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इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (INDIAN OCEAN RIM ASSOCIATION: IORA)

02 May 2025
20 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

भारत 2025 में अगले दो वर्षों के लिए इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की अध्यक्षता ग्रहण करेगा।

इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के बारे में

  • उत्पत्ति: यह एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 1997 में हुई थी। इसका विज़न 1995 में नेल्सन मंडेला की भारत यात्रा के दौरान सामने आया था।
  • उद्देश्य: हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग और सतत विकास को प्रोत्साहित करना।
  • सचिवालय: मॉरीशस
  • सदस्य: 23 सदस्य और 12 संवाद साझेदार (इन्फोग्राफिक देखें)
  • IORA गवर्नेंस:
    • IORA काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स: यह निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है, जिसमें सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री (या समकक्ष) शामिल होते हैं। इसकी वार्षिक बैठक होती है।
    • ट्रोइका: यह एक संस्थागत तंत्र है, जिसमें IORA के वर्तमान अध्यक्ष, उपाध्यक्ष (भावी अध्यक्ष), तथा पूर्व अध्यक्ष (चार्टर में पिछले अध्यक्ष के रूप में संदर्भित) शामिल होते हैं।
  • प्रमुख परियोजनाएं:
    • हिंद महासागर संवाद (Indian Ocean Dialogue: IOD): वर्ष 2013 में ट्रैक 1.5 फोरम की शुरुआत की गई थी, जो हिंद महासागर क्षेत्र में प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच खुली वार्ता को प्रोत्साहित करता है।
    • IORA सतत विकास कार्यक्रम (ISDP): वर्ष 2014 में इसे उन अल्प विकसित देशों (LDCs) के लिए प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें परियोजनाएं संचालित करने के लिए सहायता एवं समर्थन की आवश्यकता होती है।

भारत के लिए IORA का महत्त्व

  • हिंद महासागर क्षेत्र का भू-सामरिक और आर्थिक महत्त्व: 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, हिंद महासागर से वैश्विक व्यापार का 75% और दैनिक तेल खपत का 50% परिवहन होता है। साथ ही, IORA देशों के बीच व्यापार लगभग 800 बिलियन डॉलर है।
  • अन्य क्षेत्रीय संगठनों में चुनौतियां: उदाहरण के लिए- SAARC (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) और BIMSTEC (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल), राजनीतिक अस्थिरता, वार्ताओं का रुका होना जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • सुरक्षित स्थान: IORA भारत और क्षेत्र के उन अन्य देशों के लिए कम विवादास्पद स्थान है, जो बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता से दूर रहना चाहते हैं।
    • उदाहरण के लिए- QUAD (चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद) का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ-साथ उसके सैन्य सहयोगी ऑस्ट्रेलिया और जापान भी कर रहे हैं।
  • समुद्री सुरक्षा: IORA समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के सिद्धांतों का समर्थन करता है। साथ ही, समुद्री सुरक्षा संबंधी सहयोग पर नियमित कार्यशालाओं का आयोजन भी करता है।

IORA के कामकाज से संबंधित मुद्दे

  • वित्त-पोषण की कमी: IORA के फंड इसके बढ़ते संलग्नता के क्षेत्रों को सहयोग देने के लिए अपर्याप्त हैं।
    • बिम्सटेक, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (Indian Ocean Naval Symposium: IONS) जैसे अन्य क्षेत्रीय निकायों के साथ प्रतिस्पर्धा से फोकस एवं संसाधन और अधिक कमजोर हो जाते हैं।
  • संस्थागत कमजोरियां: मॉरीशस स्थित सचिवालय में सीमित कर्मचारी हैं और प्रभावी गवर्नेंस के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी सही से नहीं हो पाता है।
  • भू-राजनीतिक तनाव: भारत-पाकिस्तान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा बेल्ट एंड रोड पहल के माध्यम से चीन की भागीदारी जैसी प्रतिद्वंद्विताएं सदस्यों एवं साझेदारों के बीच सहयोगात्मक संवाद को जटिल बनाती हैं।
  • अन्य मुद्दे: नीति-निर्माण और वित्त-पोषण में निजी क्षेत्रक की भागीदारी का अभाव; अपारदर्शी निवेश एवं अस्थिर ऋण; सदस्यों के बीच आर्थिक असमानताएं; हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चिंताएं जैसे हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका में समुद्री डकैती, हूती विद्रोहियों के हमले आदि।

निष्कर्ष

भारत अपने SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विज़न के साथ IORA के लक्ष्यों को संरेखित करते हुए, क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने हेतु अपनी अध्यक्षता का उपयोग कर सकता है। IORA की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए सीड फंडिंग, PPPs और उद्योगों की सहभागिता के माध्यम से सतत वित्त-पोषण सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके अलावा, संस्थागत क्षमता को प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण, उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलनों और सदस्य-राज्य तालमेल के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही, मजबूत सुरक्षा ढांचे और नौसैनिक सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को सशक्त किया जा सकता है।

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