिक संकेतक टैग (GI tag) प्राप्त हुआ है।
- यह मुख्य रूप से छोटे रेशे वाली और पहाड़ी किस्म की कीट प्रतिरोधी कपास से निर्मित होती है। इस कपास की खेती में रसायनों का उपयोग नहीं होता है।
GI टैग के बारे में
- GI टैग का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों पर किया जाता है, जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है। इसी उत्पत्ति के कारण इन उत्पादों में विशिष्ट गुण या प्रतिष्ठा होती है।
- भारत में, वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 GI के पंजीकरण व बेहतर संरक्षण का प्रावधान करता है।
- यह 10 वर्षों के लिए प्रदान किया जाता है। इस अवधि का नवीनीकरण कराया जा सकता है।
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1 sourceअसम का माजुली द्वीप एशिया के प्रथम संरक्षित शाही पक्षी अभयारण्य को पुनर्जीवित करने के लिए चराइचुंग महोत्सव की मेजबानी कर रहा है।
- यह महोत्सव 'चराइचुंग' की 392 वर्ष पुरानी विरासत की याद दिलाता है। 1633 ई. में अहोम राजा स्वर्गदेव प्रताप सिंह ने एशिया के पहले संरक्षित शाही पक्षी अभयारण्य ‘चराइचुंग’ की स्थापना की थी।
माजुली के बारे में
- माजुली असम में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है।
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा संघर्ष के बीच भारत ने प्रीह विहियर मंदिर की सुरक्षा का आह्वान किया।
प्रीह विहियर मंदिर के बारे में:
- अवस्थिति: कंबोडिया में (थाईलैंड से सटी सीमा के निकट)।
- प्रधान देवता: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
- इतिहास: इस मंदिर का निर्माण खमेर राजवंश के राजा यशोवर्मन प्रथम (889–910 ईस्वी) ने आरंभ कराया था तथा राजा सूर्यवर्मन द्वितीय (1113–1150 ईस्वी) के शासनकाल के दौरान इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ था।
- यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
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1 sourceसंयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं का गठबंधन (UNAOC) विभाजनों को समाप्त करने के दो दशक पूरे कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं का गठबंधन (UNAOC) के बारे में:
- सचिवालय: न्यूयॉर्क।
- उत्पत्ति: तुर्किये गणराज्य और स्पेन द्वारा 2005 में एक साथ शुरू किया गया था।
- उद्देश्य: ध्रुवीकरण एवं संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न राष्ट्रों और समुदायों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को बेहतर बनाने हेतु राज्यों, अंतर्राष्ट्रीय व क्षेत्रीय संगठनों, नागरिक समाज समूहों आदि सहित भागीदारों के एक वैश्विक नेटवर्क को बनाए रखना।
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1 sourceभारत ने 2030 के राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) की मेजबानी का अधिकार सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स का 100वां शताब्दी (सेंटेनरी) समारोह भी होगा।
राष्ट्रमंडल खेलों के बारे में
- यह बहु-खेल आयोजन है। यह प्रत्येक चार वर्षों पर आयोजित होता है। इसमें राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसकी शुरुआत 1930 में हुई थी।
- भारत ने इससे पहले 2010 में 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी।
- अहमदाबाद को आधिकारिक रूप से 2030 के सेंटेनरी कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए चुना गया है।
राष्ट्रमंडल के बारे में
- इसकी शुरुआत 1926 के इम्पीरियल कॉन्फ्रेंस से मानी जाती है, जहां ब्रिटेन और उसके डोमिनियन राज्यों ने सहमति दी कि वे ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर एक समान समुदाय के सदस्य हैं।
- लंदन घोषणा-पत्र (1949) ने आधुनिक राष्ट्रमंडल की नींव रखी और यह स्पष्ट किया कि गणराज्य और अन्य देश भी राष्ट्रमंडल के सदस्य बन सकते हैं।
- सदस्य देश: कुल 56 देश।
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1 sourceप्रधान मंत्री ने दोहा में आयोजित 2025 फिडे (FIDE) रैपिड शतरंज चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने पर भारतीय ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी और अर्जुन एरिगैसी को बधाई दी।
- अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE): यह शतरंज के खेल का शासी निकाय है। इसका मुख्यालय लुसाने (स्विट्जरलैंड) में स्थित है।
अन्य संबंधित तथ्य
- ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी ने इस प्रतिस्पर्धा में अपना पहला (Maiden) कांस्य पदक जीता है।
- वे महान खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद के बाद पोडियम फिनिश पर स्थान हासिल करने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं।
- पोडियम फिनिश यानी शीर्ष तीन पदक (स्वर्ण, रजत व कांस्य) जीतने वाले खिलाड़ियों में शामिल होना।
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1 sourceभारत व जॉर्डन ने क्रमश: एलोरा और पेट्रा गुफाओं के बीच एक ट्विनिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- ये गुफाएं यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं तथा अपनी शैलकृत स्थापत्यकला (Rock-cut architecture) के लिए प्रसिद्ध हैं।
एलोरा गुफाओं के बारे में:
- स्थान: एलागंगा नदी के निकट चरणांद्री पहाड़ियां (महाराष्ट्र)।
- उत्पत्ति: मुख्य रूप से राष्ट्रकूट और यादव राजवंश द्वारा 600-1000 ईस्वी के बीच उत्कीर्ण की गई थीं।
- स्थापत्यकला: ये गुफाएं बेसाल्ट चट्टानों को ऊपर से नीचे तक काटकर बनाई गई हैं।
- धर्म: हिंदू, बौद्ध और जैन स्मारक उत्कीर्ण हैं, जो धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाते हैं।
- इनमें इन तीनों धर्मों से संबंधित भित्ति चित्र भी हैं।
पेट्रा गुफाओं के बारे में:
- पेट्रा को "रोज़ सिटी” (गुलाब शहर) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इस कारण, क्योंकि यह अपनी गुलाबी बलुआ पत्थर की चट्टानों के लिए प्रसिद्ध है। यह लगभग चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से स्थापित हुए नबातायन या नबाती साम्राज्य की राजधानी थी।
- यह आधी निर्मित है और आधी चट्टान में तराशी गई है। यह दर्रों और घाटियों से युक्त पहाड़ों से घिरी हुई है।