सुर्ख़ियों में क्यों?
केंद्र सरकार ने 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को स्थापित करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इन FPOs का गठन "10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन और संवर्धन" योजना के तहत किया गया है।
'10,000 FPOs के गठन एवं संवर्धन की योजना' के बारे में
- इस योजना को 2020 में शुरू किया गया था। इस योजना के लिए 2027-28 तक 6,865 करोड़ रुपये के बजट आवंटन का प्रावधान किया गया है।
- योजना का प्रकार: यह केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना है।
- उद्देश्य: 10,000 नए FPOs के गठन के लिए एक समग्र और अनुकूल व्यवस्था प्रदान करना, ताकि आय अर्जक, स्थायी और संधारणीय कृषि विकास को बढ़ावा दिया जा सके, साथ ही कृषक समुदायों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास और कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
- कार्यान्वयन एजेंसियां: इनमें लघु कृषक कृषि-व्यवसाय संघ (Small Farmers Agri-Business Consortium: SFAC), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation: NCDC), नाबार्ड, नेफेड जैसी कुल 9 एजेंसियां शामिल हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसियां, क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठनों (Cluster Based Business Organizations: CBBOs) को शामिल करेंगी, ताकि FPO को संगठित किया जा सके और उनका पंजीकरण कराया जा सके। साथ ही ये 5 साल की अवधि के लिए प्रत्येक FPO को पेशेवर सहायता भी प्रदान करेंगे।
- CBBOs, किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े सभी विषयों पर पूरी जानकारी प्रदान करने वाला प्लेटफार्म है।
- कार्यान्वयन एजेंसियां, क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठनों (Cluster Based Business Organizations: CBBOs) को शामिल करेंगी, ताकि FPO को संगठित किया जा सके और उनका पंजीकरण कराया जा सके। साथ ही ये 5 साल की अवधि के लिए प्रत्येक FPO को पेशेवर सहायता भी प्रदान करेंगे।
- विशेष ध्यान: लघु, सीमांत और महिला किसान/ महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्य, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के किसान तथा आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणियों के अन्य लोगों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। साथ ही "एक जिला एक उत्पाद" योजना को अपनाया जाएगा ताकि उत्पाद विशेष को बढ़ावा दिया जा सके और इनके लिए बेहतर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, ब्रांडिंग सुविधाएं और निर्यात सुनिश्चित किया जा सके।
- मुख्य प्रावधान:
- प्रोडक्ट क्लस्टर एरिया एप्रोच एवं विशेष कमोडिटी-आधारित अप्रोच के आधार पर FPOs का गठन किया जा रहा है।
- वित्तीय सहायता: प्रत्येक FPO को 3 वर्षों के लिए प्रबंधन लागत के लिए 18 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं।
- इक्विटी अनुदान: FPOs के प्रत्येक किसान सदस्य को 2,000 रुपए का इक्विटी अनुदान दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति FPO 15.00 लाख रुपये है।
- क्रेडिट गारंटी सुविधा: पात्र ऋणदाता संस्थानों से प्रति FPO 2 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट लोन की गारंटी सुविधा प्रदान की गई है।
- उपलब्धि: योजना की शुरुआत के बाद से, 4,761 FPOs को 254.4 करोड़ रुपये का इक्विटी अनुदान जारी किया गया है और 1,900 FPOs को 453 करोड़ रुपये का क्रेडिट गारंटी कवर जारी किया गया है।
- देश में लगभग 30 लाख किसान FPOs से जुड़े हैं, जिनमें से लगभग 40% महिलाएं हैं।
FPOs के बारे में
- FPOs का गठन कृषि उत्पादकों (किसानों, दूध उत्पादकों आदि) के समूह द्वारा किया जाता है। वे उत्पादक संगठन में शेयरधारक होते हैं।
- उद्देश्य: किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा उन्हें बेहतर सहायता, आय और लाभप्रदता प्रदान करना।
- FPOs को या तो कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत या संबंधित राज्यों के सहकारी समिति अधिनियम, 1912 के तहत पंजीकृत किया जाता है।
- इसे केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए "FPO रजिस्ट्री पोर्टल" पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना चाहिए। इसके बाद FPO को एक विशिष्ट पहचान संख्या, यानी रजिस्ट्रेशन आइडेंटी कोड (RIC) आवंटित किया जाता है।
- कृषि और किसान कल्याण विभाग (केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय) ने लघु किसान कृषि-व्यवसाय संघ (SFAC) को FPO के गठन में राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करने का अधिकार दिया है।
FPOs के समक्ष मौजूद चुनौतियां
- पेशेवर प्रबंधन कौशल का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में FPO व्यवसाय को पेशेवर रूप से प्रबंधित करने के लिए अनुभवी, प्रशिक्षित एवं पेशेवर CEO की कमी है।
- फसल कटाई के बाद का नुकसान: FPOs को अक्सर आधुनिक कृषि तकनीकों, भंडारण सुविधाओं एवं परिवहन संबंधी अवसंरचना के मामले में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इन वजहों से फसल कटाई के बाद किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
- निवेश और ऋण प्राप्ति में चुनौती: प्राथमिक या द्वितीयक प्रोसेसिंग, भंडारण और कस्टम हायरिंग सुविधाओं में निवेश करने की किसानों की क्षमता कम है। FPOs को बिना कुछ गिरवी रखे ऋण (कोलेटरल फ्री लोन) प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है।
- गुणवत्ता संबंधी मानक और प्रमाणन: उत्पादों के लिए गुणवत्ता मानकों को पूरा करना और प्रमाणन प्राप्त करना जटिल एवं महंगी प्रक्रिया होती है। इससे सबसे अधिक नुकसान विशेष रूप से छोटे और संसाधन-विहीन FPOs को उठाना पड़ता है।
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संधारणीयता संबंधी चुनौतियां: FPOs के पास अक्सर जलवायु-अनुकूल और संधारणीय कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए संसाधनों और विशेषज्ञता की कमी होती है। इससे उनके जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।
- बाजार में अस्थिरता: FPOs अक्सर एक ही फसल या कुछ फसलों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे फसल के नष्ट हो जाने पर या बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में समस्याएं पैदा होती हैं। इस स्थिति में FPO के सदस्यों की आय और लाभ पर असर पड़ता है।
आगे की राह
- कृषि कार्य में प्रौद्योगिकी को अपनाने को बढ़ावा देना: उत्पादकता बढ़ाने एवं फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रिसिजन फार्मिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और कृषि प्रबंधन सॉफ्टवेयर जैसी तकनीक को अपनाना चाहिए।
- क्षमता निर्माण और हैंडहोल्डिंग: FPO सदस्यों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, संधारणीय खेती के तरीकों को अपनाने और संसाधन का प्रभावी तरीके से प्रबंधन करने पर प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। साथ ही क्षमता निर्माण कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
- FPO के अलग-अलग चरणों के लिए एक मानक स्कोरिंग मॉडल बनाना चाहिए, ताकि वित्तीय संस्थान, निजी एजेंसियां, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR एजेंसियां और अन्य हितधारक अपना संसाधन उपलब्ध कराने से पहले संस्था (FPO) की सही स्थिति को समझ सकें।