सुर्ख़ियों में क्यों?
ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी स्थायी समिति ने 'भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013' (RFCTLARR अधिनियम, 2013) पर एक रिपोर्ट जारी की है।
अन्य संबंधित तथ्य
- इस रिपोर्ट में RFCTLARR अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है।
- RFCTLARR अधिनियम का उद्देश्य उन लोगों को उचित मुआवजा प्रदान करना है जिनकी भूमि ली गई है। साथ ही, इसका उद्देश्य कारखानों और अवसंरचना परियोजनाओं की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना तथा प्रभावित लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
- RFCTLARR अधिनियम ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 का स्थान लिया।
RFCTLARR अधिनियम, 2013 के प्रमुख प्रावधान
अनुचित अधिग्रहण पर रोक |
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उचित मुआवजा |
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सहमति की आवश्यकता |
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अनुप्रयुक्त / अनुपयोगी भूमि की वापसी |
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किसानों की भूमि का संरक्षण |
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अनुसूचित क्षेत्रों के लिए संरक्षण |
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सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) |
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पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन |
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संस्थागत ढांचा |
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छूट |
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अधिनियम के कार्यान्वयन में प्रमुख मुद्दे
- सतही SIA/EIA: सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) कभी-कभी केवल औपचारिकताओं के रूप में किए जाते हैं। इनकी रिपोर्ट अधिग्रहण के पक्ष में पहले से ही तैयार होती हैं।

- राष्ट्रीय निगरानी समिति (NMC) की विफलता: केन-बेतवा लिंक परियोजना और पोलावरम सिंचाई परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं में असंतोष को शांत करने में राष्ट्रीय निगरानी समिति (NMC) विफल रही है।
- अनुसूचित क्षेत्रों में दोषपूर्ण कार्यान्वयन: सांविधिक रक्षोपायों के बावजूद उल्लंघन होते हैं, जिनमें भूमि के मूल्य का कम आकलन, ग्राम सभा से नाममात्र का परामर्श और कमजोर वर्गों की उपेक्षा शामिल है।
- पेसा (PESA) नियमों का पालन न करना: अनुसूचित क्षेत्रों में परामर्श के संबंध में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 का उल्लंघन: अधिकारों का निपटान किए बिना वन भूमि का अधिग्रहण किया जाता है।
- भूमि वर्गीकरण में हेरफेर: ग्रीनफील्ड भूमि को ब्राउनफील्ड में बदलना और ग्रामीण भूमि को शहरी क्षेत्रों में पुनर्वर्गीकृत करना (विशेषकर भारतमाला जैसी अवसंरचना परियोजनाओं में)।
- दोषपूर्ण पुनर्वास: सीमांकित और सेवा-युक्त स्थानांतरण स्थल मौजूद होने से पहले ही नकद राशि वितरित कर दी जाती है। 'भूमि के बदले भूमि' केवल कागजों पर दी जाती है या निम्न गुणवत्ता की भूमि दी जाती है, आदि।
- संरचनात्मक विफलताएं: अधिनियम के लागू होने के एक दशक से अधिक समय बाद भी, कई राज्यों ने अभी तक अनिवार्य LARRA (प्राधिकरणों) की स्थापना नहीं की है, जिससे प्रभावित परिवारों के लिए न्याय में देरी होती है।
प्रमुख सिफारिशें
- ग्राम सभा की भूमिका को सुदृढ़ करना: सभी भूमि अधिग्रहणों के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य बनाई जाए और उसे उन प्रस्तावों को अस्वीकार करने का अधिकार दिया जाए जो स्थानीय विकास योजनाओं या सामुदायिक हितों के विपरीत हैं।
- "आजीविका मूल्य" दृष्टिकोण अपनाना: मुआवजा केवल भूमि के नकद मूल्य तक सीमित न रहकर "आजीविका मूल्य" पर आधारित होना चाहिए। अतः इसमें वनों, जल स्रोतों और सामुदायिक परिसंपत्तियों तक पहुँच की हानि को भी शामिल किया जाना चाहिए।
- LARRA और FRA का एकीकरण: परंपरागत और सामुदायिक वन उपयोग अधिकारों के नुकसान को स्पष्ट रूप से आर्थिक विस्थापन माना जाना चाहिए, जिसके लिए पूर्ण पुनर्वास की आवश्यकता होती है।
- वर्गीकरण की केंद्रीय निगरानी: भूमि वर्गीकरण प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए एक समर्पित 'केंद्रीय निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र' स्थापित किया जाए।
- अभिनव लाभ साझाकरण मॉडल: मौजूदा मुआवजे तथा पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन हकदारियों के अलावा, या तो परियोजना संबंधी इक्विटी का एक हिस्सा (ग्राम सभा में वैधानिक ट्रस्ट के माध्यम से आयोजित) या सकल परियोजना राजस्व का एक प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की गारंटी देनी चाहिए।
- विस्थापित जनजातीय परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन को सुदृढ़ करना: जब तक प्रतिस्थापन स्थल या कृषि भूमि का सर्वेक्षण, सीमांकन और मृदा परीक्षण न हो जाए तथा मूलभूत सेवाएँ कार्यात्मक न हो जाएँ, तब तक कोई विस्थापन नहीं किया जाना चाहिए।
- डिजिटल पारदर्शिता: अधिग्रहण से संबंधित सभी दस्तावेज, जिनमें SIA रिपोर्ट, मुआवजे का विवरण तथा पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की स्थिति शामिल है, को एक आधिकारिक पारदर्शिता पोर्टल पर प्रकाशित किया जाना चाहिए।
- अन्य:
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में LARRAs की तत्काल स्थापना की जानी चाहिए।
- भूमि संसाधन विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिकूल पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए EIA और SIA दोनों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
RFCTLARR अधिनियम, 2013, एक प्रगतिशील कानून है, किंतु खराब कार्यान्वयन, कमजोर निगरानी और सामुदायिक रक्षोपायों के कमजोर पड़ने से इसकी प्रभावशीलता सीमित हो गई है। समिति भूमि अधिग्रहण को अधिक न्यायसंगत और जन-केंद्रित बनाने के लिए ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, PESA और FRA का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और पुनर्वास तथा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर बल देती है।