सुर्ख़ियों में क्यों?
विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा/WADA) द्वारा प्रकाशित 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत लगातार तीसरे वर्ष विश्व में डोपिंग रोधी मामलों के उल्लंघन में शीर्ष पर रहा है।
भारत में अर्थ और स्थिति
- डोपिंग को प्रतिबंधित पदार्थों (प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं) के सेवन या खेल प्रदर्शन को अनुचित रूप से बेहतर बनाने और प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त के तरीकों के रूप में परिभाषित किया गया है।
- भारत में प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग के 260 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं, जिनकी पॉजिटिविटी दर 3.6% है।
- डोपिंग के दोषियों की कुल संख्या के मामले में भारत के बाद फ्रांस तत्पश्चात इटली का स्थान है।

डोपिंग के कारण
- आकर्षक प्रोत्साहन और सुनिश्चित पुरस्कार: उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को नियमों से हटकर सरकारी नौकरी और नकद पुरस्कार मिलते हैं।

- प्रतिबंधित पदार्थों की आसान उपलब्धता: उदाहरण के लिए, स्थानीय जिम और मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की पर्ची के एनाबॉलिक स्टेरॉयड आसानी से उपलब्ध होना।
- शिक्षा और जागरूकता की कमी: उदाहरण के लिए, वाडा अनुपालन की जानकारी के बिना स्थानीय प्रशिक्षकों द्वारा सुझाए गए सप्लीमेंट्स या दवाओं का सेवन करना।
- खेल अवसंरचना और संस्थागत समर्थन की कमी: खराब प्रशिक्षण सुविधाएं, सीमित अवसर और अपर्याप्त वैज्ञानिक समर्थन खिलाड़ियों को डोपिंग जैसे शॉर्टकट अपनाने के लिए विवश करते हैं।
- सामाजिक और पारिवारिक दबाव: भारत में खेल को प्रायः एक स्थायी करियर विकल्प नहीं माना जाता है, जिसके कारण खिलाड़ियों पर कोचों, परिवारों और समाज की ओर से त्वरित सफलता प्राप्त करने का तीव्र दबाव होता है।
- कमजोर परीक्षण और निगरानी तंत्र: छोटे टूर्नामेंटों और जिला-स्तरीय प्रतियोगिताओं में एंटी-डोपिंग निगरानी लगभग अनुपस्थित होती है, जिससे रोकथाम कम हो जाती है और उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है।
- कमजोर शासन संरचना: भाई-भतीजावाद, वित्तीय अनियमितताएं, अनुचित चयन और पारदर्शिता की कमी, के कारण खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार और डोपिंग घोटाले होते हैं।
- वाडा के फंडिंग में कटौती: विकसित देशों पर निर्भरता डोपिंग-मुक्त खेल को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, अमेरिका द्वारा 2025 में वाडा को धनराशि देना बंद करने का निर्णय लेना।

भारत में डोपिंग रोकने के लिए उठाए गए कदम
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निष्कर्ष
"डोप मुक्त भारत" का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिक्रियात्मक प्रवर्तन से आगे बढ़कर रोकथाम और सत्यनिष्ठा पर आधारित तंत्र की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव की आवश्यकता है। इस रणनीति के तहत एथलीट बायोलॉजिकल पासपोर्ट जैसी उन्नत वैज्ञानिक निगरानी को खिलाड़ियों और उनके सहयोगी तंत्र के लिए मजबूत शिक्षा कार्यक्रमों से जोड़ना होगा, ताकि नियमों का पालन डर से नहीं बल्कि समझ और जागरूकता से हो।