तीसरा लॉन्च पैड (THIRD LAUNCH PAD) | Current Affairs | Vision IAS
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तीसरा लॉन्च पैड (THIRD LAUNCH PAD)

05 Mar 2025
18 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में 'तीसरे लॉन्च पैड' (TLP) की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

तीसरे लॉन्च पैड' (TLP) के बारे में

  • प्रमुख विशेषताएं: इसे अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (Next Generation Launch Vehicles: NGLV) और प्रक्षेपण यान मार्क-3 (Launch Vehicle Mark-3: LVM3) के प्रक्षेपण के लिए कॉन्फ़िगर किया गया। इसमें अर्ध क्रायोजेनिक चरण के साथ-साथ NGLV की उन्नत विशेषताएं भी शामिल हैं। 
  • समय-सीमा: इसे 4 वर्षों के भीतर स्थापित किया जाएगा। 
  • तीसरे लॉन्च पैड (TLP) का महत्त्व  
    • क्षमता वृद्धि: इससे अधिक बार प्रक्षेपण किए जा सकेंगे। साथ ही, इससे भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान एवं अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों आदि के लिए भारत की प्रक्षेपण क्षमता मज़बूत होगी।
    • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का समग्र दृष्टिकोण: 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और 2040 तक भारतीय चालक दल के साथ चंद्रमा पर लैंडिंग के लिए नई प्रणोदन प्रणालियों के साथ अगली पीढ़ी के भारी प्रक्षेपण वाहनों की आवश्यकता होगी। 
    • भावी परिवहन: आगामी 25-30 वर्षों के लिए विकसित हो रही अंतरिक्ष परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी यह अत्यंत आवश्यक है। 

भारत में मौजूदा लॉन्च पैड

  • वर्तमान में, इसरो श्रीहरिकोटा में स्थित 2 लॉन्च पैड पर निर्भर है: 
    • प्रथम लॉन्च पैड (First Launch Pad) को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle: PSLV) और लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (Small Satellite Launch Vehicle: SSLV) के लिए प्रक्षेपण सहायता प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था। 
    • दूसरा लॉन्च पैड (Second Launch Pad) मुख्य रूप से भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle: GSLV) और प्रक्षेपण यान मार्क-3 (Launch Vehicle Mark-3: LVM3) के लिए स्थापित किया गया था। साथ ही, यह PSLV के लिए स्टैंडबाय के रूप में भी कार्य करता है।

निष्कर्ष

अगली पीढ़ी के भारी श्रेणी के प्रक्षेपण यानों (Next Generation Launch Vehicles) के लिए तीसरे लॉन्च पैड का शीघ्र निर्माण और SLP के लिए एक बैकअप के रूप में इसका उपयोग अत्यंत आवश्यक है, ताकि अंतरिक्ष परिवहन की बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके। 

नई पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (NGLV) कार्यक्रम 

  • NGLV के बारे में: इसका उद्देश्य सैटेलाइट, स्पेसक्राफ्ट और अन्य पेलोड को लॉन्च करने के लिए एक नया रॉकेट विकसित करना है। इस नये रॉकेट को सूर्य रॉकेट नाम दिया गया है।
  • विशेषताएं:
    • यह थ्री-स्टेज व्हीकल है। इसमें पहला स्टेज पुनः प्रयोज्य (Reusable) है। पुन: प्रयोज्यता के परिणामस्वरूप वहनीय प्रक्षेपण और मॉड्यूलर ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम का विकास संभव हो पाएगा।
    • बूस्टर स्टेज में सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन का उपयोग होगा तथा ईंधन के रूप में परिष्कृत केरोसिन व ऑक्सिडाइजर के रूप में लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग किया जाएगा। 
    • इसकी पेलोड क्षमता, वर्तमान पेलोड क्षमता से तीन गुना अधिक होगी। इसकी लागत LVM3 की तुलना में 1.5 गुना अधिक होगी। 

इसरो के अन्य प्रक्षेपण यान 

  • ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV): यह भारत का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। 
    • इसमें 4 चरण होते है, जिसमें प्रथम और तृतीय चरण के ठोस रॉकेट मोटर के होते हैं तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरण तरल ईंधन द्वारा संचालित इंजन के होते हैं। 
  • भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV): यह चौथी पीढ़ी का कार्यशील प्रक्षेपण यान है। इसमें 3-चरण और चार तरल स्ट्रैप-ऑन मोटर होते हैं। 
    • इसका उपयोग संचार उपग्रहों को भू-अंतरण कक्षा में लॉन्च करने के लिए किया जाता है और इसके तीसरे चरण में क्रायोजेनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV): यह एक 3 चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसमें तीन ठोस प्रणोदन चरण और एक टर्मिनल चरण के रूप में तरल प्रणोदन आधारित वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल (VTM) होता है। 
  • भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान Mk-III (LVM3): इसको तीन चरण वाले वाहन के रूप में कॉन्फ़िगर किया गया है। इसमें दो ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स (S200), एक तरल कोर चरण (L110) और एक उच्च थ्रस्ट वाला क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25) होते हैं। 
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